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Rajasthan News: जयपुर के महिला सदन में आज ऐसी शादी हुई, जिसमें सीएम भजनलाल शर्मा पिता के रूप में आशीर्वाद देने पहुंचे, तो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मंत्री अविनाश गहलोत भाई के रूप में सीएम ने कन्यादान किया तो माहौल भावुक हो उठा. ये वो युवतियां थीं, जिनका वास्ता जन्म के साथ ही मुश्किलों के दौर से शुरू हुआ, पर आज उनकी शादी के मौके पर खुशियां हर तरफ महसूस की जा रही थी.
हर तरफ खुशी का माहौल, स्टेज पर हंसते मुस्कुराते नाचते गाते दुल्हा दुल्हन सालों बाद महिला सदन में बेटियों की विदाई का मौका आया. ग्यारह बेटियां आज दुल्हन बनकर नई जिंदगी शुरू करने जा रही थीं, तमाम रस्में निभाईं गईं. मेहंदी, हल्दी की रस्मों के साथ महिला संगीत भी हुआ. शहनाइयां भी गूंजी और जब बारात लेकर दुल्हें पहुंचे, तो आशीर्वाद देने प्रदेश के मुखिया भजनलाल शर्मा ने विवाह समारोह में पहुंचकर इस खुशी को चौगुना कर दिया. सीएम ने अपने हाथों से महिला सदन की बेटियों का कन्यादान किया. वर-वधुओं को आशीर्वाद देकर उनके सुखद दांपत्य जीवन की कामना की.
जब इन युवतियों का जन्म कन्या के रूप में हुआ, तो न जाने कितने झंझावातों से इनका सामना हुआ होगा, पर आज ये खुश हैं कि उन्हें ईश्वर ने सौभाग्यवती होने का गौरव दिलाया. इनमें से अधिकांश को पता ही नहीं था कि वो कहां जन्मीं, माता पिता कौन थे, कैसे वो शिशु बाल गृह के पालने तक पहुंची. सरकार के पालना गृहों में बेहतरीन परवरिश और पढ़ाई लिखाई ने इनकी जिंदगी ही बदल दी. इसलिए कल की कन्या आज की काबिल नारी बन चुकी थी. महिला सदन उनके बाबुल का घर था, जहां काबिल दूल्हों की महीनों तलाश की गई. ग्यारह बेटियों की शादी के लिए जब इश्तिहार निकला तो उन्नीसो युवाओं ने शादी के लिए आवेदन किया. गहन जांच पड़ताल, घर गृहस्थी, आर्थिक हालात और सामाजिक संस्कारों की खोज खबर लेने के बाद ये ग्यारह युवक इन बेटियों की पसंद बनने में कामयाब रहे. आज उनके जब पीले हाथ हुए तो यहां मौजूद हर चेहरे पर मुस्कान पर थी. हर कोई उन्हें अपनी बहन तो कोई बेटी मानकर विदाई दे रहा था और उनके सुखद गृहस्थ जीवन की परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना कर रहा था.
विवाह समारोह में अपने घर की बहन बेटी मान कई संस्थाओं की ओर से उन्हें तोहफे दिए गए तो लगा जैसे उनकी झोली खुशियों से भर गई है और साक्षात भगवान धरती पर उन्हें आशीर्वाद देने आए हैं, पर शादी के तमाम दस्तूर और खुशियों के बीच हर किसी के ज़हन में एक ही सवाल गूंज रहा था. आखिर इनका कसूर क्या था जो इनके परिवार ने इनसे मुंह मोड़ लिया. शायद वो कितने बदकिस्मत लोग थे जो इन बेटियों का प्यार पाने से महरूम रह गए.
रिपोर्टर- बाबूलाल धायल
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