CM Gehlot की राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात, सियासी हलकों में चर्चाएं शुरू
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CM Gehlot की राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात, सियासी हलकों में चर्चाएं शुरू

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की आज अचानक राज्यपाल कलराज मिश्र से हुई मुलाक़ात ने राजस्थान के सियासी पारे को एक बार फिर से बढ़ा दिया है.

CM Gehlot की राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात, सियासी हलकों में चर्चाएं शुरू

Jaipur: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की आज राज्यपाल कलराज मिश्र (Governor Kalraj Mishra) से हुई मुलाक़ात के बाद अब सियासी हलकों में इस मुलाक़ात के मायने निकाले जा रहे हैं. राज्यभवन से जारी प्रेस नोट में इसे शिष्टाचार मुलाक़ात बताया गया हैं, लेकिन सियासत के जानकर बता रहे हैं इस मुलाक़ात के बाद अब राजस्थान (Rajasthan News) में कांग्रेस के विधायकों-नेताओं और कार्यकर्ताओं का इन्तज़ार ख़त्म हो सकता हैं. 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) की आज अचानक राज्यपाल कलराज मिश्र से हुई मुलाक़ात ने राजस्थान के सियासी पारे को एक बार फिर से बढ़ा दिया है. लंबे समय से राजस्थान में मंत्रिमण्डल विस्तार फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों का इंतज़ार कर रहे कांग्रेस (Congress) के विधायकों-नेताओं और कार्यकर्ताओं की धड़कनें एक बार फिर से तेज हो गई है. 

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अशोक गहलोत राज्यपाल कलराज मिश्र से राजभवन में मिले
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज क़रीब एक घंटे तक राज्यपाल कलराज मिश्र से राजभवन (Rajbhawan) में मिले. बैठक के बाद राज्यपाल (Governor) की ओर से जारी बयान में इसे शिष्टाचार मुलाक़ात बताया गया लेकिन सियासी जानकार बताते हैं कि सियासत में कोई भी मुलाक़ात शिष्टाचार नहीं होती और ख़ासतौर पर ऐसे समय में जब मुख्यमंत्री हाल ही में दिल्ली में राजस्थान के मसलों के लिए समाधान के लिए बनाई गई कमेटी के साथ बैठक कर लौटे हों. 

ऐसे में अब सियासी हलकों में सवाल पूछे जा रहे हैं ये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजभवन क्यों गए थे ? और राज्यपाल कलराज मिश्र से एक घंटे तक उनकी क्या बातचीत हुई? क्या राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल का खाका CM ने तैयार कर लिया है या फिर दीपावली (Diwali) से पहले पार्टी नेताओं कार्यकर्ताओं को सियासी नियुक्तियों का तोहफ़ा मिलने जा रहा है.

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मत्रिमंडल फेरबदल से पहले या बाद में राजनीतिक नियुक्तियां भी की जाएंगी
दरअसल मत्रिमंडल फेरबदल से पहले या बाद में राजनीतिक नियुक्तियां (Political appointments) भी की जाएंगी. बोर्ड, आयोग और सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां होगी. गहलोत सरकार की तीसरी वर्षगांठ से पहले इन सब कामों को पूरा करने की तैयारी है. राजस्थान में मुख्यमंत्री (Chief Minister) को मिलाकर 30 मंत्री बन सकते हैं. अभी 21 पद भरे हैं, मंत्रिमंडल में 9 जगह खाली है. तीन से चार मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी देने से 12 से 13 जगह खाली हो जाएगी. इनमें पहले फेज में 10 नए चेहरों को मौका मिलने की गुंजाइश रहेगी. रणनीतिक तौर पर दो से तीन पद खाली रखे जा सकते हैं.

कामराज फार्मूले देखने को मिलेगा का असर
कहा जा रहा है कि मंत्रिमंडल फेरबदल में कामराज फार्मूले (Kamaraj Formula) का असर देखने को मिलेगा. कुछ और मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है. राजस्व मंत्री हरीश चौधरी (Harish Chowdhary) को पंजाब और स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा (Raghu Sharma) को हाल ही गुजरात प्रभारी की जिम्मेदारी मिल चुकी है.

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क्या है कामराज फार्मूला
शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) पिछले साल अगस्त से प्रदेशाध्यक्ष के पद पर हैं. वरिष्ठ मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाकर संगठन में पद देने के फार्मूला को कामराज फार्मूला के नाम से जाना जाता है. कामराज फार्मूला लागू करने से एक व्यक्ति एक पद का फार्मूला भी लागू हो जाएगा. जिन मंत्रियों को संगठन में पद दिया जाएगा या दिया जा चुका है उन्हें हटाया जाना तय माना जा रहा है. कहा जा सकता है कि राजस्थान में आने वाले दिनों में क़ामराज प्लान के तहत एक व्यक्ति एक पद का फ़ार्मुला नज़र आ सकता है

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