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Basant Panchami 2026: गुलाबी नगरी के आराध्य ठिकाना श्री गोविंद देवजी मंदिर में आज बसंत पंचमी का पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. समूचा मंदिर परिसर बसंती आभा में रंगा नजर आया और ठाकुरजी के दरबार में सुबह से ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. इस पावन अवसर को मंदिर में 'पाटोत्सव' के रूप में बेहद धूमधाम से मनाया गया.
मंगला झांकी से पाटोत्सव का शुभारंभ
उत्सव की शुरुआत अलसुबह मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में हुई. सुबह 4 बजे मंगला झांकी के दौरान वेद मंत्रोच्चार के बीच ठाकुर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक किया गया. अभिषेक के बाद ठाकुरजी को विशेष पीली (पीत) पोशाक और स्वर्ण-रजत अलंकारों से सुसज्जित किया गया. उत्सव के अवसर पर ठाकुरजी को मावा पेड़े और बेसन के लड्डू का विशेष भोग लगाया गया. श्रृंगार झांकी के दौरान मंदिर में मां सरस्वती का विधिवत पूजन भी संपन्न हुआ.
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पांच तरह की गुलाल और इत्र की महक
बसंत पंचमी के उत्सव का सबसे मुख्य आकर्षण ठाकुर श्रीजी को अर्पित की गई पांच प्रकार की गुलाल रही. गुलाल की बौछार और विशेष इत्र के छिड़काव से पूरा मंदिर परिसर सुगंध और भक्ति के अनूठे रंग में सराबोर हो गया. भक्तों ने ठाकुरजी के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना.
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500 साल पुरानी परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करीब 500 वर्ष पूर्व माघ शुक्ल पंचमी के दिन ही श्री रूप गोस्वामी पाद ने वृंदावन में ठाकुर श्री गोविंद देवजी के विग्रह को पुनः प्रकट किया था. इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटना की स्मृति में हर वर्ष इस दिन को पाटोत्सव के रूप में मनाया जाता है.
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भक्ति और आस्था का संगम
मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे अधिकांश श्रद्धालु बसंती (पीले) वस्त्रों में नजर आए. राजभोग आरती के समय मंदिर का वातावरण भजनों, संगीत और 'गोविंद' के जयकारों से ओतप्रोत रहा. श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के चरणों में गुलाल अर्पित कर बसंत ऋतु के आगमन का स्वागत किया.
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