Jaipur News: बंदियों को इलाज के बहाने होटल ले जाने का मामला, 20 आरोपी गिरफ्तार

Jaipur News: राजस्थान के जयपुर सेंट्रल जेल से इलाज के बहाने बंदियों को SMS अस्पताल लाने और अस्पताल से होटल ले जाने के मामले में अब तक पुलिस 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. प्रकरण में अभी भी कई लोग पुलिस की रडार पर हैं. 

Jaipur News: बंदियों को इलाज के बहाने होटल ले जाने का मामला, 20 आरोपी गिरफ्तार

Jaipur News: जयपुर सेंट्रल जेल के अंदर से बंदियों से राशि लेकर उन्हें इलाज के बहाने SMS अस्पताल रेफर कर और अस्पताल से दूसरी जगह ले जाने का यह खेल चल रहा था. इस पूरे प्रकरण में पांच पुलिसकर्मी, कई बंदी और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जयपुर सेंट्रल जेल का एक चिकित्सक भी पुलिस की रडार पर हैं, जिसे नोटिस भेज कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

डीसीपी ईस्ट तेजस्वनी गौतम ने बताया कि 24 में को जयपुर सेंट्रल जेल से चार बंदी रफीक उर्फ बकरी, भंवरलाल, अंकित बंसल और करण गुप्ता को इलाज के बहाने SMS अस्पताल लाया गया, जहां से उन्हें पुलिस के दो गार्ड दो अलग-अलग होटल में लेकर गए, जिन्हें एयरपोर्ट थाना इलाका और जालूपुरा थाना इलाके के दो अलग-अलग होटल से गिरफ्तार किया गया.

साथ ही बंदियों को होटल ले जाने में सहयोग करने वाले पांच पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया गया और बंदियों का सहयोग करने वाले उनके पांच परिजनों की भी गिरफ्तारी हुई. इसके बाद चारों बंदियों को एसएमएस अस्पताल रेफर करने में मदद करने वाले जयपुर सेंट्रल जेल में कार्यरत चिकित्सक के सेवादार बंदी आनंदीलाल को गिरफ्तार किया गया.

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वहीं, बंदियों को रेफर करने के बदले 20 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करने वाले अलीम को गिरफ्तार किया गया. इसके बाद अलीम की बाद की कड़ी में यूडीसी हनुमान सहाय मीणा, बंदी आनंदीलाल के पिता शंभू दयाल और राहुल मीणा को गिरफ्तार किया गया.

वहीं, इसके बाद बंदी रफीक और भंवरलाल को फरार करने में मदद करने वाली बंदी भंवरलाल की प्रेमिका पूनम देवी और धर्मेंद्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया. पूनम देवी ने ही धर्मेंद्र को पैसे दिए और धर्मेंद्र ने आलिम के खाते में पैसे ट्रांसफर किए.

डीसीपी ईस्ट तेजस्वनी गौतम ने बताया कि जयपुर पुलिस में तैनात कांस्टेबल विकास कुमार की इस पूरे प्रकरण में काफी अहम भूमिका है. विकास कुमार जेल से बंदियों को लेने जाने वाले गार्ड्स से मध्यस्थता करने का काम करता. राशि लेकर जिन बंदियों को जेल से एसएमएस अस्पताल इलाज के बहाने रेफर किया जाता, उनको लेने के लिए जयपुर पुलिस लाइन से जो भी गार्ड जाते उनसे विकास बात करके पहले ही पूरा मामला सेट कर लेता.

फिर बंदियों को अस्पताल से अलग-अलग स्थान पर उनके परिजनों, प्रेमिकाओं और अन्य लोगों से मिलाने के लिए ले जाया जाता. इसके लिए कांस्टेबल विकास कुमार को भी मोटी राशि दी जाती. हालांकि मामला उजागर होने पर विकास को भी गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तार किए गए पांच लोगों के बैंक खातों में सवा दो लाख का ट्रांजैक्शन पाया गया है. साथ हीं, कैदियों को लेकर जो गार्ड एसएमएस अस्पताल गई थी, उनसे भी कांस्टेबल विकास द्वारा 58 हजार रुपये में डील की गई थी. यह राशि गार्डों में आपस में बाटनी थी.

इसके साथ ही जयपुर सेंट्रल जेल के चिकित्सक कैलाश की भूमिका भी इस पूरे मामले में संदिग्ध पाई गई है. चिकित्सक कैलाश के एक परिचित के खाते में भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन पाया गया है. फिलहाल चिकित्सक कैलाश छुट्टियों पर चल रहे हैं, जिन्हें पुलिस द्वारा नोटिस भेज कर पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

यदि चिकित्सक कैलाश पुलिस जांच में सहयोग नहीं करते और पूछताछ के लिए नहीं आते तो फिर उन्हें विधिक प्रक्रिया अपनाकर डिटेन किया जाएगा. जेल के अंदर से चल रहे इस पूरे खेल में जेल के कुछ अन्य कर्मचारियों, जेल प्रहरियों आदि की भूमिका सामने आई है, जो सभी पुलिस की रडार पर हैं. जल्द ही प्रकरण में कुछ और गिरफ्तारियां देखने को मिलेगी.

जेल के अंदर बंदियों को सुविधा उपलब्ध कराने और उन्हें इलाज के बहाने एसएमएस अस्पताल रेफर कर अन्य स्थानों पर ले जाने का यह पूरा खेल काफी लंबे समय से चल रहा है. जेल विभाग के भी कई कर्मचारी और अधिकारियों की भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध पाई गई है. जल्द ही इस पूरे मामले में कुछ और बड़े खुलासे होंगे.

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