छोटीकाशी बनेगी वृंदावन! आधी रात को होगी कान्हा जी की शाही एंट्री, तैयारियां पूरी

Krishna Janmashtami: जन्माष्टमी पर छोटीकाशी जयपुर में भगवान कृष्ण का शाही स्वागत तैयार है. रात 12 बजे गोविंददेवजी मंदिर में 897 किलो दूध, दही, घी, बूरा और शहद से ठाकुरश्रीजी का अभिषेक किया जाएगा. हवाई गर्जना और आतिशबाजी के बीच कान्हा प्रकट होंगे.

छोटीकाशी बनेगी वृंदावन! आधी रात को होगी कान्हा जी की शाही एंट्री, तैयारियां पूरी
Image Credit: Krishna JanmashtamiSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Rajasthan News: जयपुर की गलियों में महक रहा है प्रेम और भक्ति का रंग. वृंदावन-मथुरा की तर्ज पर कान्हा के स्वागत के लिए 'छोटी काशी' पूरी तरह सज-धज कर तैयार है. जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में हवाई गर्जनाओं और आतिशबाजी के बीच कान्हा प्रकट होंगे और पूरे शहर में उल्लास की लहर दौड़ जाएगी. भक्तों के घर-घर में बाल गोपाल के स्वागत की धूम मचेगी, भजन-कीर्तन और बधाईगान से वातावरण आध्यात्मिक आनंद से सराबोर होगा. शहर के प्रमुख कृष्ण मंदिर आराध्य गोविंददेवजी मंदिर, जगतपुरा कृष्ण बलराम मंदिर, मानसरोवर इस्कॉन मंदिर और अक्षरधाम मंदिर सहित अनेक मंदिरों में इस अवसर पर विशेष श्रृंगार और अभिषेक किया जाएगा.

छोटी काशी की गलियों में जन्माष्टमी उत्सव का रंग पूरी तरह से छाया है. वृंदावन-मथुरा की तर्ज पर राजधानी के मंदिरों ने कान्हा का स्वागत करने की पूरी तैयारी कर ली है. मध्यरात्रि में हवाई गर्जनाओं के बीच कान्हा प्रगटने के साथ ही समूचे शहर में उल्लास छाएगा. कृष्ण भजनों की स्वर लहरियों के बीच ठीक बारह बजे शंख और घंटे-घड़ियाल बजाकर श्रीकृष्ण का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा. ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल...’ के जयकारों के साथ श्रद्धालु कान्हा के प्रकट होने का उत्सव मनाएंगे. जन्माष्टमी विशेष छह शुभ योगों—वृद्धि, ध्रुव, श्रीवत्स, गजलक्ष्मी, ध्वांक्ष और बुधादित्य—के संयोग में मनाई जाएगी, जो धन, सुख, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक हैं.

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आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में ठाकुरजी पूरे 13 घंटे अपने भक्तों को दर्शन देंगे. मंगला झांकी से ही दर्शन व्यवस्था शुरू हो जाएगी. ठाकुर जी का मंगला झांकी पूर्व पंचामृत अभिषेक किया जाएगा. ठाकुरजी को नवीन रेशमी पीताबंरी पोशाक धारण कराई जाएगी. इसे तैयार करने में एक माह का समय लगा है. राजस्थानी जरी-गोटा से पोशाक को शाही स्वरूप दिया गया है. मंदिर के अधीन तेरह अन्य मंदिरों के विग्रहों के लिए भी नई पोशाक तैयार करवाई गई है. रात 12 बजे 31 तोपों की हवाई गर्जना और आतिशबाजी के साथ कृष्ण जन्म का शंखनाद होगा. रात्रि 12 बजे गोविंद अभिषेक दर्शन खुलेंगे. शालिग्राम पूजन एवं पांच द्रव्यों के पूजन के बाद 897 किलो सामग्री, जिसमें 425 लीटर दूध, 365 किलो दही, 11 किलो घी, 85 किलो बूरा और 11 किलो शहद से ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक किया जाएगा, जबकि विशेष भोग में पंजीरी लड्डू, खिरसा और रबड़ी कुल्लड़ अर्पित होंगे. गोविंददेवजी मंदिर में 3000 कार्यकर्ता, 150 स्काउट भी इस व्यवस्था में रहेंगे. तीन अलग-अलग लाइनों से यानी की पास धारक, आमजन (बिना जूता-चप्पल) और आमजन (जूता-चप्पल वाले) भक्तों को प्रवेश मिलेगा. जलेबी चौक से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का निकास जय निवास बाग पूर्वी गेट से होगा. ब्रह्मपुरी, कंवर नगर की ओर से आने वाले श्रद्धालु चिंताहरण हनुमान मंदिर होते हुए ठाकुर जी के दर्शन करेंगे और जय निवास बाग पश्चिम द्वार से उनका निकास होगा.

जयपुर के अन्य कृष्ण मंदिरों में भी जन्माष्टमी उत्सव का भव्य आयोजन होगा. चौड़ा रास्ता स्थित राधा दामोदर मंदिर में सोमवार दोपहर 12 बजे कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा. महंत मलय गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में भगवान राधा दामोदर ढाई साल के बाल स्वरूप में विराजित हैं. जयपुर की यह वर्षों पुरानी परंपरा वृंदावन से चली आ रही है. रामगंज बाजार स्थित लाड़ली जी मंदिर और नाहरगढ़ पहाड़ी स्थित चरण मंदिर में भी दोपहर बारह बजे ही जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मानसरोवर धोलाई स्थित इस्कॉन गिरधारी दाऊजी मंदिर में देसी के साथ विदेशी फूलों से भगवान का श्रृंगार किया जाएगा. मंदिर अध्यक्ष पंचरत्न दास ने बताया कि 2500 युवा सेवाएं देंगे. सुबह 4:30 बजे मंगला आरती से दर्शन होंगे. भगवान को 1008 तरह के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा. मंदिर के भक्त भगवान के लिए तैयार केक का भोग लगाएंगे. जगतपुरा कृष्ण बलराम मंदिर में सुबह 4.30 बजे से दर्शनों की शुरुआत होगी. 108 कलशों एवं पंचामृत से महाअभिषेक होगा. पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथ मंदिर में महंत सिद्धार्थ गोस्वामी के सान्निध्य में जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाएगा. वैशाली नगर स्थित अक्षरधाम मंदिर में विशेष झांकी के साथ भगवान का शृंगार किया जाएगा.

बहरहाल, जयपुर शहर भगवान कृष्ण के स्वागत के लिए पूरी तरह सज-धज गया है. घर-घर और मंदिरों में भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक आनंद की लहरें उमड़ रही हैं. मध्यरात्रि के हवाई गर्जनाओं और आतिशबाजी के बीच भक्तों का उत्साह चरम पर होगा. जन्माष्टमी का यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि जन-जन को प्रेम, एकता और सुख-समृद्धि का संदेश भी देता है. श्रीकृष्ण के प्रकट होने की खुशी में शहरवासियों का मन उल्लास और श्रद्धा से भर जाएगा.

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Pratiksha Maurya

Pratiksha Maurya

मैं प्रतीक्षा मौर्या जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज पर पकड़ रखती हूं . मुझे डिजिटल मीडिया का 2 साल से ज्यादा का अनुभव है. इससे पहले मैं जी बिहार में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं.
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