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Rajasthan Election: हाईकोर्ट ने पंचायतों के बाद अब शहरी निकायों में चुनाव तय समय पर नहीं कराने को लेकर नाराजगी जताई हैं. राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि संविधान के अनुसार तुरंत चुनाव की तारीख घोषित कर लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल की जाए. उधर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा का कहना है कि प्रदेश में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका चुनाव जनवरी 2026 से पहले होना संभव नहीं है.
शहरी निकायों के चुनाव को लेकर फिर से घमासान शुरू हो गया है. प्रारंभिक तैयारियों में हो रही देरी को देखते हुए अनुमान है कि निकाय चुनाव इस साल नहीं होंगे. उधर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि संविधान के अनुसार तुरंत चुनाव की तारीख घोषित कर लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल की जाए.
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बयानों के मुताबिक, प्रदेश में नगरीय निकायों के चुनाव इस साल नहीं होंगे. ये चुनाव अगले वर्ष जनवरी में हो सकते हैं. नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने साफ किया है कि चुनाव आयोग और ओबीसी आयोग की प्रक्रिया दिसंबर के पहले सप्ताह तक ही पूरी हो पाएगी. इस प्रक्रिया के बाद भी कम से कम एक माह और चाहिए.
ऐसे में तकनीकी और प्रशासनिक दृष्टि से दिसंबर में चुनाव संभव नहीं है. मंत्री खर्रा ने कहा की सरकार ने अपने स्तर पर सारी तैयारी कर ली है. अब सिर्फ दो काम बचे हैं ओबीसी आयोग शहरी निकायों में आरक्षण के लिए आंकड़े उपलब्ध कराए और राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची तैयार करें. ये काम पूरे होते ही राज्य सरकार 4-5 दिन में आरक्षण की लॉटरी निकाल देगी और आयोग से वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत चुनाव की तारीख तय करने का अनुरोध किया जाएगा.
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने पहले दिसंबर 2025 में 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' कराने का दावा किया था, लेकिन अब उन्होंने जिम्मेदारी आयोगों पर डाल दी. उनका कहना है कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची तैयार करने में और ओबीसी आयोग को आंकड़े जुटाने में समय लग रहा है.
पहले उम्मीद थी कि ये तैयारियां नवंबर के पहले हफ्ते तक पूरी हो जाएंगी, लेकिन अब कहा जा रहा है कि दिसंबर के पहले सप्ताह तक ही यह काम हो पाएगा. इसके बाद भी चुनावी प्रक्रिया में कम से कम 35 दिन लगेंगे. ऐसे में तय है कि अब नगरीय निकाय चुनाव जनवरी 2026 में ही हो पाएंगे.
उधर हाईकोर्ट ने शहरी निकायों में प्रशासक बनाए रखने पर सवाल उठाते हुए तत्काल चुनाव कराने का निर्देश दिया हैं. कोर्ट ने कहा कि असीमित समय तक चुनाव टालना संविधान के खिलाफ है और इससे स्थानीय विकास कार्य प्रभावित होते है.
संविधान के अनुच्छेद 243-यू के तहत शहरी निकायों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं हो सकता और इसे छह माह से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है. इसके बावजूद जनवरी 2025 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी शहरी निकायों के नए नए चुनाव नहीं कराए गए.
कोर्ट ने कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद अधिकारियों को प्रशासक बनाए रखने और याचिकाकर्ताओं को प्रशासक बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. चुनाव में देरी से स्थानीय शासन में रिक्तता पैदा हो रही है, जिससे विकास गतिविधियां व सुविधाएं प्रभावित हो रही है.
मौजूदा निकायों में बोर्ड कार्यकाल की स्थिति
| निकायों की संख्या | कार्यकाल शुरू | कार्यकाल समाप्त |
| 49 | नवम्बर 2019 | नवम्बर 2024 |
| 3 | अक्टूबर 2020 | अक्टूबर 2025 |
| 3 | नवम्बर 2020 | नवम्बर 2025 |
| 50 | दिसंबर 2020 | दिसंबर 2025 |
| 90 | जनवरी 2021 | जनवरी 2026 |
| 1 | फरवरी 2021 | फरवरी 2026 |
बहरहाल, दरअसल राज्य में वर्तमान में 309 नगरीय निकाय हैं. इनमें से 49 निकायों और नवगठित निकायों में पहले से ही प्रशासक कार्य कर रहे हैं. दिसंबर तक 56 और निकायों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा. यानी सरकार को इन पर भी प्रशासक नियुक्त करने होंगे. यदि चुनाव फरवरी तक टलते हैं, तो सभी 196 पुराने निकायों में शहरी सरकारें नहीं बचेंगी और पूरी व्यवस्था प्रशासकों के हाथों में होगी.
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