Jaipur news: नगर निगम हैरिटेज-17 माह बाद FIR की फाइल दौड़ी, निलंबित मेयर मुनेश और पार्षदों की बढ़ी मुश्किल

Jaipur news: जयपुर नगर निगम हेरिटेज में निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर, डिप्टी मेयर असलम फारूकी, पार्षदो सहित 15 लोगों के खिलाफ जून 2023 में माणक चौक थाने में दर्ज एफआईआर पर जांच आगे बढ़ाने के साथ मुश्किलें भी तेजी से बढ़ गई है.

Jaipur news: नगर निगम हैरिटेज-17 माह बाद FIR की फाइल दौड़ी, निलंबित मेयर मुनेश और पार्षदों की बढ़ी मुश्किल

Jaipur news: जयपुर नगर निगम हेरिटेज में निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर, डिप्टी मेयर असलम फारूकी, पार्षदो सहित 15 लोगों के खिलाफ जून 2023 में माणक चौक थाने में दर्ज एफआईआर पर जांच आगे बढ़ाने के साथ मुश्किलें भी तेजी से बढ़ गई है. नगर निगम के पूर्व एडिशनल कमिश्नर राजेंद्र कुमार वर्मा से बदसलूकी को लेकर माणक चौक एसीपी ने तीन पार्षदों को नोटिस थमा कर 13 नवम्बर को अनुसंधान के लिए बुलाया है. पूर्व अतिरिक्त आयुक्त वर्मा ने माणक चौक थाने में पूर्व मेयर, उनके पति और पार्षदों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. इसमें एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं.

करीब 17 महीने पहले यानी कि जून 2023 में नगर निगम हेरिटेज मुख्यालय में पूर्व मेयर मुनेश गुर्जर, पार्षदों और पूर्व अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र कुमार वर्मा के बीच हुए विवाद के बाद दर्ज एफआईआर पर माणक चौक थाना एसीपी ने जांच को आगे बढाते हुए अनुसंधान के लिए तीन पार्षद उम्रदराज, नीरज अग्रवाल और फरीद कुरैशी 13 नवंबर को नोटिस देकर बुलाया है. जांच आगे बढ़ने के साथ ही निलंबित महापौर मुनेश, डिप्टी मेयर असलम फारुखी सहित पार्षदों की मुश्किलें भी बढ़ गई है.

इस प्रकरण में पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर रखा है. 28 जून 2023 को माणक चौक थाना पुलिस में पूर्व एडिशनल कमिश्नर राजेंद्र कुमार वर्मा (वर्तमान में आईएएस) ने पूर्व मेयर मुनेश गुर्जर, उनके पति सुशील गुर्जर, उप महापौर असलम फारुखी, पार्षद उमर दराज, नीरज अग्रवाल, शफी कुरैशी, सुनीता मावर, राबिया गुडेज, अंजलि ब्रह्मभट्‌ट, आयशा सिद्दकी, फरीद कुरैशी, पार्षद पति मोहम्मद अख्तर,पार्षद पति फूलचंद के अलावा अन्य दो व्यक्ति शाकिर और बसन्त अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी.

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प्रकरण के तहत पूर्व आयुक्त राजेन्द्र वर्मा ने पुलिस में शिकायत दी थी 16 जून को हेरिटेज मुख्यालय मैं राजकीय कार्य कर रहा था. तभी दोपहर 3 बजे मेयर के यहां से मैसेज आया कि मेयर ने चैम्बर में बुलाया है. मैंने 10 मिनट में पहुंचने का मैसेज करवाया. लेकिन 5 मिनट बाद ही कुछ पार्षद और बाहरी प्राइवेट लोग आए और टेंडर की फाइल पर साइन नहीं करने की बात कहते हुए मेरे पर जोर-जोर से चिल्लाने लगे.

करीब 30 की संख्या में ये लोग मुझे मेयर के चैम्बर में ले गए. वहां पर निलंबित चल रही पूर्व मेयर मुनेश गुर्जर ने पार्षदों के सामने अपशब्द कहते हुए पत्रावली करने का दबाव बनाने लगी. इस दौरान इन लोगों ने मुझे रात 9 बजे तक बंधक बनाए रखा और अपशब्द कहकर धमकाने लगे.

जबकि मैंने वास्तविकता की जानकारी मेयर को दे दी थी कि मैं 30 मई को अवकाश पर था, इसलिए फाइल की कार्यवाही विवरण पर मैं हस्ताक्षर नहीं कर सकता. 15 जून को उपासना समिति की बैठक में इस फाइल को कमिश्नर के पास भिजवा दिया है. इसलिए फाइल मेरे पास पेंडिंग नहीं है.

डीएलबी के पूर्व लो डायरेक्टर अशोक सिंह ने बताया कि पुलिस ने पार्षदो को नोटिस देकर जांच को आगे बढ़ाया है. पुलिस अपनी जांच के बाद चालान पेश कर सकती है और राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति ले सकती है. राज्य सरकार अभियोजन स्वीकृति देने के साथ निलंबन करेगी और न्यायिक जांच करवाएगी और यदि न्यायिक जांच में दोषी पाए गए तो बर्खास्त होना तय है.

बहरहाल, जयपुर नगर निगम का विभाजन वैसे तो आम जनता की सहूलियत के लिए किया गया था. उम्मीद थी कि शायद दो नगर निगम होने से शहर में स्वच्छता के साथ में विकास के काम होंगे. लेकिन नगर निगम आपसी लड़ाई की खींचतान, विधायको का दखल ज्यादा होने से विकास दूर-दूर तक नजर नहीं आता है.

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