न पिघलाती है सूरज की तपिश, न जमाती सर्द रातें, किसान दिवस पर जानिए मरुधरा के अन्नदाताओं का संघर्ष

Kisan Diwas 2025: कभी पानी नहीं मिलता, तो कभी इतनी बारिश हो जाती है कि खेत के खेत सैलाब बन जाते हैं.... कभी कीड़ों का हमला तो कभी सूखे की मार, मरुधरा के अन्नदाताओं की आंखों को छलछला जाती है. दिन-रात मेहनत करके जब अन्नदाता खेतों में गेहूं, चावल, बाजरा समेत तमाम फल-सब्जियां उगाते हैं तो कई बार सस्ती बिक्री इनके अरमानों पर पानी फेर जाती है.
 

न पिघलाती है सूरज की तपिश, न जमाती सर्द रातें, किसान दिवस पर जानिए मरुधरा के अन्नदाताओं का संघर्ष
Image Credit: rajasthan farmers

Kisan Diwas 2025: किसान चाहे राजस्थान का हो या फिर किसी भी देश का, उन्हें खेती के लिए तमाम संघर्षों से होकर गुजरना पड़ता है. भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान अपनी संस्कृति, परंपराओं और कठोर भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है. यहां का किसान इन परिस्थितियों के बीच खेती कर न केवल अपने परिवार का पेट पालता है बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा में भी अहम योगदान देता है. रेगिस्तान, कम बारिश, जल संकट और बदलते मौसम के बावजूद राजस्थान के किसान अपनी मेहनत और जज्बे से खेती को जीवित रखे हुए हैं.

हर कदम पर किसान देता है परीक्षा
राजस्थान में खेती आसान काम नहीं है. मरुधरा का बड़ा हिस्सा शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र में आता है, जहां बारिश सीमित होती है. कई इलाकों में बारिश पूरी तरह से मानसून पर निर्भर रहती है. ऐसे में किसान बाजरा, ज्वार, गेहूं, चना, मूंग और सरसों जैसी फसलों की खेती करते हैं, जो कम पानी में भी अच्छी उपज दे सकती हैं. फसल चयन से लेकर बोवाई तक हर कदम पर किसान को सूझ-बूझ से काम लेना पड़ता है.

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प्राकृतिक आपदाएं करती परेशान
यहां के किसानों की सबसे बड़ी ताकत उनकी मेहनत और धैर्य है. सूरज की तपिश हो या सर्द रातें, किसान खेत में लगातार काम करता है. सुबह तड़के उठकर खेतों में जाना, सिंचाई की व्यवस्था करना, फसल की निगरानी करना और कटाई के समय दिन-रात मेहनत करना, यह सब उनके जीवन का हिस्सा है. कई बार प्राकृतिक आपदाएं जैसे सूखा या ओलावृष्टि उनकी पूरी फसल को नुकसान पहुंचा देती हैं, फिर भी वे हिम्मत नहीं हारते.

पानी की बचत के साथ-साथ उत्पादन में भी सुधार हुआ
समय के साथ राजस्थान के किसान आधुनिक तकनीकों को भी अपनाने लगे हैं. ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर सिस्टम और उन्नत बीजों का उपयोग अब कई क्षेत्रों में बढ़ा है. इससे पानी की बचत के साथ-साथ उत्पादन में भी सुधार हुआ है. कुछ किसान जैविक खेती की ओर भी बढ़ रहे हैं, जिससे न केवल मिट्टी की सेहत बेहतर हो रही है, बल्कि उन्हें बेहतर दाम भी मिल रहे हैं.


ये चीजें हैं किसानों का संबल
सरकारी योजनाओं और सहायता का भी किसानों को लाभ मिल रहा है. फसल बीमा, सिंचाई परियोजनाएं और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्थाएं किसानों के लिए संबल बनी हैं हालांकि चुनौतियां अभी भी कम नहीं हुई हैं, लेकिन इन योजनाओं से किसानों को कुछ राहत जरूर मिलती है. आज किसान दिवस पर सोशल मीडिया पर तमाम पोस्ट्स वायरल हो रही हैं.

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Sandhya Yadav

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संध्या यादव एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 8 वर्षों का एक्सपीरिएंस है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. संध्या की मुख्य Expertise राजस्थान की क्षेत्रीय राजनीति, क्राइम, प्रशासनिक फैसलों और हाइपरलोकल खबरों की सटीक एवं इन-डेप्थ कवरेज में है. लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है. आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे एक्स (https://x.com/Journosandhya) और लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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