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Rajasthan News: अब सरकारी दफ्तरों में फाइलों के ढेर और पहचान के लिए काग़ज़ों की झंझट बीते दिनों की बात हो रही है. राजस्थान ने ई-गवर्नेंस की दिशा में एक और बड़ा डिजिटल कदम बढ़ाया है. अब जन आधार कार्ड सिर्फ जेब या फाइल में नहीं, बल्कि सीधे डिजीलॉकर में सुरक्षित रहेगा.
मतलब न कॉपी की टेंशन, न खोने का डर, और न ही सत्यापन की देरी. राज्य सरकार की इस पहल से आमजन को आसान, तेज़ और भरोसेमंद डिजिटल पहचान का लाभ मिलेगा. आख़िर क्या है यह नई सुविधा, कैसे मिलेगा जन आधार डिजीलॉकर पर और क्यों इसे माना जाएगा असली दस्तावेज़ के बराबर. देखिए रिपोर्ट
राजस्थान में ई-गवर्नेंस को और मजबूती देते हुए अब जन आधार कार्ड भारत सरकार के डिजीलॉकर प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध करा दिया गया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप आमजन को सरल, सुलभ और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है.
अब सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए नागरिकों को जन आधार की हार्ड कॉपी साथ रखने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि डिजीलॉकर में उपलब्ध जन आधार दस्तावेज को मूल दस्तावेज के बराबर ही प्रामाणिक माना जाएगा.
आयोजना विभाग के शासन सचिव एवं जन आधार प्राधिकरण के महानिदेशक डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने बताया कि डिजीलॉकर में जन आधार की उपलब्धता से दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया और अधिक आसान हो जाएगी.
किसी भी सेवा के लिए दस्तावेज मांगे जाने पर नागरिक डिजीलॉकर से ही डिजिटल फॉर्मेट में जन आधार साझा कर सकेंगे. इससे कागज रहित शासन की अवधारणा को बल मिलेगा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लगने वाला समय भी कम होगा.
वर्तमान में राजस्थान सरकार की 200 से अधिक योजनाओं और सेवाओं का लाभ जन आधार के माध्यम से ही आमजन को दिया जा रहा है. जन आधार राज्य का एक व्यापक पारिवारिक डेटाबेस है. जिसे व्यक्तिगत पहचान, पते की पहचान और पारिवारिक संबंधों की पहचान के रूप में मान्यता प्राप्त है. जन आधार प्राधिकरण के निदेशक निर्मल कुमार सेठी ने कहा कि डिजीलॉकर, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है.
इसका उद्देश्य नागरिकों को डिजिटल दस्तावेज वॉलेट के माध्यम से कभी भी, कहीं भी प्रामाणिक दस्तावेजों तक पहुंच उपलब्ध कराना है. डिजीलॉकर में जारी किए गए दस्तावेजों को मूल भौतिक दस्तावेजों के समान वैध माना जाता है. डिजीलॉकर प्लेटफॉर्म रियल टाइम वेरिफिकेशन की सुविधा भी प्रदान करता है, जिसके तहत उपयोगकर्ता की सहमति से सरकारी एजेंसियां सीधे जारीकर्ता से दस्तावेजों का सत्यापन कर सकती हैं. बिना नागरिक की अनुमति के किसी भी डिजिटल दस्तावेज का आदान-प्रदान नहीं किया जाता.
बहरहाल,इस पहल के साथ राजस्थान ने ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है. जन आधार का डिजीलॉकर से जुड़ना न केवल आमजन के लिए सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि सरकारी प्रक्रियाओं को भी अधिक पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद बनाएगा. अब पहचान और दस्तावेज़ सत्यापन के लिए कागज़ों के बोझ से मुक्ति मिलेगी और “डिजिटल राजस्थान” की दिशा में राज्य एक नई ऊंचाई पर पहुंचता नजर आएगा.
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