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Jaipur News: ज़ी मीडिया की खबर के बाद PHED में हड़कंप मच गया. अलवर एनसीआर घोटाले में ढाई महीने से अटकी हुई फाइलें छुट्टी के दिन दौड़ी. शनिवार को जलदाय दफ्तर खुला और 30 सितंबर को एक्सईएन नरेंद्र मीणा को चार्जशीट देने के आदेश हुए लेकिन मुख्य आरोपी एक्सईएन राजेश मीणा का कहीं नाम तक नहीं. अब अलवर घोटाले की चार्जशीट में पूरी तरह से विवाद गरमा गया है.
अलवर एनसीआर घोटाले की चार्जशीट पूरी तरह से विवादों की भेंट चढ़ गई है. 78 दिन तक अटकी हुई घोटाले की चार्जशीट थमाने के लिए छुट्टी के दिन अचानक दफ्तर खुला और एक्सईएन नरेंद्र गुप्ता के खिलाफ चार्जशीट की फाइले सचिवालय से जलदाय मुख्यालय तक दौड़ी लेकिन हैरानी की बात ये है कि अलवर घोटाले के दोषी राजेश मीणा का कही जिक्र तक नहीं. जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद भी एक्सईएन राजेश मीणा के खिलाफ जलदाय विभाग के जिम्मेदारों ने कोई कार्रवाई नहीं की.
वहीं एक्सईएन नरेंद्र गुप्ता की अकेले चार्जशीट की फाइल चल रही. संयुक्त सचिव प्रवीण लेखरा ने छुट्टी के दिन अतिरिक्त सचिव संदीप शर्मा को आदेश दिए कि प्रकरण में एनवक्त पर पूरे आरोप पत्र नहीं भिजवाए और पत्राचार कर समय व्यतीत किया, जो उचित नहीं.एक्सईएन नरेंद्र गुप्ता 30 सितंबर को रिटायर हो रहे है.16 सीसी के तहत आरोप पत्र तैयार कर भिजवाएं जाएं. आरोप पत्र में देरी होने पर संपूर्ण जिम्मेदारी आपकी होगी. जाइंट सैकेट्री के पत्र पर अतिरिक्त सचिव संदीप शर्मा ने क्वालिटी कंट्रोल चीफ इंजीनियर आरके मीणा को चिट्टी लिखकर कहा कि अधूरे दस्तावेजों के चलते 16 से 26 सितंबर तक अनाश्वयक देरी की.अब समय की कमी के चलते रिपोर्ट सीधे प्रशासनिक विभाग को भेजें.
78 दिन अटकी रही फाइल
जांच कमेटी ने घोटाले की जांच रिपोर्ट 2 जून को चीफ इंजीनियर क्वालिटी कंट्रोल दफ्तर भेजी,जिसके 78 दिन बाद 18 अगस्त को फाइल एडिशनल चीफ इंजीनियर अलवर पहुंची.जेजेएम एमडी रविंद्र गोस्वामी मुख्य सचिव के निर्देश के बाद संयुक्त सचिव प्रवीण लेखरा और चीफ इंजीनियर आरके मीणा के खिलाफ फाइले दबाने के आरोपों की जांच कर रहे लेकिन पूरे मामले में नया विवाद मोड आ गया है.शिकायतकर्ता रामकेश मीणा ने दावा किया है कि मेरे फर्जी हस्ताक्षर से किसी और ने दूसरी शिकायत की.रामकेश ने इस संबंध में जांच करवाने की मांग की है.इस शिकायत में एक्सईएन राजेश मीणा को चार्जशीट देने का जिक्र किया है.
चीफ इंजीनियर ने चुप्पी साधी
इस पूरे मामले पर क्वालिटी कंट्रोल चीफ इंजीनियर आरके मीणा से फिर से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई रिप्लाई नहीं किया. वहीं जेजेएम एमडी रविंद्र गोस्वामी की जल्द ही जांच रिपोर्ट से खुलासा होगा कि आखिरकार फाइल कहां दबी, कितने दिन रुकी और घोटाले के दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई लेकिन पूरी चार्जशीट अब विवाद में उलझकर रह गई.
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