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Rajasthan News: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में झंडावाली-सतीपुरा ब्लॉक के ऑक्शन को लेकर केन्द्र सरकार की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, जिस तरह से केन्द्र सरकार के एमएसटीसी पोर्टल पर ऑक्शन किया गया, उसमें तकनीकी गड़बड़ी की बात सामने आ रही है. यह ऑक्शन 14 और 15 मई 205 को एमएसटीसी पोर्टल पर किया गया था. पहले दिन हनुमानगढ़ के जार्कियान-सतीपुरा स्थित पोटाश-हैलाइट के ब्लॉक का ऑक्शन किया गया. इस ब्लॉक की ऑक्शन के दौरान दो कंपनियां शामिल हो रही थी. एक कम्पनी भारत सरकार के स्वामित्व की ऑयल इंडिया लिमिटेड, जबकि दूसरी निजी स्वामित्व की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड शामिल हुई.
खान विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो पहले दिन के ऑक्शन में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखी गई. जार्कियान-सतीपुरा के ब्लॉक के ऑक्शन के दौरान दोनों कंपनियों ने ऑफर प्राइस 15 प्रतिशत तक एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी थी. हालांकि 15 प्रतिशत के बाद हिन्दुस्तान जिंक ने आगे बोली नहीं लगाई. इसके बाद ऑयल इंडिया लिमिटेड ने बोली 15.15 प्रतिशत तक बढ़ाई और उसे प्रिफर्ड बिडर घोषित किया गया. हालांकि दूसरे दिन का जब ऑक्शन हुआ तो उसमें तकनीकी गड़बड़ी होने की बात सामने आ रही है.
एक दिन पहले सिग्नेचर वैरीफाइड, दूसरे दिन सिग्नेचर फेल!
दूसरे दिन झंडावाली-सतीपुरा में पोटाश-हैलाइट ब्लॉक के लिए ऑक्शन हुआ. इस ब्लॉक के ऑक्शन में दोनों कंपनियां, हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड और ऑयल इंडिया लिमिटेड शामिल हो रही थी. बोली शुरू होते समय ऐनवक्त पर तकनीकी गड़बड़ी सामने आई. ऑयल इंडिया लिमिटेड के प्रतिनिधि के सिग्नेचर वेरीफाई नहीं हुए, जबकि एक दिन पहले इन्हीं के सिग्नेचर से ऑयल इंडिया लिमिटेड ने बिड जीती थी. इस कारण ऑयल इंडिया के प्रतिनिधि ऑक्शन के दौरान बोली नहीं लगा सके, जबकि हिन्दुस्तान जिंक ने 3.05 प्रतिशत का शुरुआती ऑफर दिया. बोली नहीं लगा पाने पर ऑयल इंडिया की तकनीकी टीम ने विरोध किया, तुरंत ही MSTC को सूचना दी, केंद्रीय खान मंत्रालय को सूचना दी, लेकिन टाइम समाप्त होने के चलते ऑयल इंडिया बोली नहीं लगा सकी और मात्र 3.05 प्रतिशत के ऑफर पर HZL को प्रिफर्ड बिडर घोषित किया. मिनिस्ट्री ऑफ माइंस में ऑयल इंडिया ने शिकायती रिप्रजेंटेशन भी दिया.
खान विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो इतने कम ऑफर पर हिंदुस्तान जिंक को प्रिफर्ड बिडर घोषित करना एमएसटीसी को सवालों के घेरे में खड़ा करता है. सूत्रों के मुताबिक ऐसी स्थिति में केवल एक बिडर होने पर ऑक्शन को निरस्त कर दिया जाता है, लेकिन चूंकि इस ब्लॉक के लिए पूर्व में एक बार ऑक्शन हो चुका था और तब केवल एक ही बिडर ने पार्टिसिपेट किया था तो ऑक्शन को रद्द कर दिया गया था.लेकिन दूसरी बार में केवल एक बिडर होने पर भी ऑक्शन आवंटित किया जा सकता है.
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि एमएसटीसी में शिकायत दिए जाने के बावजूद भी ऑयल इंडिया लिमिटेड की शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है. तकनीकी गड़बड़ी के चलते ऑयल इंडिया लिमिटेड इसमें बोली नहीं लगा सकी थी. हिन्दुस्तान जिंक को इस ब्लॉक के आवंटन के चलते राजस्थान सरकार को बड़ी मात्रा में राजस्व का नुकसान झेलना पड़ेगा. पोटाश की वर्तमान अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत के हिसाब से नुकसान करीब 527 करोड़ रुपए का होगा. जी मीडिया संवाददाता ने खान मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव संजय लोहिया और ऑक्शन की डेजिग्नेटेड ऑफिसर फरीदा एम नाइक को मेल भेजकर इन गड़बड़ियों को लेकर जवाब मांगा, लेकिन दोनों ही अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया. वहीं राजस्थान सरकार के खान विभाग के उच्चाधिकारियों ने भी मामले में चुप्पी साधे रखी है. देखना होगा कि तकनीकी गड़बड़ी का खुलासा होने और केंद्रीय खान मंत्रालय में शिकायत दर्ज होने के बाद क्या इस ऑक्शन को लेकर फिर से विचार किया जाएगा?
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