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Rajasthan News: जयपुर शहर भाजपा कार्यकारिणी की सूची आज अचानक बाहर आई, लेकिन तत्काल ही उसे वापस ले लिया गया. जी राजस्थान की अंदरूनी पड़ताल में सामने आया कि सूची में पूरी तरह ताकत का खेल दिखाई दिया. इसमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री मंत्री, विधायक तक के नाम शामिल किए गए, लेकिन फिर भी सूची फेल हो गई. अब इस सूची को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में सवाल उठ रहे हैं?
बीजेपी में जयपुर शहर अध्यक्ष पद पर अमित गोयल की करीब 5 महीने पहले घोषणा कर दी थी. 5 महीने में अमित गोयल अपनी जिला कार्यकारिणी नहीं घोषित कर पा रहे थे. राजधानी जयपुर का जिला होने के कारण यहां पर अमित गोयल के सामने पावर का खेल चुनौती बना हुआ है. इस बीच आज अचानक जयपुर शहर अध्यक्ष की ओर से जिला कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई. हालांकि कुछ समय बाद ही इस कार्यकारिणी सूची को वापस ले लिया गया. पहले सूची जारी कर ले और फिर इसे वापस लेने को लेकर कार्यकर्ताओं में कौतूहल बना हुआ है. कार्यकारिणी को लेकर अलग-अलग प्रकार की चर्चाएं कार्यकर्ताओं के बीच चल रही है.
इधर कार्यकारिणी के नामों को देखकर पता चलता है कि इसमें जमकर पावर का खेल हुआ. कार्यकारिणी में किसकी कितनी चली या किसी नेता दी गई, इसकी पूरी अंदरूनी कहानी जी राजस्थान के पास है. कार्यकाल में जयपुर शहर के जनप्रतिनिधियों नेताओं और यहां तक की संघ परिवार को भी संतुष्ट करने का प्रयास किया गया.
कार्यकारिणी में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री, विधायकों तक की सिफारिश को शामिल किया गया। सूची में संतुलन बैठाने की कोशिश की गई, लेकिन फिर भी कमी रह गई. सोशल मीडिया पर बाहर आए नाम, किसकी सिफारिश से किसको बनाया पदाधिकारी, इसकी संपूर्ण जानकारी दी राजस्थान के पास है.
34 सदस्यीय कार्यकारिणी के पदाधिकारी के नाम के आगे सिफारिश करने वालों प्रमुख हो के नाम लिखे गए हैं. सूची में मुख्यमंत्री के 2, मुख्यमंत्री कार्यालय का 1, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के 4, मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के 2, विधायक बालमुकुंद आचार्य के 2 नाम शामिल किए गए. इसी तरह उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा, विधायक कालीचरण सराफ, विधायक गोपाल शर्मा, कैलाश वर्मा, अशोक परनामी, चंद्र मनोहर बटवाडा की सिफारिश पर एक-एक नाम आया है. वहीं 9 पदाधिकारी कार्य के आधार पर नियुक्त करना बताया गया.
सूची जारी तो फिर अवैध कैसे ?
जयपुर शहर भाजपा की सूची जारी की गई लेकिन तत्काल वापस ले लिया गया. इसके बाद शहर अध्यक्ष अमित गोयल ने सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण दिया कि यह सूची अवैध है वैध सूची कुछ दिनों बाद जारी की जाएगी. इस पर कार्यकर्ताओं के बीच में सवाल उठ रहा है कि सूची पर अमित गोयल के हस्ताक्षर है. ऐसे में अवैध कैसे हुई ? हालांकि जल्दबाजी में जारी की गई सूची हो सकती है लेकिन अवैध कैसे हुई ?
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