Rajasthan: पिंजरे में कैद वन्यजीवों को भी गोद ले सकेंगे आम लोग, उठाने होंगे ये खर्च

जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में दरियाई घोड़ा सबसे पेटू वन्यजीव है. दरियाई घोड़े के खाने का सालाना खर्च 10 लाख रुपये है. 

Rajasthan: पिंजरे में कैद वन्यजीवों को भी गोद ले सकेंगे आम लोग, उठाने होंगे ये खर्च
वन विभाग सरकार की स्वीकृति का इंतजार कर रहा है.

Jaipur: अब पिंजरे में कैद वन्यजीव को भी आम लोग गोद ले सकेंगे, जो लोग शेर, बाघ, बघेरा, दरियाई घोड़ा, मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों को गोद लेना चाहते हैं, वो अब ऐसे सभी वन्यजीवों को गोद ले सकेंगे, ऐसे सभी वन्यजीवों का गोद लेने वालों को सभी खर्च उठाने होंगे.

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वन्यजीवों को गोद लेने की योजना का प्रस्ताव वन विभाग ने राज्य सरकार (State Government) को भेजा है. वन विभाग सरकार की स्वीकृति का इंतजार कर रहा है. प्रस्ताव को सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद कोई भी व्यक्ति किसी भी वन्यजीव को गोद ले सकेगा. 

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भारत मे बेज़ुबान जीवों के लोग क्या-क्या नहीं करते, कोई दाना डालता है, कोई चारा डालता है, लोग धर्मार्थ के लिए पक्षियों के लिए दाने-पानी की व्यवस्था करते हैं. वहीं, कोरोना संक्रमण (Corona infection) के दौरान देखा गया कि लोगों ने गायों, बंदरों आदि पशुओं के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की, ताकि ये बेजुबान भूखे-प्यासे ना रहें. इसी तर्ज पर अब वन विभाग भी कार्य कर रहा है. अब वन विभाग भी वाइल्ड एनिमल्स को गोद देने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है.

बायोलॉजिकल पार्कों में वन्यजीव प्रेमी एनिमल्स को गोद लेते 
जानकारी के अनुसार, साउथ के अधिकतर बायोलॉजिकल पार्कों में वन्यजीव प्रेमी एनिमल्स को गोद लेते हैं. इसके तहत करीब एक साल तक वे वन्यजीवों के खाने-पी आदि खर्चे उठाते हैं. अब राजस्थान में भी भामाशाह, संस्था, कॉरपोरेट कंपनी, फैमिली, पर्सनली या वन्यजीव प्रेमी वन्य जीव को गोद ले सकेगा.

कितने समय के लिए गोद लिए जा सकेंगे जीव
वन्यजीव गोद लेने की योजना के तहत वन विभाग इस कार्य के लिए आगे आने वाले इच्छित लोगों को तीन माह, छ महीने, एक साल और 2 साल के लिए वन्यजीव गोद देगा. इसके तहत व्यक्ति को एनिमल्स के एन्क्लोजर, फीडिंग आदि खर्चे उठाने होंगे. साथ ही वे समय-समय पर बायोलॉजिकल पार्क या चिड़ियाघर आकर गोद लिए जाने वाले वन्यजीव की जानकारी ले सकेंगे. बायोलाजिकल पार्क में रखे गए टाइगर, लॉयन, पैंथर, मगरमच्छ सहित अन्य वन्यजीवों को गोद ले सकते हैं. वन विभाग इसके लिए सभी वन्यजीवों के नाम और उन पर होने वाले खर्चों की लिस्ट बना रहा है. 

दरियाई घोड़े के खाने का सालाना खर्च 10 लाख रुपये 
जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में दरियाई घोड़ा सबसे पेटू वन्यजीव है. दरियाई घोड़े के खाने का सालाना खर्च 10 लाख रुपये है. लायन और टाइगर का सालाना खाने का खर्च 5 लाख रुपये है. फुर्तीले पैंथर के भोजन का सालाना खर्च है 1.5 लाख रुपये और नटखट भालू की सालाना खुराक 1 लाख रुपये है. भेड़िये, सियार, लोमड़ी और जरख की खुराक 1 लाख रुपये सालाना है. काला हिरण, चिंकारा, सांभर, चीतल हिरण की खुराक 25 हज़ार रुपये  सालाना है. जयपुर ज़ू में 25 प्रजाति के 170 वन्यजीव मौजूद है. वन्यजीव को गोद लेने वाले व्यक्ति को वन्यजीव की खुराक का खर्च उठाना होगा.