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Jaipur News: अपैक्स बैंक में फर्जी डिग्री का बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है. 41 अफसरों ने वेतन वृद्धि के लिए फर्जी डिग्री लगा दी. सबसे हैरानी की बात तो ये है कि अधिकतर डिग्री उन यूनिवर्सिटी की हैं, जिनके पास राजस्थान में स्टडी कैम्पस खोलने की मंजूरी नहीं थी. अपैक्स बैंक एमडी की जांच में 41 अफसरों की पोल खुली. आखिरकार कैसे यूजीसी नियमों के साथ-साथ सरकार के समझौते का खुला उल्लंघन हुआ.
वेतन वृद्धि के लिए फर्जीवाड़ा
अपैक्स बैंक में फर्जी डिग्री का खुलेआम फर्जीवाड़ा हुआ, जिस अफसर को मौका मिला. उसने फर्जी डिग्री लगाकर वेतन वृद्धि का लाभ उठाया. अपैक्स बैंक एमडी की जांच में फर्जी डिग्रियों की पोल खुल गई.
इस फर्जीवाड़े में किसी ने दो साल की डिग्री डेढ़ साल में ली तो किसी ने बिना छुट्टी लिए प्रैक्टिकल तक दे डाला. अधिकतर डिग्री उन यूनिवर्सिटी की हैं, जिनके पास राजस्थान में स्टडी कैम्पस खोलने की मंजूरी नहीं थी. सहकारी बैंकों के कर्मचारियों और सरकार में वर्ष 2012 में वेतन समझौता हुआ था. इसके मुताबिक, एमएससी (आईटी) की डिग्री वाले कर्मचारियों को दो वेतन वृद्धि अतिरिक्त मिलेगी लेकिन इस समझौते के मुताबिक वेतन वृद्धि लेने के लिए अफसरों ने नियमों के ताक पर रख फर्जी डिग्री ले ली.
इन 41 अफसरों की डिग्री फर्जी
एक रिपोर्ट के मुताबिक पी.के.नाग, मनोज साहा, केडी शर्मा, कल्याण चौहान, ताराचंद, पी.एल.बैरवा, आर.पी. गावरिया, मूलचंद सुधार, अमरचंद मीणा, सुमित मीणा, सर्वेश चौधरी, मनीष गुप्ता, रुचि शर्मा, नेहा गुप्ता, अंकित अग्रवाल, महेन्द्रपाल, अविना शर्मा, अनिश कुमार, सुरेन्द्र राठौड़, अभिषेक रायजादा, सत्यनारायण, पीयूष नारायण, रितेश जैन, शिवचरण गुर्जर, आर.के. राजोरिया, एसएल स्वामी, एसके पाटनी, केके मडिया, दिनेश बगड़ी, राजेन्द्र मीणा, हेमा मंगलानी, अमित शर्मा, गणेश नारायण मीणा, दीपक दामनिया, रवि कुमार, धर्म मीणा, मैना जैन, मुकेश सैनी, कृष्ण कुमार, हेमंत बालोतिया ने फर्जी डिग्री ली.
यूजीसी रेगुलेशन नियमों का खुला उल्लंघन
यूजीसी रेगुलेशन 2003 के तहत निजी विवि राज्य से बाहर यूजीसी की अनुमति के बिना स्टडी सेंटर आफ कैम्पस सेंटर नहीं चला सकते हैं. इसके बाद भी बाहरी यूनिवर्सिटी ने डिग्री दी. कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से 8 अधिकारियों ने डिग्री दी थी.
हालांकि यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मार्कशीट दी थी. डिग्री दी ही नहीं. सबसे अधिक सिक्किम मणिपाल विवि से 2014 में जारी डिग्री पेश की गई. इसमें द्वितीय सेमेस्टर की मार्कशीट प्रथम सेमेस्टर से पहले की है. कुछ कर्मचारियों ने स्टडी के लिए 2012 में मंजूरी ली. उन्होंने दो साल के कोर्स की डिग्री डेढ़ साल में ही पेश कर दी, जो संभव नहीं है.
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