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Jaipur News: राजधानी जयपुर में हुई मूसलाधार बारिश ने गलता जी जैसे पौराणिक तीर्थ को भी नहीं बख्शा. पहाड़ियों से बहकर आया मिट्टी-पत्थरों का सैलाब इस ऐतिहासिक धाम के मंदिरों तक जा पहुंचा. भगवान के दरबार में जलधारा के साथ मिट्टी का मलबा भर गया. गलता जी, जो सतयुग से साधना का केंद्र रहा है, आज मिट्टी के ढेरों के बीच सांस ले रहा है.
पहाड़ियों के बीच बसा गलताजी तीर्थ, जहां हमेशा पानी की कल-कल ध्वनि और भक्तों की श्रद्धा का प्रवाह रहता है लेकिन रविवार रात यहां का नजारा बिल्कुल बदल गया. तेज बारिश ने गलता जी के मंदिरों को मिट्टी से ढक दिया. तेज बारिश ने गलता तीर्थ को भी नहीं छोड़ा, जहां हर रोज श्रद्धा का सैलाब उमड़ता है. आज वहां मिट्टी का सैलाब है.
गौमुख से बहता पवित्र जल आज पहाड़ों से बहती मिट्टी और पत्थरों के साथ मिल गया है, जहां कभी भक्त आरती की थाल लेकर सीढ़ियां चढ़ते थे, आज उन्हीं सीढ़ियों पर झरने की धार बह रही है. गलता जी का यज्ञवेदी कुंड, जहां हाल ही में जिला प्रशासन ने सफाई कराई थी. अब फिर मिट्टी से पट चुका है. इतना ही नहीं कुंड का निशान तक मिट गया है.
गालव ऋषि की तपोभूमि, जहां देवताओं का आगमन होता है, आज जेसीबी की गर्जना सुनाई दे रही है. ये बारिश सिर्फ पानी नहीं लाई, ये हमें याद दिला रही है कि प्रकृति के सामने हर निर्माण, हर व्यवस्था कितनी छोटी है. बताते है कि सबसे पहले पापड़ा हनुमान मंदिर में पानी घुसा. रातभर बारिश के कारण मंदिर का गेट बंद रहा और बाहर मिट्टी का टीला जम गया. सुबह फावड़े से मिट्टी हटाकर गेट खोला गया, तब जाकर बजरंगबली की पूजा हो सकी.
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने जयपुर जिला कलेक्टर को गलताजी की संपत्तियों के प्रबंधन और संचालन के लिए प्रशासक नियुक्त कर रखा है. जिला प्रशासन ने जिम्मा संभालने के बाद यहां करीब 12 करोड़ रुपये के विकास कार्य भी करवाए हैं.
यज्ञवेदी कुंड का हाल भी बारिश ने बिगाड़ दिया. कुछ दिन पहले ही जिला प्रशासन ने इस पवित्र कुंड को साफ करवाया था लेकिन पहाड़ी से आए मलबे ने इस कुंड को फिर से पूरी तरह ढक दिया. अब तो पहचानना भी मुश्किल हो गया कि यहां कुंड है भी या नहीं.
सिर्फ मंदिर ही नहीं, गलता जी की मुख्य एंट्री तक मिट्टी के ढेरों ने रास्ता रोक दिया. श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पैदल चलना भी मुश्किल हो गया. प्रशासन जेसीबी और श्रमिकों की मदद से रास्ता साफ करने में जुटा है. ये वही गलता जी है, जहां ऋषि गालव ने हजारों साल तपस्या की थी, जहां कार्तिक पूर्णिमा पर देवताओं का आगमन होता है और जहां स्नान किए बिना तीर्थ यात्रा अधूरी मानी जाती है.
आज ये धाम बारिश की मार झेल रहा है. बारिश थम गई है, लेकिन गलताजी को सामान्य होने में वक्त लगेगा. प्रशासन का दावा है कि जल्द ही मंदिर परिसर को साफ कर भक्तों के लिए सुगम बनाया जाएगा. लेकिन ये तस्वीरें बताती हैं कि पहाड़ी इलाकों में बिना मजबूत प्रबंधन के बारिश कैसे बड़ा खतरा बन सकती है.
बहरहाल, गलताजी की सीढ़ियों पर आज भी पहाड़ों से उतरता पानी बह रहा है. मिट्टी से ढंके मंदिर के गेट और कुंड इस बात की गवाही दे रहे हैं कि प्रकृति के आगे इंसानी तैयारियां कितनी छोटी पड़ जाती हैं लेकिन यही गलता, जिसे ऋषि गालव की तपोभूमि और देवताओं का धाम कहा जाता है. हर विपत्ति के बाद फिर संवरता है, फिर सजता है. मिट्टी की मोटी परतों के बीच छिपा ये संदेश है कि आस्था की जड़ें हमेशा पहाड़ों से भी मजबूत होती है.
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