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Rajasthan Quiz: महाराणा प्रताप के चेतक का नाम भारतीय इतिहास में अमर है. हल्दीघाटी के युद्ध में चेतक ने अपनी जान जोखिम में डालकर महाराणा प्रताप को सुरक्षित निकाला था. चेतक की बहादुरी और वफादारी की कहानियां आज भी गाई जाती हैं.
महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक मुख्य रूप से काठियावाड़ी नस्ल का बताया जाता है, जो अपनी वफादारी, बुद्धिमत्ता और विशेष ग्रुलो (नीले-धूसर) रंग के लिए प्रसिद्ध था. ये गुजरात के भीमोरा गांव से आया था.
चेतक शक्ति, फुर्ती और वफादारी के लिए प्रसिद्ध है.
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कहानियों के अनुसार, चेतक को भीमोरा गुजरात के चारण व्यापारी मेवाड़ लेकर आए थे.कहा जाता है कि भीमोरा के चारण व्यापारी ने महाराणा प्रताप को तीन घोड़े-चेतक, त्राटक और अटक दिए थे, जिनमें केवल चेतक ही उनकी परीक्षा में पास हुआ था. चेतक का जन्म गुजरात में चोटीला के पास भीमोरा में हुआ था. कहते है कि महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का रंग नीला था .
इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि चेतक की आंखें नीले रंग की थी इसलिए उसे 'नीला घोड़ा' कहा जाता है.
कहते हैं कि महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लंबाई 7 फीट 5 इंच थी, जिसके बाद भी भाले, ढाल और दो तलवारों का कुल वजन 208 किलो बताया जाता है. इतना वजन उठाकर रणभूमि में दौड़ने वाला चेतक भारत का एकमात्र शक्तिशाली घोड़ा था.
चेतक इतना आक्रामक और अभिमानी था कि उसे केवल महाराणा प्रताप ही नियंत्रित कर सकते थे.चेतक महाराणा प्रताप का दोस्त और बेमिसाल सहयोगी था. चेतक इतना शक्तिशाली था कि हल्दीघाटी के युद्ध में उसने मुगल सेनापति मानसिंह के हाथी के सिर पर पैर रख दिए थे.
महाराणा प्रताप अपने प्रिय घोड़े चेतक की मौत पर पहली बार रोए थे और अपने हाथों से चेतक का दाह संस्कार किया था. चेतक घोड़े के नाम पर ही भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर का नाम 'एच एल चेतक' रखा गया है.
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