राजस्थान में मोबाइल वेटरनरी यूनिट योजना में भ्रष्टाचार उजागर

Jaipur News: राजस्थान में पशुओं को घर तक उपचार पहुंचाने को लेकर शुरू की गई मोबाइल वेटरनरी योजना के संचालन में जुड़े कार्मिक बुरी तरह पीड़ित हैं. पशुपालन विभाग ने इस योजना को पशुपालकों के हित में शुरू किया था.

राजस्थान में मोबाइल वेटरनरी यूनिट योजना में भ्रष्टाचार उजागर
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Jaipur News: राजस्थान में पशुओं को घर तक उपचार पहुंचाने को लेकर शुरू की गई मोबाइल वेटरनरी योजना के संचालन में जुड़े कार्मिक बुरी तरह पीड़ित हैं. पशुपालन विभाग ने इस योजना को पशुपालकों के हित में शुरू किया था. दावा था कि इससे प्रदेश के पशु चिकित्सक व पशुधन सहायकों को भी रोजगार मिलेगा, लेकिन एमवीयू संचालन में जुड़े ये कार्मिक भी कंपनियों द्वारा बुरी तरह पीड़ित हैं.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पशुपालकों के हित के लिए जो मोबाइल वेटरनरी यूनिट योजना शुरू की थी, वह योजना अब अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह सपना आम पशुपालकों के हित के लिए देखा था.

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साथ ही मुख्यमंत्री का विचार था कि इन मोबाइल वेटरनरी यूनिट के जरिए प्रदेश के युवाओं को रोजगार भी मिल सकेगा. चूंकि एक यूनिट में 3 कार्मिकों को नियुक्त किया जाता है, ऐसे 536 मोबाइल वेटरनरी यूनिट के जरिए प्रदेश के करीब 1600 युवाओं को रोजगार मिलने की बात कही जा रही थी.

लेकिन मोबाइल वेटरनरी यूनिट का संचालन करने वाली कम्पनियों की मनमर्जी इस कदर है कि इन यूनिटों का संचालन करने वाले कार्मिक बुरी तरह प्रताड़ित हो रहे हैं. पशुपालन विभाग को रोजाना इस बारे में शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें पशु चिकित्सकों या पशुधन सहायकों को वेतन नहीं दिए जाने, हड़ताल करने पर वेतन काटने और पैनल्टी की राशि जमा कराने के लिए कहा जा रहा है.

ऐसा नहीं है कि कम्पनियों द्वारा वेतन कम देने की शिकायतें अब शुरू हुई हों, पिछले साल फरवरी में सीएम भजनलाल शर्मा द्वारा लॉन्चिंग किए जाने के बाद से ही यह शिकायतें शुरू हो गई थी, जिनका अब तक समाधान नहीं निकल सका है.

MVU कम्पनियों द्वारा शुरू से ही कार्मिकों को पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा. 10 जून 2024 को तत्कालीन पशुपालन निदेशक डॉ. भवानी सिंह ने पत्र लिखा था. मैसर्स CAMP और मैसर्स मॉडर्न MVU कम्पनियों को पत्र लिखा था. लिखा कि दोनों कम्पनियों द्वारा कार्मिकों को पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा. पशु चिकित्सक को निर्धारित 56100 के बजाय 44800 रुपए दे रहे.

पशुधन सहायक को 20 हजार के बजाय 13500 रुपए दिए जा रहे. जबकि ड्राइवर को 18 हजार के बजाय मात्र 11500 रुपए दिए जा रहे. एमवीयू कम्पनियों से कार्मिकों दिए जा रहे वेतन की जानकारी मांगी. 8 अगस्त 2024 को निदेशक ने श्रम विभाग को भी इस बारे में पत्र लिखा. पूछा कि कार्मिकों के वेतन से इतनी कटौती किस आधार पर की जा रही.

डॉ. भवानी सिंह ने 8 अगस्त को NHM निदेशक को भी इस बारे में पूछा. जवाब नहीं मिलने पर डॉ. भवानी सिंह ने 17 अक्टूबर 2024 को पुन: लिखा. NHM निदेशक और श्रम विभाग को पत्र लिखकर फिर से जानकारी मांगी. 25 अक्टूबर 2024 को पशुपालन निदेशक ने जो पत्र लिखा. उसमें कहा, कम्पनियां 20 फीसदी राशि रिलीवर कॉस्ट में काट रहीं. पशु चिकित्सकों को सीएल, पीएल आदि अवकाश भी कम्पनी नहीं दे रही.

मौजूदा स्थिति यह है कि प्रदेशभर में कई जगहों से कर्मचारियों के वेतन काटे जाने की शिकायतें आ रही हैं. 20 फीसदी कटौती रिलीवर लगाने के नाम पर की जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि रिलीवर तो दूर कई यूनिटों का संचालन तो बगैर पशु चिकित्सक किए जाने की भी शिकायतें मिलती रही हैं.

मोबाइल वेटरनरी यूनिट कम्पनियों द्वारा कई जिलों में कर्मचारियों को अप्रैल से जुलाई तक का वेतन नहीं दिया गया है. वहीं कई जिलों में कर्मचारियों काे वेतन काटने के अलावा नौकरी से भी निकाला जा रहा है. कम्पनियों द्वारा पशु चिकित्सकों व अन्य स्टाफ से आवेदन लिखवाया जा रहा. MVU के ऑफ रोड रहने की अवधि का वेतन काटने का आवेदन. दरअसल वेतन मिलने में देरी से कई जिलों में आंशिक हड़ताल हुई थी.

उदयपुर में 5 से 16 जुलाई के बीच ज्यादातर MVU ऑफ रोड रही थी. इसी तरह अलग-अलग जिलों में 3 दिन से लेकर 10 दिन तक हड़ताल. अब कम्पनियों द्वारा VO व अन्य कार्मिकों से लिखवाया जा रहा है कि ऑफ रोड अवधि की कटौती उनके वेतन में से की जाए. इसके लिए कार्मिकों से सहमति पत्र लिया जा रहा. जो पैनल्टी कम्पनियों पर लगेगी, उसकी कटौती भी कार्मिकों के वेतन से होगी. मैसर्स मॉडर्न एमवीयू और मैसर्स CAMP कम्पनियों पर आरोप लग रहे.

27 फरवरी 2025 को पशुपालन उप सचिव ने मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मांगे गए एक स्पष्टीकरण के जवाब में लिखा था कि एमवीयू कम्पनियों द्वारा कार्मिकों का वेतन समय पर नहीं देने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं. कर्मचारियों को मानदेय नहीं देने, सैलेरी स्लिप नहीं देने, 2 माह से वेतन बकाया होने, सैलरी की मांग करने पर नौकरी से निकालने की धमकी देने, अवकाश नहीं देने और आधा-अधूरा वेतन भी समय पर नहीं देने की शिकायतें खुद पशुपालन उप सचिव ने स्वीकार की थी. रोचक बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें होने के बावजूद भी अभी तक पशुपालन विभाग ने एक भी मोबाइल वेटरनरी यूनिट कम्पनी का अनुबंध निरस्त करना तो दूर, जुर्माना लगाने तक की कार्रवाई नहीं की है.

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Aman Singh

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अमन सिंह को डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव है और वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. वे राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं और उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अच्छे तरीके से प्रस्तुत करने में सक्षम हैं. करीब 3 साल के डिजिटल मीडिया अनुभव के साथ अमन ने न्यूज़ प्रोडक्शन, कंटेंट क्रिएशन और स्टोरीटेलिंग में अपनी मजबूत पहचान बनाई है. जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
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