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Breast Cancer Rajasthan: भारत में स्वास्थ्य परिदृश्य एक चिंताजनक मोड़ पर है. जिस कैंसर को कभी 'बुढ़ापे की बीमारी' माना जाता था, वह अब देश की युवा पीढ़ी, खासकर 30 से 40 वर्ष की महिलाओं को अपना शिकार बना रहा है. सीनियर कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दिवेश गोयल के अनुसार, ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर के मामलों में आया यह बदलाव एक 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' की ओर इशारा कर रहा है.
चौंकाने वाले आंकड़े
भारत में वर्तमान में लगभग 2.5 मिलियन लोग कैंसर के साथ जी रहे हैं. आंकड़ों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है-
ब्रेस्ट कैंसर,कम उम्र की महिलाएं भी जोखिम में
ब्रेस्ट कैंसर भारत में महिलाओं में सबसे ज्यादा डायग्नोस होने वाला कैंसर है. GLOBOCAN 2020 के अनुसार, साल भर में 1.78 लाख नए मामले सामने आए. विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि अब बड़ी संख्या में मरीज 40 साल से कम उम्र के हैं. युवा महिलाओं में होने वाला ब्रेस्ट कैंसर अक्सर अधिक आक्रामक होता है और इसके सफल इलाज की संभावना (Survival Rate) कम उम्र के कारण जटिल हो जाती है.
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ओवेरियन कैंसर
ओवेरियन कैंसर, जो भारत में तीसरा सबसे आम स्त्री रोग संबंधी कैंसर है, अब 20 और 30 साल की युवतियों में भी देखा जा रहा है. हर साल लगभग 47,000 नए मामले सामने आते हैं. इसके लक्षण अक्सर सामान्य पेट दर्द या गैस जैसे लगते हैं, जिससे इसका पता अक्सर 'एडवांस स्टेज' में चलता है.
क्यों बढ़ रहा है खतरा?
डॉ. दिवेश गोयल के अनुसार, इस बदलाव के पीछे कई कारण है-
कैंसर को हराया जा सकता है, यदि इसे समय पर पकड़ लिया जाए. इसके लिए हमें कुछ बुनियादी कदम उठाने होंगे-
कैंसर अब कोई दुर्लभ बीमारी नहीं है. यह हमारे घर की युवा महिलाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहा है. शिक्षा, स्कूलों-कॉलेजों में जागरूकता और मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों के माध्यम से ही हम इस खतरनाक ट्रेंड को पलट सकते हैं.
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