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Rajasthan News: वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, धूप वाली दोपहरों में या मानवीय हस्तक्षेप से ये सांप बाहर निकल आते हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में खतरा बढ़ जाता है. हाल के वर्षों में जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और उदयपुर जैसे जिलों में सर्दियों में सांप काटने की घटनाएं बढ़ी हैं. यह रिपोर्ट राजस्थान के उन सांपों पर फोकस करती है जो इस मौसम में सक्रिय हो सकते हैं, साथ ही सावधानियां और कारणों पर चर्चा करती है.
जनवरी के अंत में सक्रिय रहने वाली सांप प्रजातियां
राजस्थान में लगभग 50 से ज्यादा सांप प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन जनवरी के ठंडे मौसम में मुख्य रूप से तीन जहरीली प्रजातियां खतरा पैदा करती हैं. ये सांप ठंड सहन करने की क्षमता रखते हैं और कभी-कभी रिहायशी इलाकों में घुस आते हैं.
रसेल वाइपर (Russell's Viper) - सबसे खतरनाक प्रजाति
यह सांप राजस्थान के सूखे इलाकों में सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है. जनवरी के अंत में, जब रातें ठंडी होती हैं, तब भी यह शिकार की तलाश में बाहर निकलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि रसेल वाइपर 'कोल्ड टॉलरेंट' होता है, यानी यह ठंड में भी सक्रिय रह सकता है. इसका आकार 1-1.5 मीटर तक होता है और रंग भूरा-काला. खतरा इसकी आक्रामकता से है - यह फुफकारते हुए कुकर की सीटी जैसी तेज आवाज निकालता है. जहर हीमोटॉक्सिक होता है, जो रक्त को जमा देता है और किडनी फेलियर का कारण बन सकता है. यह झाड़ियों, पत्थरों के ढेरों और कृषि भूमि में मिलता है. हाल ही में बीकानेर में एक किसान को इसी सांप ने काटा था, जिससे इलाज में देरी हुई.
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सॉ-स्केल्ड वाइपर (Saw-scaled Viper) - 'फुरसा' के नाम से जाना जाता है
यह छोटा लेकिन घातक सांप (लंबाई 30-60 सेमी) रेतीले और पथरीले क्षेत्रों में पाया जाता है. सर्दियों में यह धूप सेंकने (बास्किंग) के लिए चट्टानों या सूखी घास पर आता है. इसका व्यवहार छिपाव भरा होता है, लेकिन खतरा होने पर यह अपनी चमड़ी रगड़कर 'आरी काटने' जैसी आवाज निकालता है. जहर भी खून पर असर करता है, जिससे सूजन और रक्तस्राव होता है. जोधपुर और जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी जिलों में यह ज्यादा दिखता है. जनवरी में निर्माण कार्यों के दौरान यह बाहर आ जाता है.
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कॉमन कोबरा (Indian Cobra) - 'नाग'
यह प्रसिद्ध सांप आमतौर पर जनवरी में बिलों में छिपा रहता है, लेकिन अगर धूप तेज हो या उसके आवास (पुरानी लकड़ियां, कबाड़ या चूहों के बिल) को छेड़ा जाए, तो वह बाहर आ सकता है. इसका फन फैलाने वाला व्यवहार प्रसिद्ध है. जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो नर्व सिस्टम और सांस पर असर करता है. राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में यह घरों के आसपास मिलता है.
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सांपों के बाहर आने के मुख्य कारण
सांप ठंडे खून वाले (एक्टोथर्मिक) जीव हैं, इसलिए जनवरी में उनकी सक्रियता मुख्य रूप से पर्यावरणीय कारकों पर निर्भर करती है.
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धूप सेंकना (थर्मोरेगुलेशन): सर्दियों में सांप अपने शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए दोपहर की धूप में बाहर आते हैं. राजस्थान में जनवरी के अंत में दिन में तापमान 20-25 डिग्री तक पहुंच जाता है, जो उन्हें सक्रिय बनाता है.
भोजन की तलाश: चूहे, मेंढक और छोटे जीव सर्दियों में घरों या खेतों के आसपास ज्यादा रहते हैं. सांप इन्हें शिकार बनाने के लिए रिहायशी क्षेत्रों में घुस आते हैं. विशेष रूप से रसेल वाइपर चूहों का शौकीन होता है.
मानवीय हस्तक्षेप: निर्माण कार्य, खुदाई या सफाई से सांपों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाते हैं. राजस्थान में बढ़ते शहरीकरण से यह समस्या बढ़ी है.
जलवायु परिवर्तन का असर: हाल के वर्षों में अनियमित मौसम से सांपों की शीतनिद्रा प्रभावित हो रही है, जिससे वे अप्रत्याशित समय पर सक्रिय हो जाते हैं.
सावधानियां और बचाव के उपाय
सर्दियों में सांप काटने से बचने के लिए राजस्थान के निवासियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए. वन विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञ निम्नलिखित सलाह देते हैं:
घर के आसपास सफाई: कबाड़, पुरानी लकड़ियां या पत्थरों के ढेर जमा न होने दें. ये सांपों के छिपने की जगह बन जाते हैं.
रात में सावधानी: अंधेरे में नंगे पैर न चलें. हमेशा जूते पहनें और टॉर्च का इस्तेमाल करें. ठंड में सांप सुस्त लग सकते हैं, लेकिन हमला तेज होता है.
सांप दिखने पर: उसे मारने या पकड़ने की कोशिश न करें. दूर रहें और स्थानीय वन विभाग या स्नेक कैचर को सूचित करें. राजस्थान में कई जिलों में हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध हैं.
चिकित्सा तैयारी: यदि काट ले तो घाव को साफ पानी से धोएं, पट्टी बांधें और तुरंत अस्पताल पहुंचें. एंटी-वेनम राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है.
जागरूकता अभियान: ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों और पंचायतों में सांपों के बारे में शिक्षा दी जाए. ध्यान रखें कि राजस्थान में 80% सांप गैर-जहरीले हैं, जैसे सैंड बोआ या चेकर्ड कीलबैक, लेकिन पहचान के बिना जोखिम न लें.
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