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Makar Sankranti 2026: पिंकसिटी जयपुर की पतंगबाजी देश ही नहीं पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. मकर संक्रांति पर विदेशी पावणों का डेलीगेशन भी पतंगबाजी करने जयपुर पहुंचता है. मंकर संक्रांति की पतंगबाजी से पूरे जयपुर के हांडीपुरा पतंग बाजार सहीत विभिन्न इलाकों में पतंग-मांझा की खरीददारी करते हुए दुकानों पर देखे जा सकते हैं. बाजार में पिछले साल की तुलना 15 से 20 प्रतिशत पतंग-मांझा की खरीददारी का अनुमान लगा रहे हैं. भगवान को अर्पित करने के लिए पतंग-चरखी और बांदरवाल भी तैयार की गई है.
राजधानी जयपुर में पतंगबाजी का खुमार जयपुर के राजा-महाराजाओं के समय से ही देखा जा रहा है. जयपुर हांडीपुरा में पतंग बाजार भी जयपुर के महाराजा द्वारा बनाया गया था, तब से ही मकर संक्रांति पर जयपुर शहर की छतों पर वो काटा-वो मारा का शोर से गंजयमान हो रहा है. जैसे-जैसे जयपुर शहर में जनसंख्या बढ़ती गई. वैसे-वैसे पतंगबाजी का उत्साह भी छतों पर चढ़कर बोल रहा है.
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मकर संक्रांति 5 दिन पहले से ही बाजार में पतंग-मांझा की खरीददारी बढ़ जाती है. हांडीपुरा पतंग बाजार में जयपुर के आसपास और ग्रामीण क्षेत्रों से लोग व दुकानदार पतंग-मांझा की खरीददारी के लिए पहुंच रहे हैं. जानकारों का मानना है कि इस बार जयपुर में 8 से 10 करोड की पतंग-मांझा का व्यापार का अनुमान लगा रहे हैं.
भगवान को पतंग-चरखी अर्पित करने के लिए लोग खरीददारी कर रहे हैं. बच्चों के लिए रंग-बिरंगी पन्नी की पतंगे आकर्षित बनी हुई हैं. मकर संक्रांति पर घर के मुख्य द्वार के लिए पतंग की बांदरवाल तैयार है. बरेली, कानपुर और लखनऊ की पतंगे और मांझा की मांग बढ़ी है. मांझा में 123 मांझा, मांडा मांझा और 8400 मांझा की मांग ज्यादा है. पतंगों को सुरक्षित ले जाने के लिए इस बार बैग बनाए गए.
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35 साल पहले यूपी के बरेली से जयपुर आया 70 परिवारों के लोग जयपुर में पतंग और मांझा तैयार करने का काम करता था, लेकिन समय के साथ अब कुछ ही परिवार जयपुर में मांझा बनाने का काम कर रहे है. मांझा कारीगर बडे मियां का कहना है कि मांझा तैयार करने के लिए चावल, ईसबगोल और रंग-बिरंगी चाक मिट्टी का मसाला तैयार कर कॉर्टन धागों पर 5 से 7 बार राउंड से तैयार किया जाता है.
इसके लिए परिवार के 4 लोग लगते हैं तब जाकर एक दिन में 12 गट्टों के 2 चरखें तैयार होते हैं, जो बाजार में एक चरखा की किमत एक हजार से 1200 रूपये ही मिलते है. जिससे एक व्यक्ति की 500 रुपये मजदूरी ही बनती है. मांझा करीगर का मानना है कि बढ़ती महंगाई के साथ मांझा तैयार करने में मजदूरी नहीं मिलने से अन्य काम की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसे में बहुत से परिवारों ने मांझा बनाने का काम छोडकर अन्य कामकाज में जुट गए है.
मकर संक्रांति पर जयपुरराइटस में पतंगबाजी का उत्साह छतों पर चढ़कर बोल रहा है. जैसे-जैसे मकर संक्रांति नजदीक आ रही वैसे-वैसे ही लोग हांडीपुरा पतंग बाजार में पतंगों की जमकर खरीददारी कर रहे हैं. मकर संक्रांति पर लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर पतंगबाजी का लुफ्त उठाते हुए वो काटा-वो मारा का शोर से शहर को गुंजयमान करने को तैयारी शुरू कर दी है. मंकर संक्रांति के लिए व्यक्ति 200 से 400 की पतंगों की खरीददारी कर रहा है, तो वहीं मांझा के लिए 123 मांझा, मांडा मांझा और 8400 मांझा के 5 से 10 चरखों की खरीददारी कर रहे हैं.
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