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Govind Devji Temple: आस्था और भक्ति के अनूठे संगम राम नाम बैंक से जुड़ी परिक्रमा का शुभारंभ सुबह गोविंद देवजी मंदिर के सत्संग भवन में हो गया. दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक संग्रह कहे जाने वाले इस बैंक में संरक्षित 135 अरब हस्तलिखित राम नाम अब अगले पखवाड़े तक श्रद्धालुओं के लिए परिक्रमा हेतु खुले रहेंगे. लगभग 17.5 अरब राम नाम मंत्रों की यह परिक्रमा श्रील गोस्वामीपाद प्रद्युम्न कुमार जीऊ की स्मृति में शुरू की गई है.
दुनिया भर की बैंकों के बीच एक ऐसा आध्यात्मिक 'बैंक' भी है, जहां जमा होता है सिर्फ राम नाम वह भी हस्तलिखित. राजस्थान का श्रीराम नाम धन संग्रह बैंक आज 135 अरब से ज्यादा लिखे हुए मंत्रों का भव्य भंडार बन चुका है. 38 वर्षों से चल रहे इस अनूठे तप ने आज से एक और ऐतिहासिक पड़ाव छू लिया है.
गोविंददेवजी मंदिर के सत्संग भवन में 17.5 अरब हस्तलिखित राम नाम महामंत्रों की परिक्रमा शुरू हो गई. सुबह 5 बजे मंगला आरती के बाद जैसे ही द्वार खुले, श्रद्धालुओं की कतारें सत्संग भवन तक पहुंच गईं. राम-राधे के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा. इस वर्ष परिक्रमा का यह 11वां आयोजन है, जिसमें भक्त सुबह 5 बजे से शाम 7 बजे तक रामनाम लिखित ग्रंथों की परिक्रमा कर सकेंगे. विशेष व्यवस्था के तहत मंदिर इस दौरान दोपहर में भी श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा. एक पखवाड़े तक परिसर में अध्यात्म, भक्ति और राम नाम की अनवरत ध्वनि सुनाई देगी.
श्रीराम नाम धन संग्रह बैंक के संस्थापक बालकृष्ण पुरोहित ने बताया की रामनाम लिखी पुस्तिकाओं के 700 बंडलों की पूजा-अर्चना की. एक बंडल में एक हजार पुस्तकें और एक पुस्तक में 25 हजार रामनाम लिखे होते हैं. ये पुस्तिकाएं 14 गाड़ियों के काफिले के साथ अजमेर से जयपुर पहुंची हैं.
राम नाम बैंक की स्थापना वर्ष 1987 में हुई थी और तब से अब तक 55 लाख 96 हजार से अधिक पुस्तिकाएं जमा हो चुकी हैं. लगभग 700 भक्त नियमित रूप से रामनाम लिखकर इसे जमा करते आ रहे हैं. बैंक की ओर से हर भक्त का खाता नंबर भी मेंटेन किया जाता है. नया संकल्प लेने वालों को नि:शुल्क 48 पेज की कॉपी दी जाती है, जिसमें 25 हजार रामनाम लिखे जा सकते हैं.
कुल 84 लाख रामनाम लिखने का लक्ष्य प्रत्येक सदस्य को दिया जाता है. आयोजन स्थल पर पुष्कर में बन रहे श्री राम नामालय के मॉडल को भी प्रदर्शित किया गया है, जहां भविष्य में विशाल रामनाम संग्रहालय बनेगा. राम नाम का जप और लेखन जीवन के पापों को हर लेता है और साधक को भक्ति के उच्चतम शिखर तक पहुंचा देता है. रामनाम परिक्रमा 13 दिसंबर तक चलेगी, जिसमें प्रतिदिन लगभग 25 कार्यकर्ता सुबह से देर रात तक सेवा देंगे. श्रद्धालुओं में इसे लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है.
बहरहाल, जीते जी राम नाम जपना चाहिए, लिखना चाहिए. इसे सुनना और सुनाना चाहिए. इससे बढ़कर राम को पाने का और कोई सरल मार्ग नहीं हो सकता. राम नाम जप ले तो जन्मों के पाप मिट जाएंगे. मीरा, रैदास, कबीर भक्ति में इतना लीन हो गए कि प्रभु के बिना उन्हें कुछ सूझता ही नहीं था. अपने भीतर के राम को जगा लेंगे तो भारत एक बार फिर विश्वगुरु के आसन पर विराजित हो जाएगा.
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