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Jaipur News: राजस्थान में हब एंड स्पोक मॉडल के खिलाफ लैब टेक्नीशियनों ने प्रदेशभर में तीव्र विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें सरकारी जांचों को निजी हाथों में सौंपने के निर्णय पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया. टेक्नीशियनों ने जिला कलेक्टरों के माध्यम से मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें उठाईं और डेढ़ साल से संवर्ग की मांगों की अनदेखी पर रोष जताया. उनका कहना है कि राजस्थान की निशुल्क जांच योजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है, लेकिन हब एंड स्पोक मॉडल से सरकारी ढांचे का भविष्य खतरे में पड़ सकता है.
टेक्नीशियनों का आरोप है कि सरकार के पास जांच के लिए पूरी मशीनरी मौजूद होने के बावजूद जांचें निजी हाथों में दी जा रही हैं, जबकि PHC और CHC से जिला स्तर तक सैंपल ट्रांसपोर्ट ही समाधान हो सकता है. इसके अलावा, अनुमोदित पदनाम परिवर्तन की पत्रावली एक साल से विभाग में लंबित है और 2008 का पुराना स्टाफिंग पैटर्न अभी तक लागू है, जिसमें ग्रेड पे में भी कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. पड़ोसी राज्यों की तुलना में राजस्थान के लैब टेक्नीशियनों को कम वेतनमान मिल रहा है. लैब टेक्नीशियन संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिन में उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करेंगे.
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जांच सेवाओं को हब एंड स्पोक मॉडल के तहत निजी हाथों में सौंपे जाने के फैसले के खिलाफ प्रदेशभर के लैब टेक्नीशियनों ने मोर्चा खोल दिया है. संवर्ग से जुड़ी मांगों और डेढ़ साल से चली आ रही अनदेखी के विरोध में सोमवार को सभी जिलों से लैब टेक्नीशियनों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री को ज्ञापन सौंपा.
राजस्थान लैब टेक्नीशियन संघ के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश की निशुल्क जांच योजना को देश-विदेश में पहचान दिलाने वाले सरकारी लैब टेक्नीशियनों के भविष्य पर सरकार का यह निर्णय कुठाराघात है. उन्होंने कहा कि जिन जांचों को निजी हाथों में दिया जा रहा है, उनके लिए सरकार के पास पहले से संसाधन मौजूद हैं. जरूरत केवल जांच सैंपल की PHC, CHC से जिला स्तर तक ट्रांसपोर्टेशन की है. संघ के महामंत्री तरुण सैनी और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि हब एंड स्पोक मॉडल अन्य राज्यों में विफल साबित हुआ है. इसके जरिए बेरोजगार अभ्यर्थियों को ठेका प्रथा में धकेला जा रहा है और नियमित नियुक्तियों की संभावनाएं खत्म हो रही हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि विभागीय पदोन्नतियां रुकी हुई हैं, 2022 के डिफर कर्मियों का पदस्थापन 9 माह से लंबित है और गजट नोटिफिकेशन विभाग द्वारा रोक रखा गया है. साथ ही ग्रेड पे और स्टाफिंग पैटर्न में कोई बदलाव नहीं किया गया. संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों में कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन उग्र किया जाएगा.
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