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Jaipur News: सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को मेडिकल शिक्षा के अध्ययन के लिए एक और शव दान में मिला है. जगतपुरा के रहने वाले 69 वर्षीय राजेश माथुर का शनिवार सुबह निधन हो गया था. जिसके बाद उनकी इच्छानुसार दामाद शैलेन्द्र माथुर, बहनोई लोकेश दत्त माथुर और परिवार के सभी सदस्यों ने उनके शरीर और नेत्र दान का निर्णय लिया. उसके बाद उनके दोनों कॉर्निया को ईबीएसओआर के जरिए एकत्र किया गया है, और उनके शरीर को अनुसंधान और अध्ययन के लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को सौंप दिया।
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इस दौरान बेटी नेहा और निकिता माथुर ने कहा कि, पापा की इच्छा थी, इसलिए उनकी बॉडी और आई को डोनेट किया गया है.इस दौरान परिवार के सदस्यों ने मेडिकल कॉलेज में उनकी याद में पौधा भी लगाया.इस मौके पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज में एनाटॉमी एचओडी डॉ सीमा गुप्ता ने बताया कि, कॉलेज में इस साल जनवरी से अब तक यह 8वां देहदान है.वहीं पिछले साल 24 लोगों ने देहदान किया था.अब तक एसएमएस में 282 देहदान हो चुके हैं.उन्होंने कहा कि इससे मेडिकल के छात्रों को अध्ययन में सहायता मिलेगी।
देहदान कैसे किया जा सकता है
देहदान के लिए संकल्प पत्र चिकित्सा महाविद्यालय के शरीर रचना विभाग, एनाटॉमी विभाग एवं गैर शासकीय संगठन एनजीओ दधीचि संस्था एवं मुस्कान ग्रुप से प्राप्त किया जा सकता है. संकल्प पत्र वेब साइट https://donatelifeindia.org पर है.
मृत्यु के बाद कितने समय के अन्दर देहदान किया जा सकता है
मृत्यु के बाद देह का दान अधिकतम 15 घंटे के अन्दर किया जा सकता है. अगर किसी कारणवश विलम्ब होता है तो मृत देह को बर्फ में सुरक्षित रख जाता है, जिससे मृत देह खराब न हो. यही प्रक्रिया अधिक गर्मी में भी अपनाई जाती है जिससे मृत देह परीक्षण के लिए सुरक्षित रहे.