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Jaipur News: जयपुर में राजस्थान की खाद्य सुरक्षा योजना, जो गरीबों को दो वक्त की रोटी देने के लिए बनाई गई थी, अब बड़े घपले का शिकार हो गई है. एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कंपनियों के निदेशक, लाखों का कारोबार करने वाले और सालाना लाखों कमाने वाले लोग भी इस योजना का गलत तरीके से फायदा उठा रहे थे.
लखपति गरीबों ने छीना गरीबों का हक
केंद्र सरकार की एक डेटा एनालिसिस रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में लाखों ऐसे लोग हैं जो आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद खाद्य सुरक्षा योजना के तहत सस्ता गेहूं ले रहे हैं. इन अपात्र लाभार्थियों में शामिल हैं:
इन आंकड़ों से साफ है कि जिनकी थाली पहले से ही भरी थी, उन्होंने जरूरतमंदों के हिस्से का अनाज भी हड़प लिया.
अपात्रों के नाम होंगे सार्वजनिक
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि इन अपात्रों के नाम जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे. कलेक्ट्रेट, रसद कार्यालयों और पंचायत समितियों में इनकी सूची लगाई जाएगी ताकि समाज को पता चले कि कौन गरीब का हक छीन रहा है. इससे उन पर सामाजिक दबाव भी बनेगा. मंत्री ने चेतावनी दी है कि 31 अक्टूबर तक जो लोग स्वेच्छा से अपना नाम नहीं हटाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रवर्तन अधिकारी घर-घर जाकर जांच करेंगे और राशन की दुकानों के हिसाब से अपात्रों की लिस्ट बनाकर उन्हें योजना से बाहर करेंगे.
अब तक 30 लाख अपात्र हटाए गए
राज्य सरकार के 'गिवअप अभियान' के तहत अब तक 30 लाख से ज्यादा अपात्र लाभार्थियों को योजना से हटाया जा चुका है, जिसमें 27 लाख से ज्यादा नाम सिर्फ केवाईसी नहीं कराने के कारण हटे हैं. केंद्र सरकार ने भी राजस्थान के इस अभियान की तारीफ की है.
| जिला | कंपनी निदेशक वाहन | वाहन | छह लाख से ज्यादा आय | 25 लाख से अधिक टर्न ओवर |
| जयपुर | 1,800 | 13,782 | 14,540 | 304 |
| चूरू | 419 | 4,832 | 4,475 | 70 |
| दौसा | 432 | 2,135 | 2,428 | 71 |
| डीडवाना-कुचामन | 444 | 6,102 | 4,750 | 71 |
| गंगानगर | 293 | 10,207 | 3,064 | 29 |
| कोटा | 330 | 3520 | 2,554 | 30 |
| उदयपुर | 428 | 2,521 | 6,619 | 87 |
| जोधपुर | 448 | 10610 | 8,664 | 143 |
| बीकानेर | 269 | 7,217 | 4,1316 | 68 |
| नागौर | 276 | 6319 | 5,176 | 58 |
| पाली | 288 | 4287 | 7,976 | 165 |
| सवाईमाधोपुर | 223 | 1,536 | 1,758 | 25 |
| भीलवाड़ा | 539 | 4,141 | 9,091 | 80 |
| अजमेर | 494 | 3645 | 518 | 46 |
| अलवर | 442 | 2872 | 880 | 48 |
| भरतपुर | 259 | 2,448 | 1,696 | 23 |
| चित्तौड़गढ़ | 302 | 2,488 | 2,987 | 21 |
| हनुमानगढ़ | 235 | 6,765 | 1,827 | 40 |
| झुंझुनूं | 656 | 5303 | 5,261 | 76 |
| खैरथल-तिजारा | 245 | 1769 | 1,896 | 26 |
| कोटपूतली-बहरोड | 595 | 3106 | 4,703 | 75 |
| सीकर | 867 | 4,925 | 9,415 | 112 |
| सिरोही | 218 | 1,413 | 4,508 | 92 |
| टोंक | 290 | 2,760 | 2,202 | 30 |
यह अभियान सिर्फ संख्या कम करने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया है कि योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचे, जो सच में इसके हकदार हैं.
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