Dausa News: दौसा के जिला अस्पताल में दो मशीनें होने के बावजूद सोनोग्राफी की सुविधा ठप है. डॉक्टर की कमी के चलते मरीजों को बाहर ₹1000 तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे गरीब मरीजों को भारी परेशानी हो रही है.
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Dausa News: दौसा जिला अस्पताल में दो सोनोग्राफी मशीनें होने के बावजूद भी मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य निशुल्क जांच योजना के तहत मिलने वाली यह सुविधा डॉक्टर की कमी के चलते चरमराई हुई है, जिससे मजबूर होकर मरीजों को बाहर निजी केंद्रों पर मोटी कीमत चुकानी पड़ रही है.
डॉक्टर की कमी बनी संकट
अस्पताल में सोनोग्राफी की इस अव्यवस्था का मुख्य कारण डॉक्टरों की कमी है. यहां एक स्थाई डॉक्टर पदस्थापित हैं जो वर्तमान में अवकाश पर हैं. वहीं, डेपुटेशन पर आए दूसरे डॉक्टर सप्ताह में केवल तीन दिन, मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार को ही सोनोग्राफी करने आते हैं. ऐसे में बाकी दिनों में सोनोग्राफी कक्ष पर ताला लगा रहता है, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को बिना जांच कराए ही लौटना पड़ता है.
मरीजों को बाहर चुकानी पड़ रही कीमत
अस्पताल में सोनोग्राफी के लिए भटक रहे मरीजों का कहना है कि सरकार ने भले ही निशुल्क जांच की सुविधा दे रखी हो, लेकिन यहां यह सुविधा उपलब्ध नहीं है. मजबूर होकर उन्हें बाहर के केंद्रों पर एक हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं. यह राशि गरीब और मजदूर वर्ग के लिए बहुत बड़ी है. मरीजों ने इस लापरवाही पर अपनी नाराजगी जताते हुए प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है.
पीएमओ ने लिखा पत्र
इस समस्या के संबंध में अस्पताल के पीएमओ डॉ. आर. मीणा ने स्वीकार किया है कि डेपुटेशन पर आने वाले डॉक्टर के कारण यह दिक्कत आ रही है. उन्होंने कहा कि डेपुटेशन पर आए डॉक्टर पूरे सप्ताह आएं, इसके लिए उन्होंने डायरेक्टर को एक पत्र भी लिखा है. हालांकि, उनका यह जवाब मरीजों की तत्काल समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं देता है. सवाल यह है कि आखिर कब दौसा जिला अस्पताल की सोनोग्राफी व्यवस्था दुरुस्त होगी और मरीजों को राहत मिलेगी.
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