कोटपूतली में उड़ती धूल से निजात पाने के लिए डाला जा रहा पानी, सड़क बनी तलैया

Kotputli News: बहरोड़ कस्बे के मुख्य फ्लाईओवर के पास सर्विस सड़क सारसंभाल के अभाव में कच्चे रास्ते में तब्दील हो चुकी है. इस सड़क मार्ग से रोजाना हजारों की संख्या में वाहन निकलते हैं.

कोटपूतली में उड़ती धूल से निजात पाने के लिए डाला जा रहा पानी,  सड़क बनी तलैया
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Kotputli News: बहरोड़ कस्बे के मुख्य फ्लाईओवर के पास सर्विस सड़क सारसंभाल के अभाव में कच्चे रास्ते में तब्दील हो चुकी है. इस सड़क मार्ग से रोजाना हजारों की संख्या में वाहन निकलते हैं. जर्जर सड़क पर वाहनों के निकलने दिनभर धूल उड़ती रहती है. इससे आसपास के दुकानदारों और दुपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.

सड़क को सुधारने की जिम्मेदारी पटेल इंफ्राटेक कंपनी की है. शिकायत करने पर कंपनी अधिकारियों ने धूल की समस्या से निजात दिलाने के लिए सड़क पर पानी डलवाया जा रहा है. इससे यह पानी सड़क पर बने गड्डों में भर रहा है. जब भी कोई चौपहिया वाहन इन गड्डों से होकर निकलता है तो सर्विस सड़क के किनारे बस का इंतजार करने वाले यात्रियों के कपड़े छींटे पड़ने से खराब हो जाते हैं.

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इसी के साथ गड्डों की गहराई का अनुमान नहीं होने के कारण हादसे की आशंका बनी हुई. आए दिन कई दुपहिया वाहन चालक इन गड्डों के कारण चोटिल हो रहे हैं. निर्माण करने वाले अधिकारियों की अनदेखी के चलते स्थिति बदहाल बनी हुई है. जगह- जगह से उखड़ा फ्लाईओवर के नीचे का मार्ग मंहगा टोल चुकाने के बावजूद दिल्ली- जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 से गुजरने वाले लोगों को सुगम यात्रा नहीं मिल पा रही है. फ्लाईओवर के नीचे जगह-जगह गहरे गड्ढे होने से दुकानदारों एवं पैदल चलने वालों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

वहीं दूसरे मामले में दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर स्थित कराडिया गांव के आसपास के तालाबों में छबड़ा थर्मल की राख डाले जाने को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है. कांग्रेस देहात जिला अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा.

इस मामले में कांग्रेस के देहात जिलाअध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने निष्पक्ष जांच करवाने व थर्मल की राख का ट्रांसपोर्ट बंद करवाने की मांग उठाई. भानुप्रताप सिंह ने कहा कि 130 किलोमीटर दूर छबड़ा थर्मल की राख नियम विरुद्ध कराडिया गांव के आसपास के चार बड़े-बड़े तालाबों में डाली जा रही है.

इसके कारण न केवल पर्यावरण प्रदूषण फैल रहा है बल्कि किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचने की संभावना है,, वही राख से तालाब का सौंदर्य खत्म होता जा रहा है. यदि जल्द ही राख का ट्रांसपोर्ट बंद नहीं किया गया तो ग्रामीण चक्काजाम करेंगे और तालाब में उतरकर आंदोलन करेंगे.

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