Jaipur: Monsoon से पहले कंट्रोल रूम की डूब रही नैया, सरकारी दावे निकले खोखले!

Jaipur News: नगर निगम के अफसर भी मानते हैं कि आधी-अधूरी के साथ कंट्रोल रूम शुरू हुए हैं. दो-चार दिन में सबकुछ ठीक कर दिया जाएगा. 

Jaipur: Monsoon से पहले कंट्रोल रूम की डूब रही नैया, सरकारी दावे निकले खोखले!
राजस्थान में मानसून की शुरुआत होने वाली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Jaipur: मानसून के दस्तक देने का समय नजदीक है. मानसून के साथ ही प्राकृतिक आपदाओं का दौर भी शुरू हो जाएगा. लेकिन मॉनसून से पूर्व प्राकृतिक आपदाओं से बचाव की तैयारियां अभी तक शुरू भी नहीं हुई है. 10 माह पहले 14 अगस्त को हुई बारिश ने शहरभर को बांध कर रख दिया था बल्कि बाहरी इलाकों में भी पानी भर गया था जिससे लोग घरों में फंस गए थे.

कच्ची बस्तियां तो जैसे पानी में डूब ही गई थी. ऐसे में प्रशासन के दावे पिछली बार हुई परेशानियों की पुनरावृत्ति न होने देने की हो. लेकिन हकीकत इससे परे है. दरअसल, प्रदेश में मॉनसून कभी भी दस्तक दे सकता है. मॉनसून आने की लोगों के चेहरों की खुशी को लाल फीताशाही छीन सकती है.

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प्रदेश में 15 जून से मानसून के आगमन का समय रहता है. इसी को देखते हुए जिला स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष खोले जाते हैं. जयपुर में भी 10 दिन पहले ही जिला कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा ने जयपुर कलेक्ट्रेट सहित नगर निगम हैरिटेज और ग्रेटर में सात जगह पर कंट्रोल रूम खोलने के निर्देश जेडीए, नगर निगम सहित कई संबंधित विभागीय अधिकारियों को दिए. लेकिन जब कंट्रोल रूम का सच जानने के लिए रियलिटी चेक किया तो नजारा चौकानें वाला निकला. प्रशासन के दावे धरातल पर खोखले निकले.

अब सवाल ये है कि कंट्रोल रूम के नंबर तो शुरू कर दिए गए लेकिन संसाधनों के बिना कंट्रोल रूम किस काम का. अभी तक कर्मचारियों के बैठने के लिए शामियाना लगाने का काम ही शुरू हुआ हैं. जब तक कर्मचारी कड़ी धूप में ही फोनों की घंटियां सुनते हैं और रजिस्टर में दर्ज करते हैं. लेबर नहीं होने के कारण बाढ़ नियंत्रण कक्षों के बाहर मिट्टी को कट्टों में भरा नहीं जा सका हैं.

नगर निगम के अफसर भी मानते हैं कि आधी-अधूरी के साथ कंट्रोल रूम शुरू हुए हैं. दो-चार दिन में सबकुछ ठीक कर दिया जाएगा. कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा का कहना हैं कि हैरिटेज नगर निगम क्षेत्र में बनीपार्क, आमेर, घाटगेट और ग्रेटर क्षेत्र में मालवीय नगर, मानसरोवर और विश्चकर्मा फायर स्टेशन पर कंट्रोल रूम शुरू करने के निर्देश दिए गए थे. साथ में नालों की सफाई की रिपोर्ट भी मांगी हैं. लेकिन अभी तक निगम की ओर से नालों की सफाई रिपोर्ट नहीं आई है.

बारिश के दिनों में संभावित बाढ़, पानी भरने और जल प्लावन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रशासन बंद कमरों में बैठकें तो कर रहा है. लेकिन जमीनी हकीकत में अभी वह अन्य जिलों से मिलने वाली सहायता पर ही निर्भर है. मानसून में अब कुछ ही दिन शेष माने जा रहे हैं. बारिश को प्री मानसून की शुरुआत मानी जा रही है. ऐसे में मानसून के समय शहर में जल प्लावन की स्थिति बन सकती है. शहर में हर वर्ष थोड़ी बारिश में ही नाले उफान पर आ जाते हैं. इसके कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. टेंडर की प्रकिया देरी से होने के कारण अभी तक मिट्टी के कट्टे भरे ही नहीं गए हैं. मडपंप, जेसीबी, नाव सहित अन्य राहत बचाव के संसाधन नहीं पहुंचे हैं. जहां तक बात नावों की है जयपुर शहर में कम से कम 10 नावों का होना जरूरी है.

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बाढ़ से लोगों को बचाने वाली नाव अस्त, व्यस्त उलटी पड़ी है. इससे लग रहा है मानों कंट्रोल रूम की नैया ही डूब गई है. ऐसे में साफ जाहिर है कि जिला प्रशासन की मानसून को लेकर तैयारी नहीं है. वहीं, कलेक्टर के आदेशों की पालना नहीं हो रही है और अफसर 'आउट ऑफ कंट्रोल' हो गए हैं.

आपदा प्रबंधन विभाग ने पिछले साल के मानसून की घटना से शायद सबक नहीं लिया है. यहीं कारण है कि मानसून दरवाजे पर खड़ा है और हमारी तैयारियां लगभग शून्य है. ऐसे में दस माह पहले जैसे हालात हुए तो जनता और प्रशासन दोनों को ही भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.