पंचायत समितियों में 25 % अनपढ़ सदस्य 34 % ग्रेजुएट के साथ बैठकर चलाएंगे गांवों की सरकार
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पंचायत समितियों में 25 % अनपढ़ सदस्य 34 % ग्रेजुएट के साथ बैठकर चलाएंगे गांवों की सरकार

राजधानी जयपुर (Jaipur News ) में पंचायत समिति से लेकर जिला परिषद सदस्य चुन लिए गए हैं. 

पंचायत समितियों में 25 % अनपढ़ सदस्य 34 % ग्रेजुएट के साथ बैठकर चलाएंगे गांवों की सरकार

Jaipur : राजधानी जयपुर (Jaipur News ) में पंचायत समिति से लेकर जिला परिषद सदस्य चुन लिए गए हैं. जिला परिषद में जिला प्रमुख, उपजिला प्रमुख और पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान भी बन गए हैं. जयपुर (Panchaytiraj Election) में बीते दिनों 22 पंचायत समितियों में 445 सदस्यों और जिला परिषद के 51 सदस्यों की वोटिंग हुई, जिसके रिजल्ट 4 सितम्बर को आ गए हैं. इन चुनावों में जीते उम्मीदवारों की अगर शैक्षणिक योग्यता देखे तो यह अब तक बने बोर्ड में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखों का बोर्ड है.

19 माह के इंतजार के बाद जयपुर जिला परिषद में 51 सदस्य और 22 पंचायत समितियों में 445 सदस्य चुन लिए गए हैं. इनमें से जिला प्रमुख उपजिला प्रमुख, प्रधान और उपप्रधान भी बन गए हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जयपुर जिला परिषद में जिला प्रमुख रमा चौपड़ा से ज्यादा उपजिला प्रमुख मोहन डागर पढ़े लिखे हैं. भाजपा से जिला प्रमुख बनी रमा चौपडा जहां सिर्फ 12वीं पास है वहीं कांग्रेस से उपजिला प्रमुख बने मोहन डागर पोस्ट ग्रेजुएट हैं. रमा चौपड़ा ने पहली बार राजनीति में कदम रखा है. जबकि मोहनडागर दूसरी बाद जिला परिषद का चुनाव जीतकर उपजिला प्रमुख बने हैं. जयपुर जिला परिषद के 51 सदस्यों में से 35 फीसदी सदस्य ऐसे जीतकर आए हैं, जो ग्रेजुएट या पीजी किए हुए हैं. इसमें सबसे ज्यादा 12 सदस्य कांग्रेस के हैं. वहीं, 22 पंचायत समितियों की बात करें तो यहां करीब 34 फीसदी उम्मीदवार ऐसे है जो ग्रेजुशन या उससे ज्यादा की योग्यता हासिल किए हुए हैं.

जयपुर जिले की 22 पंचायत समितियों में जीतकर आए 445 सदस्यों में से 25 फीसदी यानी 113 सदस्य ऐसे हैं, जो अनपढ़ है यानी उन्हें केवल अपना साइन करना ही आता है. इसमें ज्यादातर महिलाएं हैं. वहीं, जिला परिषद की स्थिति देखे तो यहां 51 में से 8 मेम्बर अनपढ़ हैं. जो कुल संख्या करीब 16 फीसदी है. यहां दोनों ही पार्टियों में अनपढ़ जीतकर आए सदस्यों की संख्या 4-4 यानी बराबर है. चुनाव से पहले जब टिकट वितरण हुआ तो पढ़े-लिखों की पैरवी करने वाली भाजपा ने ही इस बार 9 साक्षर (ऐसे लोग जो केवल नाम लिखना जानते है) को टिकट दिया था. इस मामले में सबसे ज्यादा 12 लोगों को कांग्रेस ने टिकट दिया है, जबकि 4 उम्मीदवार राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के ऐसे थे जो अनपढ़ थे. पंचायत समितियों में इस बार अनपढ़ से ज्यादा ऐसे उम्मीदवार जीतकर आए जो अच्छे खासे पढ़े लिखे हैं. 150 सदस्य ऐसे जीते हैं, जो ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट हैं. यही नहीं कुछ उम्मीदवार एम कॉम. एमबीए, बीटेक, बीएड और एलएलबी किए हुआ है. वहीं, जिला परिषद की स्थिति देखे तो 51 में से 18 उम्मीदवार ऐसे है जो ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट है. इसमें 6 बीजेपी से जीते है, जबकि 12 कांग्रेस से.

भाजपा पार्टी की वसुंधरा राजे सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के लिए 10वीं पास की अनिवार्यता कर रखी थी. इससे कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति इन पदों पर नामांकन नहीं भर सकता था. दिसंबर 2018 में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस पार्टी की गहलोत सरकार ने इस नियम को बदल दिया था. इसको लेकर भाजपा के सदस्यों ने विरोध भी जताया था.

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