कहीं दिशा शूल से तो नहीं बिगड़ रहे आपके सारे काम, करें यह उपाय, राहु सब करेगा आसान

रविवार को पान या घी खाकर, सोमवार को दर्पण देखकर या दूध पीकर, मंगल को गुड़, खाकर, बुधवार को धनिया या तिल खाकर, गुरुवार को जीरा या दही खाकर, शुक्रवार को दही पीकर और शनिवार को अदरक या उड़द खाकर यात्रा के लिए प्रस्थान किया जा सकता है.

कहीं दिशा शूल से तो नहीं बिगड़ रहे आपके सारे काम, करें यह उपाय, राहु सब करेगा आसान
ज्योतिषाचार्य पंडित निलेश शास्त्री से जानें दिशाशूल से बचाव के उपाय.

Jaipur/delhi: कोई भी कार्य करने से पूर्व शुभ योग शुभ मुहूर्त देखा जाता है. जितना आवश्यक मुहूर्त चौघड़िया होता है, उसमें राहु काल को त्याग कर कार्य किया जाता है. 

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ज्योतिषाचार्य पंडित निलेश शास्त्री (Nilesh Shashtri) के अनुसार, राहु काल में किया कार्य नुकसान देता है. खरीदारी, वैवाहिक चर्चा शुभ यात्रा आदि के समय राहु काल का समय टाल कर करना अच्छा माना गया है. 

हमें रोजाना राहु काल बेला को भी ध्यान में रखना चाहिए, जो साधारणतया स्थानीय समयानुसार-
सोमवार को सुबह 7:30 से 9:00 तक
मंगलवार को 15:00 से 16:30 तक
बुधवार को 12 से 13:30 तक 
गुरूवार को 13:30 से 15:00 तक 
शुक्रवार को 10:30 से 12:00 तक 
शनिवार को 9: 00 से 10:30 तक
रविवार को सायं 16:30 से 18:30 बजे तक राहु काल रहता है.

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दिशा शूल पर विचार
ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक शुभ अशुभ कार्य के लिए दिशा शूल बताया गया है. आज हम भविष्यवक्ता पण्डित निलेश शास्त्री से जानते हैं कि यात्रा में कब देखा जाता है दिशाशूल? अगर लंबे समय जैसे 1 दिन से अधिक समय की यात्रा होती है, जब दिशाशूल का विचार किया जाता है. 1 दिन में ही जा कर वापस आना है तो किसी प्रकार का दिशा शूल का विचार नहीx किया जाता है. केवल राहु काल शुभ चौघड़िया देख कर यात्रा कर लेनी चाहिए. 

कौन से वार को कौन सी दिशा में यात्रा करना अशुभ माना जाता है, आइए जानते हैं पंडित निलेश शास्त्री से -
 सोमवार, शनिवार पूर्व दिशा
 रविवार, शुक्रवार पश्चिम दिशा
 गुरुवार- दक्षिण दिशा
 मंगलवार, बुधवार उत्तर दिशा

वारों के सामने दिए गए दिशाओं में दिशाशूल होता है. अतः उक्त दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए. पंडित निलेश शास्त्री ने बताया कि रविवार, गुरुवार, शुक्रवार के दोष रात्रि में प्रभावित नहीं होते हैं. सोमवार, मंगलवार, शनिवार के दोष दिन में प्रभावी नहीं होते हैं. किंतु बुधवार तो हर प्रकार से उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए. 

अति आवश्यक कार्य होने पर यात्रा करना जरूरी हो तो यह उपाय करने से दोष समाप्त हो जाता है. रविवार को पान या घी खाकर, सोमवार को दर्पण देखकर या दूध पीकर, मंगल को गुड़, खाकर, बुधवार को धनिया या तिल खाकर, गुरुवार को जीरा या दही खाकर, शुक्रवार को दही पीकर और शनिवार को अदरक या उड़द खाकर यात्रा के लिए प्रस्थान किया जा सकता है.