युवा संसद में 41 जिलों के 165 स्टूडेट्स के सुलगते सवाल, जवाब किसके पास ?

जयपुर में हुई युवा संसद में छात्रों ने खुलकर बताया किशोर उम्र के बच्चे दबाव, डिप्रेशन और असमंजस में फंसे हैं. भविष्य तय करने की उम्र में वे सिर्फ़ सर्वाइव करने की कोशिश कर रहे हैं.

युवा संसद में 41 जिलों के 165 स्टूडेट्स के सुलगते सवाल, जवाब किसके पास ?
Image Credit: Jaipur News

Jaipur News : जयपुर में युवा संसद छात्रों ने सिस्टम से सवाल पूछे. 41 जिलों से 164, छात्र-छात्राएं विधानसभा के भीतर अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए. और मुद्दा बना छात्र-छात्राएं का मानसिक दबाव और शिक्षा व्यवस्था.

विधानसभा में बैठे एक छात्र ने कहा - हमारा एजुकेशन सिस्टम हमें आगे नहीं बढ़ा रहा, बल्कि धीरे-धीरे हमें तोड़ रहा है. राजस्थान के कोचिंग सेंटर्स अब सफलता की फैक्ट्री नहीं, बल्कि मानसिक दबाव की प्रयोगशाला बनते जा रहे हैं. जब बच्चों पर तनाव इतना है, तो स्कूल और सिस्टम मेंटल हेल्थ और करियर काउंसलिंग को आज भी गंभीरता से क्यों नहीं लेता ?

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छात्रा फाल्गुनी बोलीं- हमारा एजुकेशन सिस्टम स्टूडेंट का मर्डर कर रहा
फाल्गुनी यादव ने कहा- हम चार घंटे पढ़ाने के लिए देते है लेकिन मेंटल हेल्थ पर क्यों ध्यान नहीं देते... अमेजन, नेटफ्लिक्स जैसे ट्रायल पैक देते है... उसी तरह का ट्रायल करियर चुनने से पहले होना चाहिए. हमारे किशोर महाभारत के अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में फंसे हैं. वे तनाव, डिप्रेशन से घिरे हैं, जिसके कारण भविष्य का निर्णय नहीं कर पा रहे हैं. मेंटल हेल्थ के लिए उन्हें करियर काउंसलिंग की जरूरत है जो सही राह दिखाए. हमारा एजुकेशन सिस्टम स्टूडेंट का मर्डर कर रहा है. सुसाइड गिने तो वह संख्या कोचिंग सेंटर की फीस से मैच करेंगी. बच्चों के भीतर कंपटीशन की आग जला दी गई है. सवाल यह नहीं है कि आग किसने जलाई, सवाल यह है कि सिस्टम के हाथ तीली किसने थमाई ?

छात्रा ने कहा- हम बच्चों की मौत सह लेते हैं, पर सिस्टम का कड़वा सच नहीं. हम चार घंटे पढ़ाने के लिए देते हैं, लेकिन मेंटल हेल्थ पर क्यों नहीं ध्यान देते. अमेजन नेटफ्लिक्स जिस तरह ट्रायल पैक देते हैं, उसी तरह का ट्रायल करियर चुनने से पहले होना चाहिए

छात्र तपिश वैष्णव ने कहा- राजस्थान के कोचिंग सेंटर आत्महत्या फैक्ट्री के नाम से बदनाम होते ही जा रहे हैं. आज के कोचिंग संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर नागरिक के मौलिक अधिकार की जगह विशेष अधिकार बना दिया है. छात्र और अभिभावकों पर गिद्ध दृष्टि जमाए हुए हैं. हर साल लाखों छात्र इन कोचिंग संस्थानों की आग में झुलस जाते हैं और उनके अभिभावक बड़े से बड़े कोचिंग के आगे दबकर अपनी ख्वाहिशों का गला घोट देते हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत देश में कुल आत्महत्या का लगभग 12 प्रतिशत 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों से जुड़ा है. एक दिन करियर मेले का आयोजन कर सत्ता पक्ष वाहवाही लूट रही है. माता-पिता की उम्मीदों, पढ़ाई के दबाव और कोचिंग संस्थानों के दबाव में आकर दम तोड़ रही हैं.

छात्र गौरव यादव बोले-स्टूडेंट सुसाइड के आंकड़े सभ्य समाज पर कालिख
युवा संसद में छात्र गौरव यादव ने कहा- आज स्टूडेंट आत्महत्या के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं. यह आंकड़ों का विषय नहीं है, हर आत्महत्या आंकड़े के पीछे एक बुझता हुआ घर है, एक टूटा हुआ परिवार है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट हमें बताती है कि राजस्थान में 2020 में 5000 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की, यही आंकड़ा वर्तमान में 13 हजार को पार कर गया है. छात्रों, युवाओं की ये आत्महत्याएं पूरे सभ्य समाज के मुंह पर कालिख के समान है.

अपनी रुचि का करियर चुने दबाव में ना आएं विद्यार्थी- देवनानी
स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कहा कि मजबूत बनने के लिए मजबूत मन होना जरूरी है. बच्चे अपनी रुचि का करियर चुनें. कई बार बिना रुचि के करियर चुन लेते हैं, कोचिंग में चले जाते हैं, वहां दबाव में आ जाते हैं. दबाव में आने की आवश्यकता नहीं है. डॉक्टर और इंजीनियर ही सबसे बड़े खुदा नहीं होते हैं, सब बराबर हैं. आप अपनी रुचि के हिसाब से और भी बहुत से क्षेत्रों में जा सकते हैं. देवनानी ने कहा- करियर के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के बारे में सोचें. अपनी रुचि और योग्यता देखकर करियर चुनें. इसके लिए करियर काउंसलिंग बहुत जरूरी है. रुचि और योग्यता के आधार पर करियर का चयन करेंगे तो देश के युवाओं के लिए और देश के लिए फायदेमंद होगा.

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