जयपुर में लगातार बारिश, फागी, दूदू, चौमूं, बस्सी जैसे इलाकों में खेत बने तालाब

Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर में भारी बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. फागी, दूदू, चौमूं, बस्सी, सांभर और चाकसू जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं. खेत तालाब में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है. 

जयपुर में लगातार बारिश, फागी, दूदू, चौमूं, बस्सी जैसे इलाकों में खेत बने तालाब
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Jaipur News: राजस्थान के जयपुर में आसमान से आफत बरस रही है और जमीन पर किसान राहत का इंतजार कर रहे हैं. खेत पानी में डूबे हैं, फसलें चौपट हो चुकी हैं लेकिन मुआवजा अटका हुआ है. जिसकी वजह ऑनलाइन गिरदावरी है. जयपुर जिला प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल और प्रभारी सचिव आनंद कुमार ने बारिश से प्रभावित इलाकों का जायजा लिया लेकिन किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद अभी भी अधूरी है.

जयपुर जिले में बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है. नतीजा गांव से लेकर शहर तक पानी ही पानी. फागी, दूदू, बस्सी, चौमूं, सांभर और चाकसू इलाके के खेत तालाब बन गए हैं. खेतों में फसलों की जगह अब सिर्फ पानी लहरा रहा है. किसानों की मेहनत बरबाद हो चुकी है लेकिन राहत का पैसा फिलहाल टला पड़ा है. दो हफ्ते से ऑनलाइन गिरदावरी में दिक्कत आ रही है. खसरा सीमा नहीं दिखा रहा, नक्शे गायब हैं.

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ऐसे में जयपुर जिले में अब तक सिर्फ 41 फीसदी गिरदावरी हो पाई है. किसान से लेकर पटवारी तक सब परेशान हैं. जयपुर कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक में गिरदावरी को लेकर जिला प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल और प्रभारी सचिव आनंद कुमार को अधिकारियों ने अवगत कराया.

उन्होने बताया कि ऑनलाइन गिरदावरी के समय एप में दिखाया जाता है कि आप खसरा सीमा में नही हैं. खसरा सीमा में गिरदावरी करें. गिरदावरी करते समय गांव का नक्शा शो नहीं हो रहा है. वहीं, मौके पर अतिवृष्टि और खेतों में जलभराव के कारण भी गिरदावरी अटकी हुई है.

जयपुर जिला प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल ने इसको लेकर चिंता जताई है और राजस्व विभाग को भी अवगत कराया गया है, जिससे जल्द से जल्द गिरदावरी हो सके और किसानों को खराब फसलों का मुआवजा मिल सकें. उन्होने जर्जर भवनों के गिरने से होने वाले हादसों को लेकर कहा कि नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज के आयुक्तों ने अपने-अपने क्षेत्रों में भवन मालिकों को नोटिस दिए हैं. कुछ मकानों को गिराया भी गया हैं लेकिन कुछ जगह किराएदार और मकान मालिकों के बीच विवाद के चलते मामला कोर्ट में चल रहा है.

बारिश के समय नगर निगम जयपुर हेरिटेज, नगर निगम जयपुर ग्रेटर, जयपुर विकास प्राधिकरण, नागरिक सुरक्षा और एसडीआरएफ जैसी सभी इकाइयों को समन्वित कर प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई की और मिशन मोड में प्रभावितों तक राहत पहुंचाने का काम किया है. बारिश से हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क हैं. किसानों को मुआवजा समय पर मिले, लोगों की जान-माल की सुरक्षा हो और प्रभावितों तक राहत तेजी से पहुंचे, यही प्राथमिकता है.

जयपुर कलेक्ट्रेट सभागार में जिला प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल और प्रभारी सचिव आनंद कुमार ने अतिवृष्टि से हुए नुकसान, फसल खराबा, फसल बीमा योजना की वस्तुस्थिति, खाद आदि की उपलब्धता आदि के संबंध में जानकारी ली. बैठक में बताया की आकाशीय बिजली गिरने, मकान गिरने से जयपुर जिले में 8 लोगों की मौत हो चुकी हैं और आठ लोग घायल हुए हैं.

पशुपालन विभाग से पशु टीकाकरण, चारे-पानी और दवाओं की उपलब्धता, पशु हानि आदि के बारे में जानकारी ली. विद्युत निगम के अधिकारियों से बारिश के दौरान विद्युत तंत्र को हुए नुकसान और रिस्टोरेशन का अपडेट लिया.

वहीं, क्षतिग्रस्त सड़कों और टूटे मकानों इत्यादि के बारे में जानकारी ली. अधिकारियों को आमजन की हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए. उन्होने कहा कि अतिवृष्टि से हुए नुकसान का सर्वे करके जल्द भिजवाएं. बारिश के दौरान मौसमी बीमारियों के बढ़ने की आशंका रहती हैं इसलिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पूर्ण सतर्कता बरतें. दवाओं सहित अन्य सभी चिकित्सा सुविधाओं की माकूल व्यवस्था रखें.

उन्होंने कहा कि गांव चलो अभियान 18 सितंबर से शुरू हो रहा है. शहर चलो अभियान 15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक और 2 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक सहकारिता सदस्यता अभियान शुरू होगा. ऐसे में अभियान की समुचित तैयारियां करने के निर्देश दिए. बैठक में कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, पुलिस अधीक्षक जयपुर ग्रामीण राशि डोगरा, नगर निगम ग्रेटर आयुक्त डॉक्टर गौरव सैनी, आयुक्त डॉक्टर निधि पटेल सहित सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे.
बहरहाल, लगातार बारिश ने जहां सडकों लेकर खेतों को डुबो दिया है. वहीं, अब असली चुनौती मुआवजे और राहत की रफ्तार है. खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, ऑनलाइन गिरदावरी अटकी हुई हैं और किसानों की उम्मीदें सरकारी राहत पर टिकी हैं. ऐसे में सवाल यही है कि कितनी जल्दी मुआवजा किसानों तक पहुंच पाएगा? बारिश थमने के इंतजार में गांव-गांव नजरें अब प्रशासन की तत्परता पर टिकी हैं.

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