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Indresh Upadhyay Marriage: कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय और शिप्रा शर्मा की शादी संपन्न हो गई है. खास मेहमानों और दोनों परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इंद्रेश उपाध्याय ने शिप्रा की मांग में सिंदूर भरा.
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय और शिप्रा शर्मा की शादी का वीडियो pic.twitter.com/zNLm51fXY8
— Sneha Aggarwal/ स्नेहा अग्रवाल (@Aggarwalsnehu) December 5, 2025
मेहमानों ने वर-वधू पर पुष्प वर्षा करते हुए आशीर्वाद दिया. तीन दिनों से चल रहा यह भव्य आयोजन धार्मिक, सामाजिक और संगीत जगत की कई हस्तियों की मौजूदगी से खास बना हुआ है.
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बुधवार रात इंद्रेश अपने परिवार के साथ जयपुर पहुंचे थे. गुरुवार की सुबह मेहंदी और हल्दी की रस्में परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ आयोजित की गईं. शिप्रा की मेहंदी इंद्रेश ने खुद रचाई, जबकि परिवार की महिलाओं और मित्रों ने भी इन रस्मों का आनंद लिया. इसके बाद लगन की रस्म संपन्न हुई.
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शाम को आयोजित संगीत समारोह इस शाही विवाह का सबसे आकर्षक हिस्सा बना. कार्यक्रम की शुरुआत इंद्रेश के माता-पिता-प्रसिद्ध रामकथा एवं भागवत कथावाचक कृष्ण चंद्र ठाकुर और उनकी धर्मपत्नी के भावपूर्ण नृत्य से हुई. परिवार की बहनों और रिश्तेदारों ने भी मंच पर प्रस्तुतियां दीं.
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संगीत समारोह में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित किया बॉलीवुड के मशहूर गायक बी प्राक ने, जो इंद्रेश के करीबी मित्र भी हैं. उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों के अलावा इंद्रेश द्वारा गाए गए प्रसिद्ध भजनों की धुनें भी मंच पर सुनाकर माहौल को भावपूर्ण और उत्साहपूर्ण बना दिया.
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इंद्रेश उपाध्याय की लोकप्रियता केवल उनके भजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे मथुरा-वृंदावन के प्रमुख युवा कथावाचकों में गिने जाते हैं. संत समाज में उनके परिवार की गहरी पहचान होने के कारण विवाह में धार्मिक जगत की कई सम्मानित हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है.
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इनमें कथावाचिका जया किशोरी, ब्रज के प्रमुख संत कार्ष्णि पीठाधीश्वर गुरु शरणानंद, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, मलूक पीठाधीश्वर संत राजेंद्रदास, कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर, पुंडरीक गोस्वामी, संत अलबेली माधुरी शरण सहित अनेक संतों ने नवदंपती को आशीर्वाद दिया.
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जयपुर के प्रमुख मंदिरों के संत-महंत भी समारोह में शामिल हुए, जिनमें गोविंद देवजी मंदिर के महंत अंजन गोस्वामी विशेष रूप से उपस्थित रहे. इस शाही आयोजन ने जयपुर में आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर संगम प्रस्तुत किया है.
होटल के जयगढ़ लॉन में आयोजित यह विवाह बड़े स्तर पर हुआ, माहौल पूरी तरह पारंपरिक, संयमित और आध्यात्मिक रहा. हरिद्वार, नासिक और वृंदावन से आए पंडितों की मौजूदगी ने फेरे के वक्त विवाह मंडप के वातावरण को वैदिक स्वरूप दिया.
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