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Jaipur News : राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम जब शहर की सड़कों पर अचानक उतरी, तो सामने सिर्फ गाड़ियां नहीं थीं स्कूल जाने वाले बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी बड़ी लापरवाही थी.
औचक निरीक्षण ने साफ कर दिया कि जिन वाहनों पर अभिभावक भरोसा कर अपने बच्चों को भेजते हैं, वही वाहन उनकी सुरक्षा के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके हैं. स्कूल टाइम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीमों ने ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ अधिकारियों के साथ बड़ा अभियान चलाया.
दो अलग-अलग जोन में की गई इस रेड ने स्कूलों में मौजूद परिवहन व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी.
सुबह शुरू हुए औचक निरीक्षण में मोबाइल मजिस्ट्रेट खुद सड़क पर उतरे और बच्चों को लाने-ले जाने वाले ऑटो, वैन और बसों की एक-एक कमी पकड़ते गए, जांच में सामने आया कि लगभग हर वाहन में किसी न किसी नियम का उल्लंघन हो रहा था.
कई गाड़ियों में फर्स्ट एड किट तक नहीं थी, अधिकांश में जीपीएस नहीं मिला, और एक भी वैन में आपातकालीन निकास की सुविधा नहीं पाई गई. बच्चों को सुरक्षित उतारने-चढ़ाने के लिए अनिवार्य सहायक तक मौजूद नहीं थे.
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कुछ वाहनों में तो पीली स्ट्रिप तक गायब थी. मानसरोवर के एक स्कूल में ड्राइवर के पास लाइसेंस और यूनिफॉर्म दोनों नहीं मिले, ऊपर से वाहन के अहम दस्तावेज भी नदारद, वहीं बनीपार्क क्षेत्र में 15 साल से पुरानी वैन बच्चों को ले जाती हुई मिली, जिसे मौके पर ही सीज कर दिया गया.
दूसरी जगह क्षमता से कहीं अधिक बच्चे भरकर लाई जा रही वैन को भी थाने भिजवाया गया. कई बाल वाहिनियों में 14 से 17 बच्चे तक मिले, जबकि सीमित सीटों की ही अनुमति थी.
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव दीपेंद्र माथुर और पल्लवी शर्मा ने करीब दो घंटे की कार्रवाई में दर्जनों वाहनों की जांच की. जो ड्राइवर फिटनेस, बीमा, परमिट या लाइसेंस नहीं दिखा पाए, उनके चालान तुरंत बनाए गए. निरीक्षण के दौरान अभिभावक भी मौके पर पहुंचे और राहत जताई कि आखिरकार स्कूल वैनों की मनमानी पर किसी ने कार्रवाई शुरू की. अधिकारियों ने साफ संकेत दिया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों में ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
रालसा की ओर से निर्देश जारी हैं कि इस तरह की जांचें साल में कम से कम तीन बार अनिवार्य रूप से होंगी और हर महीने की रिपोर्ट तय तारीख तक भेजनी होगी. आज की कार्यवाही ने यह साफ कर दिया कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब कड़ाई का नया दौर शुरू हो गया है.
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