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Jaipur illegal colonies: राजस्थान की राजधानी जयपुर में अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण जिला प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली मानी जा रही है. जहां एक ओर जयपुर विकास प्राधिकरण की प्रवर्तन शाखा लगातार अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है.
वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन का रवैया इस पूरे मामले में ढुलमुल नजर आ रहा है. इसी का फायदा उठाकर अवैध कॉलोनाइजर बेधड़क अपना कारोबार चला रहे हैं. जेडीए द्वारा समय-समय पर अवैध रूप से विकसित की जा रही कॉलोनियों पर नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाती है.
लेकिन नियमों के अनुसार, बार-बार अवैध कॉलोनी बसाने वाले खातेदारों की भूमि को जप्त करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है. यही वह कड़ी है, जहां प्रशासनिक उदासीनता पूरे सिस्टम पर भारी पड़ रही है. जेडीए के आईजी राहुल कोटोकी ने ऐसे 450 से अधिक खातेदारों की सूची तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी है, जो बार-बार अवैध कॉलोनियां बसाने में लिप्त पाए गए हैं.
नियमानुसार इन खातेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी भूमि जप्त की जानी चाहिए, ताकि अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके, लेकिन अब तक इस सूची पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
जिला प्रशासन की ढीलाई से राजधानी में अवैध कॉलोनियां बढ़ रही हैं. जेडीए प्रवर्तन शाखा लगातार अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, लेकिन अवैध कॉलोनी पर जिला प्रशासन का ढुलमुल रवैया नजर आ रहा है. जिसके चलते अवैध कॉलोनाइजरों का व्यापार लगातार फल फूल रहा है.
नियम के अनुसार बार-बार अवैध कॉलोनी बसाने वालों की भूमि जप्त होती है. ऐसे खातेदारों की भूमि को जिला प्रशासन द्वारा जप्त किया जाता है. जेडीए ने ऐसे 450 से अधिक खातेदारों की लिस्ट जिला प्रशासन को भेजी. जिला प्रशासन को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए भूमि को जप्त करना है, लेकिन जिला प्रशासन इस लिस्ट पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. जिसके चलते अवैध कॉलोनियों का व्यापार बेधड़क फल-फूल रहा है.
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इस निष्क्रियता का सीधा लाभ अवैध कॉलोनाइजरों को मिल रहा है. बिना किसी डर के वे कृषि भूमि पर प्लॉटिंग कर रहे हैं और आम लोगों को सस्ते प्लॉट का झांसा देकर ठग रहे हैं. बाद में यही लोग सड़क, सीवरेज, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हो जाते हैं.
अगर जिला प्रशासन समय रहते जेडीए की भेजी गई सूची पर सख्त कदम उठाए और भूमि जप्ती की कार्रवाई करे, तो अवैध कॉलोनियों के बढ़ते कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है. फिलहाल प्रशासनिक ढिलाई के चलते राजधानी में अवैध कॉलोनियों का कारोबार लगातार फल-फूल रहा है.
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