जिला स्तरीय जनसुनवाई एवं समाधान कार्यक्रम, अधिकारियों को दिए गए निर्देश

Jaipur News: राजस्थान में जिला स्तरीय जनसुनवाई एवं समाधान कार्यक्रम हुआ, जहां कलक्टर्स ने अपनी टीम के साथ आमजन की समस्याओं को सुना और निस्तारण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए. 

जिला स्तरीय जनसुनवाई एवं समाधान कार्यक्रम, अधिकारियों को दिए गए निर्देश

Jaipur News: प्रदेश में माह के तीसरे गुरुवार को जिला स्तरीय जनसुनवाई एवं समाधान कार्यक्रम हुआ. जिला कलक्टर्स ने अपनी टीम के साथ आमजन की समस्याओं को सुना और निस्तारण करने के साथ संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए. जयपुर जिले में भी 182 फरियादी जनसुनवाई में पहुंचे और अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा बयां की. इनमें से मौके पर 22 का तुरंत निस्तारण कर राहत दी गई.
जयपुर सहित प्रदेशभर में हर माह तीसरे गुरुवार को होने वाली त्रिस्तरीय जनसुनवाई में आमजन की समस्याओं को सुना गया. जिला कलक्टर्स की अध्यक्षता में जनसुनवाई एवं समाधान कार्यक्रम आयोजित हुआ. जयपुर जिला कलेक्टर डॉक्टर जितेन्द्र कुमार सोनी ने भी कलेक्ट्रेट सभागार में जनसुनवाई की, जिसमें 182 प्रकरण दर्ज हुए और 22 का मौके पर संबंधित अधिकारियों को निर्देश के साथ निस्तारण किया गया.

इसमें 86 प्रकरण राजस्व से जुड़े और 96 प्रकरण अन्य विभागों से जुडे दर्ज हुए. सड़क, पेयजल, अतिक्रमण, भूमि विवाद, अवैध निर्माण, पेंशन, पुलिस, पट्टा, जलभराव, जेडीए, नगर निगम, चिकित्सा और शिक्षा संबंधित शिकायत भी जनसुनवाई में लेकर लोग पहुंचे.

लगातार मुख्य सचिव सुधांश पंत के त्रिस्तरीय जनसुनवाई के रिव्यू और मॉनिटरिंग के बाद दर्ज प्रकरणों के निस्तारण और सेटिस्फेक्शन रेट में सुधार हुआ हैं. वीसी के माध्यम से मुख्य सचिव सुधांश पंत और एआरडी सचिव राजन विशाल ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर्स से संवाद करते हुए दर्ज प्रकरणों के निस्तारण की स्थिति और संतुष्टि दर की समीक्षा की.

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उन्होंने कुछ जिलों की बेहतर कार्यप्रणाली की प्रशंसा की तो कुछ जिलो में अभी सुधार की गुंजाइश बताया. उन्होने जयपुर जिले की रिपोर्ट को देखकर कहा कि पहले से बेहतर प्रोगेस देखकर तारीफ की. उन्होंने जयपुर जिला कलेक्टर डॉ.जितेन्द्र कुमार सोनी से पूछा की कैसे सुधार किया जिससे निस्तारण और सेटिस्फेक्शन रेट अच्छी हुई हैं.

इस पर कलक्टर ने सुधार के लिए किए गए प्रयासों के बारे में वीसी में जानकारी दी. जयपुर जिले ने एक मिसाल कायम करते हुए साल 2024 के सभी लंबित प्रकरणों को पूर्णत: निस्तारित कर दिया है. यह पहली बार है, जब जयपुर जिले में छह माह से अधिक पुराने प्रकरणों की संख्या शून्य हो गई है. यहां का औसत निस्तारण समय 18 दिन और संतुष्टि दर 71 प्रतिशत दर्ज की गई है जबकि प्रतापगढ़ और राजसमंद का 67 प्रतिशत,चूरू का 59 प्रतिशत, बाड़मेर का 55 फीसदी सेटिस्फेक्शन रेट हैं जबकि झालावाड, सिरोही, धौलपुर, जैसलमेर और बीकानेर 0 से 21 प्रतिशत सेटिस्फेक्शन रेट हैं, जो चिंता का विषय है.
जनसुनवाई एवं जिला स्तरीय जनसुनवाई के आंकडों पर नजर डाले तो त्रिस्तरीय जनसुनवाई 1 मई से 2022 से 18 जून 2025 तक कुल 64 हजार 850 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 64 और 260 प्रकरण निस्तारित किए गए हैं. जो की कुल दर्ज प्रकरणों का 99.09 प्रतिशत हैं.

इसी तरह जिला स्तरीय जनसुनवाई के आंकडों को देखे तो मई 2022 से 22 मार्च तक 2025 तक औसत निस्तारण दिवस 26 दिन था जो की 23 मार्च 2025 से 18 जून 2025 तक घटकर 24 दिन हो गया.

जोधपुर में सबसे ज्यादा 31 दिन में दर्ज प्रकरणों का औसत निस्तारण हो रहा है जबकि प्रतापगढ, जयपुर, सलूंबर, भीलवाडा और चूरू में 14 से 19 दिन में दर्ज प्रकरणों का औसत निस्तारण हो रहा है. वहीं, संतुष्टि प्रतिशत 32 से बढकर 40 फीसदी हो गया हैं. 23 मार्च 2025 से 18 जून 2025 तक दर्ज शिकायतों के निस्तारण में प्रदेश का आंकडा 89.98 प्रतिशत है, जिसमें भीलवाडा, डूंगरपुर, श्रीगंगानगर, अजमेर,राजसमंद की बेहतर परफॉर्मेंस रही हैं.

इन जिलों में 95 से 99 फीसदी तक हुआ समस्याओं का निस्तारण हो चुका हैं. भीलवाडा जिले में सबसे ज्यादा 99.10 शिकायतों का निस्तारण हुआ जबकि आंकडों के अनुसार प्रतापगढ़, चित्तौडगढ़, बांसवाडा,धौलपुर,बारां को सुधार की जरूरत हैं. इन जिलों में 54 से 80 फीसदी तक हुआ समस्याओं का निस्तारण हुआ हैं.

सबसे कम प्रतापगढ़ में 54.55 फीसदी दर्ज प्रकरणों का निस्तारण हुआ. चित्तौडगढ में 72.28 फीसदी, बांसवाड़ा में 78.72 फीसदी, धौलपुर में 79.27 फीसदी और बारां में 80.41 फीसदी निस्तारण हुआ. छह माह से अधिक अवधि से अधिकतम लंबित प्रकरणों वाले जिलों की स्थिति पर नजर डाले तो जोधपुर, बीकानेर, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, सीकर और करौली ऐसे जिले हैं, जहां 181 से 365 दिन से निस्तारण नहीं होने से प्रकरण पेडिंग चल रहे हैं.
बहरहाल, सरकार ने आमजन की समस्याओं को सुनने और उनके निस्तारण के लिए प्रशासन के स्तर पर त्रिस्तरीय जनसुनवाई की सुविधा कर रखी है. प्रदेश में जनसुनवाई प्रणाली धीरे-धीरे प्रभावी बनती जा रही है. जयपुर जैसे जिलों ने बेहतर प्रयास करते हुए सेटिस्फेक्शन रेट और समाधान दर में सुधार किया है जबकि कुछ जिलों को और अधिक सक्रिय प्रयास करने की आवश्यकता है.

Reporter-Deepak Goyal


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