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Kotputli, Jaipur News: जिले में इंसानियत शर्मसार होने के मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोपी ने रविवार को 6 साल की मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया था, जिस पर पुलिस ने जांच कर आरोपी को कोर्ट में पेश किया.
नीमराणा एडिश्नल एसपी सुरेश खींची ने बताया कि रविवार को बहरोड़ कोतवाली थाने पर फोन के जरिये सूचना मिली कि हाईवे पर एक कॉलोनी में 6 साल की मासूम के साथ रेप हुआ है. जिस पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले में जांच शुरू की. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो सारा मामला सामने आ गया. जिस पर आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया. वहीं, घायल बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है. बच्ची के परिजनों के बयान ले लिए गए हैं. कोर्ट में जल्द से जल्द चालान पेश किया जाएगा ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके .
कॉलोनी में फैली दशहत
मासूम बच्ची के साथ ही घटना के बाद कॉलोनी में रहने वाले लोग सहम गए और आरोपी को जल्द से जल्द सजा मिले. इसकी गुहार पुलिस प्रशासन से करने लगे. कॉलोनी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिजन सहमे हुए हैं. कॉलोनी के एक युवक ने बताया की आस-पास बनी हुई दो दर्जन कॉलोनियों में आपराधिक किस्म के लोग भी रहते हैं, जिनका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं होता है, जिनके कारण वो जब कंपनी चले जाते हैं तो हमेशा बच्चों के बारे मे सोचते रहते हैं. हमारी प्रशासन से मांग है कि सभी किरायेदारों का पुलिस सत्यापन करवा कर ही मकान मालिक कमरा किराए पर दें.
किरायेदार रखने से पहले मकान मालिक जरूर बरतें ये सावधानियां
अपना घर या दुकान किराये पर देना कमाई का एक अच्छा जरिया है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान की वजह बन सकती है. किसी भी अनजान व्यक्ति को अपनी चाबी सौंपने से पहले कुछ कानूनी और व्यावहारिक कदम उठाना बेहद जरूरी है.
पहचान और आय की जांच
किरायेदार फाइनल करने से पहले उनके असली दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी जरूर लें. इसके अलावा, किरायेदार की वित्तीय स्थिति जानने के लिए उनकी सैलरी स्लिप या ऑफिस का आईडी कार्ड मांगें, ताकि भविष्य में किराये को लेकर कोई विवाद न हो.
पुलिस वेरिफिकेशन है अनिवार्य
अक्सर मकान मालिक समय बचाने के चक्कर में पुलिस वेरिफिकेशन को टाल देते हैं, जो कि कानूनी रूप से गलत है. सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय पुलिस स्टेशन में किरायेदार का वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य है. अब यह प्रक्रिया लगभग हर राज्य में ऑनलाइन भी उपलब्ध है.
लिखित रेंट एग्रीमेंट
सिर्फ जुबानी भरोसे पर घर न दें. 11 महीने का एक लिखित रेंट एग्रीमेंट बनवाएं, जिसमें किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, नोटिस पीरियड और बिजली-पानी के बिल से जुड़े नियम साफ-साफ लिखे हों. दोनों पक्षों के हस्ताक्षर के बाद इसे कानूनी रूप से मान्य कराएं.
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