ई-ग्रास चालान में जालसाजी, 3 माह की जांच रिपोर्ट के बाद एक्शन
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ई-ग्रास चालान में जालसाजी, 3 माह की जांच रिपोर्ट के बाद एक्शन

 ई ग्रास (eGRAS) चालान के जरिए रजिस्ट्री करवाकर सरकार को  7.94 करोड़ रुपए का चूना लगाने के मामले में मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग (Registration & Stamps Department) ने बड़ा एक्शन लिया है.

ई-ग्रास चालान में जालसाजी, 3 माह की जांच रिपोर्ट के बाद एक्शन

Jaipur: ई ग्रास (eGRAS) चालान के जरिए रजिस्ट्री करवाकर सरकार को  7.94 करोड़ रुपए का चूना लगाने के मामले में मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग (Registration & Stamps Department) ने बड़ा एक्शन लिया है. करीब 3 महीने की लम्बी जांच के बाद विजिलेंस की रिपोर्ट पर विभाग ने जयपुर में 3 सब रजिस्ट्रार कार्यमुक्त कर दिया है. वहीं 7 बाबूओं को एपीओ किया है, जबकि 44 कर्मचारियों को कारण बताओं नोटिस जारी किया है.

वहीं इस मामले में लिप्त 19 स्टाम्प वेंडर्स के लाइसेंस को निरस्त करते हुए उनके खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया है. विभाग ने अपनी रिपोर्ट में माना कि अगर समय रहते चालानों का सत्यापन कर लिया जाता तो इतना बड़ा घपला नहीं होता और उसे रोका जा सकता था. यूज लिए ई-ग्रास चालान से रजिस्ट्री करवाकर 8 करोड़ की राजस्व को चपत लगाने के मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और स्टाम्प वेंडर्स पर एक्शन लिया है.

पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के आईजी महावीर प्रसाद ने बताया कि उच्च स्तरीय फेक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि ई-ग्रास चालानों का दुरुपयोग कर बिना शुल्क चुकाए दस्तावेजों का पंजीयन कराने का फर्जीवाड़ा कर 7.94 करोड़ रुपए की राजस्व का नुकसान पहुंचाया. जांच रिपोर्ट आने के बाद जयपुर के 19 स्टाम्प वेंडरों के लाइसेंस निरस्त कर FIR दर्ज करवाई है. साथ में 3 सब रजिस्ट्रार अधिकारियों को कार्यमुक्त कर रेवेन्यू बोर्ड भेज दिया है. इसके साथ ही 7 लिपिकों को एपीओ कर 44 कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए है. 

स्टाम्प आईजी ने बताया कि एक जुलाई 2021 को विभाग की जानकारी में आया की पहले से उपयोग में लिए जा चुके चालान को दस्तावेज के पंजीयन के लिए दोबारा उपयोग में लिया गया है. मामले की गम्भीरता को देखते हुए विभाग द्वारा मुख्यालय स्तर पर भी एक उच्च स्तरीय फेक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन कर उक्त मामलों में सघन जांच की गई. समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया है कि स्टाम्प वेण्डरों ने कोषालय से स्टाम्प खरीदने के लिए उपयोग में लिए गए चालानों को कूटरचित करके दस्तावेजों के पंजीयन के लिए दोबारा उपयोग में लिया गया है.

संबंधित सब रजिस्ट्रार, पंजीयन लिपिक और अन्य स्टाफ ने राज्य सरकार और विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों की अवहेलना कर चालानों का ई ग्रास साईट से सत्यापन किए बिना ही लापरवाही पूर्वक दस्तावेजों का पंजीयन किया है. यदि चालानों का सत्यापन किया जाता और समय पर अंक मिलान किया जाता तो ऐसे कूटरचित चालानों के दोबारा उपयोग को रोका जा सकता था.

मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग के महानिरीक्षक महावीर प्रसाद के अनुसार NIC की ओर से 913 ऐसे दस्तावेजों की सूची उपलब्ध करवाई गई. जिनमें पहले से ही उपयोग में लिए गए चालानों के दोबारा उपयोग की आशंका व्यक्त की गई. विभाग ने इन मामलों में पता लगाने के लिए मुख्यालय स्तर पर एक कमेटी का गठन कर इन मामलों जांच कराई. कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार कुल 17 उप पंजीयक कार्यालयों से संबंधित 876 दस्तावेजों में 7.94 करोड़ रुपए की राजस्व हानि का पता चला. इन प्रकरणों को संबंधित उप महानिरीक्षकों को भिजवा कर दस्तावेजों की कार्यालय प्रतियों से जांच करने के निर्देश दिए गए.

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राजस्व हानि पाए जाने की स्थिति में वसूली करने, मामले में आपराधिक कृत्य पाए जाने पर प्रकरण दर्ज कराने और विभागीय स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही के प्रस्ताव मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए. उप महानिरीक्षक स्टाम्प से मिली सूचना के अनुसार 676 प्रकरणों में से 11 प्रकरणों में राशि जमा होने का सत्यापन हो गया है. शेष 665 प्रकरणों में से 218 प्रकरणों में पक्षकारों की ओर से 2.28 करोड़ जमा करवाये जा चुके हैं और 447 प्रकरणों में 5. 64 करोड रुपये की वसूली बकाया है.

लापरवाही बरतने पर इन पर गिरी गाज
उप पंजीयक कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारियों की लापरवाही पाए जाने और राजस्व हानि चिन्हित होने के बावजूद भी वसूली के प्रयास नहीं करने और चालानों के दुरूपयोग और कूटरचना के लिये दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करने में देरी करने के कारण उप पंजीयक जयपुर (पंचम) साधना शर्मा, उप पंजीयक जयपुर (दशम) राजीव बड़गूजर और कार्यवाहक उप पंजीयक जयपुर (द्वितीय) सविता शर्मा को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया गया. तत्कालीन पंजीयन लिपिक बाबूलाल मीणा, सुशील कुमार शर्मा, बलबीर सिंह घायल, अनुपम सिंह, अशोक कुमार उप्रेती, दीपक हिंगोनिया तथा श्यामलाल कुमावत को APO किया गया है.  44 पंजीयकों, पंजीयक लिपिकों और अन्य संबंधित कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिस पर बाद जांच नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी.

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19 स्टाम्प वेंडर के लाइसेंस निरस्त, कराई FIR
उप महानिरीक्षक जयपुर प्रथम, द्वितीय और तृतीय की ओर से ऐसे 19 स्टाम्प वेण्डरों, जिनके उपयोग में लिए गए चालानों का दस्तावेजों के पंजीयन में कूटरचित कर दोबारा उपयोग किया गया है. इनके लाईसेन्स निरस्त कर FIR दर्ज करवाई गयी है. अन्य उप महानिरीक्षकों द्वारा भी ऐसे मामलों में लाईसेन्स निरस्तीकरण और FIR दर्ज करवाने की कार्यवाही की जा रही है.

बहरहाल करीब 3 महीने की लंबी जांच के बाद अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही मानते हुए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है, लेकिन पीड़ित आज भी सब रजिस्टार दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं. क्योंकि उनके खाते से तो पैसा चला गया लेकिन सरकारी खाते में पहुंचते-पहुंचते बीच में ही गायब हो गया। बड़ी मेहनत से कमाई कर अपने आशियाने के लिए रजिस्ट्री करवाने वाला पीड़ित बकाया का नोटिस मिलने के बाद ठगा गया.

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