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Jaipur News: जयपुर में परिवहन विभाग ने 2129 वाहनों पर गलत पंजीयन और थ्री-डिजिट नंबरों के दुरुपयोग के मामले में सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. परिवहन मुख्यालय ने जयपुर आरटीओ प्रथम को इन वाहनों के पंजीयन निलंबन के निर्देश दिए हैं. जांच में सामने आया है कि कई वाहनों का पुनः पंजीयन गलत तरीके से किया गया, जिसमें यजदी जैसे पुराने वाहनों को बैकलॉग में बुलेट के रूप में दर्ज किया गया.
इसके अलावा, कई वाहनों की श्रेणी और कंपनी के नाम भी अनधिकृत रूप से बदले गए. चौंकाने वाली बात यह है कि 439 वाहनों का रिकॉर्ड विभागीय कार्यालय से गायब हो गया है. परिवहन विभाग अब इन अनियमितताओं पर तलवार चलाने के मूड में है और जल्द ही दोषी वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी.
3 अक्षरों वाली पुरानी पंजीयन सीरीज के वीआईपी नम्बरों पर अब तलवार लटक रही है. परिवहन विभाग ऐसे नम्बरों के पंजीयन में गड़बड़ियां मानते हुए इन्हें निलंबित कर सकता है. परिवहन मुख्यालय ने इस मामले में जयपुर आरटीओ प्रथम को निर्देश दिए हैं. क्या है पूरा मामला, कैसे हो सकती है कार्रवाई, यह रिपोर्ट देखिए-
परिवहन विभाग ने 3 अक्षरों वाली पुरानी वाहन पंजीयन सीरीज में कार्रवाई की तैयारी कर ली है. इन वाहनों के पंजीकरण नम्बरों की बैकलॉग एंट्री की जांच पहले ही करवाई जा चुकी है. सभी आरटीओ से परिवहन मुख्यालय ने यह जांच रिपोर्ट जुलाई माह तक प्राप्त कर ली थी. दरअसल परिवहन मुख्यालय ने जयपुर आरटीओ प्रथम को 2129 वाहनों की सूची जांच के लिए दी थी. इसमें से 1855 वाहन जयपुर आरटीओ प्रथम क्षेत्राधिकार में पंजीकृत पाए गए थे. बड़ी बात यह है कि इनमें से 439 वाहनों का आरटीओ कार्यालय में रिकॉर्ड ही बरामद नहीं हुआ. जिन 1369 वाहनों का रिकॉर्ड पाया गया, उनमें से 395 वाहनों में कई तरह की गड़बड़ियां पाई गई थी. कई वाहनों के पंजीकरण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले, जबकि कुछ में गलत बैकलॉग प्रविष्टियां, विवरण परिवर्तन, रिकॉर्ड गुम होना, या जाली कागजों के आधार पर वैधता बढ़ाई गई थी. इसके चलते परिवहन विभाग ने इन्हें संदिग्ध मानते हुए इनके पंजीयन निलंबित करने की तैयारी कर ली है. विभाग की सचिव शुचि त्यागी थ्री डिजिट नम्बरों की गड़बड़ियों पर पहले से सख्ती दिखा रही हैं.
गड़बड़ियां कैसी-कैसी ?
- 151 वाहनों की पंजीकरण तिथि और बैकलॉग में पंजीकरण तिथि अलग-अलग थी
- 128 वाहन ऐसे थे जिनके अंतिम वाहन स्वामी के क्रमांक में अंतर था
- यानी मूल रिकॉर्ड और बैकलॉग में दर्ज वाहन स्वामी क्रमांक में अंतर मिला
- 11 वाहनों के रिकॉर्ड में अंतिम वाहन स्वामी व पंजीयन दिनांक और...
- बैकलॉग में वाहन स्वामी क्रमांक व पंजीयन दिनांक में अंतर पाया गया
- 13 वाहन ऐसे जिनके मूल रिकॉर्ड व बैकलॉग में चैसिस नंबर में अंतर था
- 2 वाहन ऐसे मिले जिनका मूल पंजीयन रिकॉर्ड अनुपलब्ध था
- 2 वाहन पहले ही निरस्त हो चुके थे, फिर भी गलत तरीके से दर्ज पाए गए
- 6 वाहन ऐसे निकले जिनमें गलत या अपूर्ण आरसी अपलोड की गई
- 69 वाहन की बैकलॉग वैधता तिथि वर्तमान तिथि से आगे दर्ज कर दी गई
- 439 वाहनों का मूल रिकॉर्ड गायब कर दिया गया, नष्ट कर दिया गया
जांच रिपोर्ट में परिवहन विभाग को भारी गड़बड़ियों वाले तथ्य मिले हैं. इनमें किसी दुपहिया वाहन की कम्पनी बदल दी गई तो किसी दुपहिया वाहन को चौपहिया श्रेणी में बैकलॉग कर दिया गया. कई वाहनों के रिकॉर्ड मे वाहन मालिक भी बदल दिए गए हैं. इन्हीं गड़बड़ियों के मद्देनजर परिवहन विभाग इन सभी वाहनों का पंजीयन निलंबित करने की कार्रवाई कर सकता है.
यजदी काे बना दिया बुलेट
- कई वाहनों में वाहन की श्रेणी बदली या निर्माता कम्पनी बदली
- वाहन संख्या RPI5724 के मूल रिकॉर्ड में यजदी के रूप में पंजीकृत
- लेकिन वाहन पोर्टल पर जब बैकलॉग किया गया तो बदली कम्पनी
- अब वाहन निर्माता कॉलम में बुलेट 350 सीसी के रूप में इन्द्राज
- इसी तरह वाहन RSB4757 में भी की गई गड़बड़ी
- मूल पंजीयन रिकॉर्ड में वाहन स्वामी क्रम संख्या 1 सुबोध उपाध्याय तक
- जबकि बैकलॉग में इसे वाहन स्वामी क्रमांक 2 पर दर्ज किया गया
- महमूद खान के नाम से बैकलॉग इन्द्राज किया गया
- 7 सरकारी वाहन जो नष्ट हो चुके, उनका भी कर दिया गया बैकलॉग
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