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Maharana Pratap Elephant : महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की कई कहानियां आपने सुनी होगी. लेकिन क्या उनके हाथी के बारे में आप जानते हैं, जिसका नाम था रामप्रसाद.
महाराणा प्रताप का हाथी रामप्रसाद बहादुर और चतुर था. हल्दीघाटी के युद्ध में रामप्रसाद अपने महावत प्रताप सिंह तंवर के साथ मुगल सेना पर भारी पड़ा था.
कहते हैं हाथी रामप्रसाद ने मुगलों के 13 हाथियों और एक महावत को मार डाला था, महाराणा प्रताप अपने घोड़े चेतक की तरह ही रामप्रसाद नाम के हाथी से भी बहुत प्यार करते थे.
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बताया जाता है कि अकबर ने युद्ध के दौरान ही रामप्रसाद को बंदी बना लिया था. जिसके बाद उसे कड़ी सुरक्षा में आगरा ले जाया गया था.
अकबर, हाथी रामप्रसाद को अपनी सेना में शामिल करना चाहता था, लेकिन वो सफल नहीं हो सका.
अकबर ने हल्दीघाटी के युद्ध में हाथी रामप्रसाद को पकड़ने के लिये 7 हाथियों का चक्रव्यूह बनवाया था. जिन पर हर एक हाथी पर दो महावत बैठे थे.
इन सबको हाथी रामप्रसाद को पकड़ने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी. लेकिन फिर अकबर का बंदी बन चुका रामप्रसाद खाना पीना छोड़ चुका था.
रामप्रसाद को जब बंदी बना कर आगरा लाया गया था तो उस पर शाही निगरानी रखी गयी थी. कहते हैं कि अकबर ने राम प्रसाद का नाम बदलकर पीर प्रसाद रखा और गन्ने-फल और पानी दिया, लेकिन हाथी रामप्रसाद ने ना कुछ खाया ना कुछ पिया.
विकिपीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक अल कादिर बदायुनी की लिपियों में अकबर कहता है कि - जिसका हाथी मेरे सामने नहीं झुका, मैं महाराणा प्रताप को कैसे मार सकता था. महाराणा प्रताप के हाथी की अपने मालिक के प्रति वफादारी देखकर मुगल दंग थे.
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