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Jaipur News: भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (बीयूवीएम) का 44वां स्थापना दिवस समारोह नई दिल्ली स्थित आकाशवाणी भवन के रंग भवन ऑडिटोरियम में भव्य रूप से आयोजित किया गया. इस मौके पर देशभर के व्यापारियों और उद्यमियों ने भाग लिया और व्यापारिक हितों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की गई.
कार्यक्रम में केंद्रीय कानून राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल, केंद्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा, सांसद विजय बघेल, रमेश अवस्थी, साधना सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे. मुख्य अतिथि अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि केंद्र सरकार व्यापारियों और उद्यमियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनके मुद्दों के समाधान हेतु हरसंभव प्रयास कर रही है.
जीएसटी में सुधार की मांग
बीयूवीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि वर्तमान जीएसटी की बहु-स्तरीय दर प्रणाली व्यापारियों के लिए जटिल और बोझिल है. मंडल ने सरकार को सुझाव दिया है कि जीएसटी को तीन स्लैब (0%, 5% और 18%) में समाहित किया जाए. उन्होंने मांग की कि सभी खाद्य उत्पादों को बिना वजन या पैकेजिंग के आधार पर भेद किए 0% कर स्लैब में रखा जाए.
अनाज, दालें, तिलहन की सफाई मशीनें, LED लैंप, सबमर्सिबल पंप, स्टील, ₹1000 तक के खिलौने, खाद्य तेल, बेकरी उत्पाद, सोलर वॉटर हीटर, अचार व घी, सहित कुछ उत्पादों को 5% स्लैब में लाया जाए. अन्य सभी उत्पादों को 18% कर स्लैब में समाहित किया जाए.
राज्य मंडी शुल्क और अनुपालन बोझ पर चिंता
मंडी शुल्क, जो राज्यों में 0% से 4% के बीच भिन्न-भिन्न है, को एक समान करने की मांग की गई. मंडल ने TDS और TCS जैसे प्रावधानों को हटाने की अपील की, क्योंकि ये छोटे व्यापारियों पर अनुपालन का अनावश्यक बोझ डालते हैं.
व्यापारी समुदाय की भूमिका को सराहा
राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि व्यापारी वर्ग ने भारत को विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि जीएसटी प्रणाली पुरानी कर प्रणाली की तुलना में बेहतर है और व्यापारिक समुदाय की समस्याओं को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तक पहुंचाया जाएगा.
रेवड़ी संस्कृति पर उठी आपत्ति
राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतीश अग्रवाल ने रेवड़ी संस्कृति (लोकलुभावन योजनाओं) पर चिंता जताई और कहा कि इससे करदाताओं पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बढ़ता है.
कार्यक्रम की विशेषताएं
28 राज्यों से व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों की भागीदारी
व्यापारियों की समस्याओं और सुझावों पर विस्तृत चर्चा
व्यापार के सरलीकरण, टैक्स स्लैब में बदलाव, और अनुपालन कानूनों की समीक्षा की मांग
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