बिना गूगल किए बताएं राजस्थान के राज्य पुष्प का नाम, नहीं बता पाए बड़े-बड़े तुर्रम खान!

Do You Know: राजस्थान एक ऐसा राज्य है, जहां घूमने का सपना हर कोई देखता है. राजस्थान की संस्कृति, जलवायु, पर्यटन स्थल, किले-महल-हवेलियां, सबको खूब आकर्षित करते हैं, वहीं, क्या आप यहां के राज्य पुष्प का नाम जानते हैं. यह ऐसा सवाल है, जिसका जवाब तमाम राजस्थानी भी नहीं बता पाएंगे. 
 

बिना गूगल किए बताएं राजस्थान के राज्य पुष्प का नाम, नहीं बता पाए बड़े-बड़े तुर्रम खान!
Image Credit: Do You Know

Do You Know:राजस्थान का राज्य पुष्प रोहिड़ा (Rohida) है, जिसे वैज्ञानिक नाम Tecomella undulata से जाना जाता है. स्थानीय भाषा में इसे रोहिडा, रोहितक, मरू-गुलाब और डेजर्ट ट्यूलिप जैसे नामों से भी पुकारा जाता है. यह फूल थार मरुस्थल की कठोर जलवायु में खिलने वाला एक ऐसा पौधा है, जो तपती रेत और कम पानी की परिस्थितियों में भी अपनी जीवटता के साथ खड़ा रहता है. यही वजह है कि रोहिड़ा को मरुधरा की विशेष पहचान माना गया है.

रोहिड़ा का खिलना किसी चमत्कार से कम नहीं
रोहिड़ा का फूल देखने में बेहद आकर्षक होता है. इसके फूलों का रंग सामान्यतः पीले, नारंगी और लाल शेड्स में पाया जाता है, जो इसे रेगिस्तान में खिले अन्य पौधों से बिल्कुल अलग बनाते हैं. फूलों का आकार घंटी जैसे होने के कारण यह दूर से ही खूबसूरत नजर आता है. राजस्थान में जहां गर्मियों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है, वहां रोहिड़ा का खिलना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता. तपते मरुस्थल के बीच इसकी चमकीली रंगत पर्यटकों और पर्यावरण प्रेमियों का ध्यान तुरंत खींच लेती है.

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मरुस्थल का ‘जीवनदायी पौधा’
यह पौधा आकार में एक छोटे पेड़ की तरह होता है, जिसकी ऊंचाई सामान्यतः 3 से 5 मीटर तक होती है. रोहिड़ा की लकड़ी बेहद मजबूत और टिकाऊ मानी जाती है, इसलिए इसका उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में फर्नीचर, कृषि उपकरणों और घरों की लकड़ी की संरचनाओं में किया जाता है. इसकी सबसे खास बात यह है कि यह बहुत कम पानी में भी आसानी से पनप जाता है, जिससे इसे मरुस्थल का ‘जीवनदायी पौधा’ भी कहा जाता है.


राजस्थानी लोकगीतों में भी रोहिड़ा का जिक्र
राजस्थान की संस्कृति और लोक परंपराओं में रोहिड़ा का खास महत्व है. इसे शुभता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. लोक उत्सवों, विवाह समारोहों और धार्मिक अनुष्ठानों में इसकी पत्तियां और फूल उपयोग किए जाते हैं. राजस्थानी लोकगीतों में भी रोहिड़ा का जिक्र मिलता है, जहां इसे मरुस्थल की सुंदरता और जीवन का प्रतीक बताया गया है.

थार का 'इको-योद्धा'

पर्यावरण की दृष्टि से भी रोहिड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण पौधा है. यह रेतीली मिट्टी को बांधकर मिट्टी कटाव रोकने में अहम भूमिका निभाता है. इसके अलावा यह स्थानीय जंगली जीवों को भोजन और आश्रय प्रदान करता है. मरुस्थल में जैव विविधता को बनाए रखने में इसके योगदान को देखते हुए पर्यावरणविद् इसे थार का 'इको-योद्धा' भी कहते हैं.

राजस्थान का गर्व है यह फूल
राजस्थान सरकार ने रोहिड़ा को राज्य पुष्प के रूप में इसलिए चुना क्योंकि यह न केवल सुंदरता का प्रतीक है बल्कि मरुस्थलीय जीवन की सादगी, मजबूती और संघर्षशीलता का भी प्रतिनिधित्व करता है. कठोर जलवायु में भी जीवित रहने की क्षमता और प्रदेश की संस्कृति से गहरे जुड़ाव ने रोहिड़ा को राजस्थान का गर्व बना दिया है.

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Sandhya Yadav

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संध्या यादव एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 8 वर्षों का एक्सपीरिएंस है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. संध्या की मुख्य Expertise राजस्थान की क्षेत्रीय राजनीति, क्राइम, प्रशासनिक फैसलों और हाइपरलोकल खबरों की सटीक एवं इन-डेप्थ कवरेज में है. लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है. आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे एक्स (https://x.com/Journosandhya) और लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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