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Jaipur News: सहकारिता AC कांड में अफसरों को कठोर कार्रवाई से बचाने की कोशिश की गई. अफसरों को मेहरबानी दिखाते हुए विभाग ने उनकी चार्जशीट ही बदल दी, जिससे इन अफसरों पर सिर्फ दिखावे की कार्रवाई हो सके. आखिरकार अफसरों को AC कांड में कैसे पसीना आने से बचाया जा रहा है, h{]fS इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में!
उमस में पसीना आने से बचाने की कोशिश सफल
उमस भरे मौसम के बीच सहकारिता में अफसरों को पसीना ना आए, इसके लिए विभाग ने चार्जशीट ही बदल दी. सहकारिता AC कांड में अफसरों को कठोर कार्रवाई से बचाने की कोशिश की गई. बिना अनुमति एसी लगाने वाले 4 दोषी अफसरों की विभाग ने चार्जशीट बदल दी. पहले अधिकारियों को 16 CC में चार्जशीट देनी थी,लेकिन अचानक से इन दोषी अफसरों पर मेहरबानी हुई और तुरंत चार्जशीट 17 सीसी में बदल गई.विभाग ने SLBC MD जितेंद्र प्रसाद शर्मा,एडिशनल रजिस्ट्रार 2 संदीप खंडेलवाल, सहकारिता एडिशनल रजिस्ट्रार बैंकिंग सुरेंद्र सिंह राठौड़, अपैक्स बैंक MD संजय पाठक की चार्जशीट बदली गई.16 CC की चार्जशीट में कठोर कार्रवाई का प्रावधान जबकि 17 CC की चार्जशीट में इतना कठोर प्रावधान नहीं. इसी वजह से अफसरों की चार्जशीट ही बदली दी गई.अब विभाग ने सवाल ये उठता है? कि आखिरकार इन चारों अफसरों पर कौन कौन मेहरबान है. विभाग ने तत्कालीन संयुक्त रजिस्ट्रार प्रशासन सुरभि शर्मा को भी बिना अनुमति एसी लगाने पर नोटिस थमाया है.
16 सीसी के तहत कार्रवाई का प्रावधान
राजस्थान सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण,अपील नियम, 1958 में 16 सीसी के तहत अनुशासनहीनता के लिए सरकारी कर्मचारी को दंडित किया जा सकता है. इसमें जांच प्रक्रिया का पालन करके कर्मचारी को सुनवाई का मौका दिया जाता है और यदि वह दोषी पाया जाता है. तो उस पर गंभीर दंड लगाया जाता है. जैसे वेतन वृद्धि रोकना या सेवा से बर्खास्त करना, निलंबन. इस नियम के तहत कार्रवाई से पहले कर्मचारी को अपना पक्ष रखने और बेगुनाही साबित करने का अवसर दिया जाता है.16 सीसी की चार्जशीट दोषी कर्मचारी को डीओपी से मिलती है.
17 सीसी के तहत कार्रवाई का प्रावधान
राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम, 1958 में 17 सीसी के तहत किसी सरकारी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है,लेकिन 16 सीसी के मुकाबले कम.इसके तहत निलंबन, पदोन्नति रोकना या आर्थिक नुकसान की वसूली शामिल हो सकती है. 17 सीसी की चार्जशीट संबंधित विभाग से दोषी कर्मचारी को थमाई जाती है.
किसने किसके दफ्तर में लगवाया एसी
SLBC MD जितेंद्र प्रसाद शर्मा ने एडिशनल रजिस्ट्रार 2 संदीप खंडेलवाल के दफ्तर में,अपैक्स बैंक MD संजय पाठक ने एडिशनल रजिस्ट्रार बैंकिंग सुरेंद्र सिंह के ऑफिस में बिना अनुमति के एसी लगवाई हालांकि अभी तो नेहरू सहकार भवन में बिना वित्त विभाग की स्वीकृति के एसी लगाने वाले अफसरों पर भी गाज गिरेगी लेकिन गाज गिरने से पहले सहकारिता विभाग में अफसरों को कठोर कार्रवाई से बचाया जा रहा है. बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार किसकी सिफारिश से चार्जशीट बदली गई.
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