Rajasthan News: राजस्थान में धड़ल्ले से बिक रहे महाराष्ट्र के लेबल वाले पव्वे, जानें किन कम्पनियों पर मेहरबान हुआ आबकारी विभाग

Rajasthan News: राजस्थान में महाराष्ट्र के लेबल वाले पव्वों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है! आबकारी विभाग की मेहरबानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं. बगैर अनुमति के सप्लाई और दोहरे लेबल से उपभोक्ता परेशान. आखिर क्यों GlobusSpirits और AgriBiotech को छूट?

Rajasthan News: राजस्थान में धड़ल्ले से बिक रहे महाराष्ट्र के लेबल वाले पव्वे, जानें किन कम्पनियों पर मेहरबान हुआ आबकारी विभाग
Image Credit: Rajasthan NewsSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Rajasthan News: राजस्थान में एक अजीब स्थिति सामने आई है, जहां महाराष्ट्र के पव्वों की बिक्री हो रही है. आबकारी विभाग की मेहरबानी निजी कम्पनियों पर दिखाई दे रही है, जो महाराष्ट्र लेबल वाले पव्वों की सप्लाई कर रही हैं. हैरानी की बात है कि यह सप्लाई बगैर अनुमति के कई जिलों में की जा रही है. पाली में 25 अप्रैल को पकड़े गए मामले के बावजूद आबकारी विभाग ने इन कम्पनियों को छूट दे दी है. इससे अब उपभोक्ता दोहरे लेबल के कारण पसोपेश में हैं. ग्लोबस स्पिरिट्स और एग्री बायोटेक जैसी कम्पनियों पर विभाग की मेहरबानी सवाल खड़े कर रही है.

राजस्थान निर्मित मदिरा के उत्पादन में राज्य सरकार के अधिकारी सरकारी कम्पनी गंगानगर शुगर मिल को तो नुकसान पहुंचा ही रहे हैं. वे निजी कम्पनियों पर भी जमकर मेहरबानी दिखा रहे हैं. एक तरफ जहां गंगानगर शुगर मिल की गुणवत्ता में गिरावट कर निजी कम्पनी ग्लोबस स्पिरिट्स के ऑर्डर बढ़ाए जा रहे हैं. वहीं कम्पनियों की मनमर्जी इस हद तक है कि वे राजस्थान में महाराष्ट्र निर्मित मदिरा का लेबल लगाकर मदिरा सप्लाई कर रहे हैं. क्या है पूरा मामला, जी मीडिया की यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट देखिए-

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राजस्थान में देशी मदिरा के उपभोक्ता इन दिनों हैरान-परेशान हैं. वे जो देशी मदिरा खरीद रहे हैं, उनकी पैकिंग पर मेड इन राजस्थान लिखा हुआ नहीं दिख रहा है. देशी मदिरा के कांच के पव्वों पर उभरा हुआ लिखा है, 'सेल इन महाराष्ट्र स्टेट ऑनली'. न केवल अंग्रेजी में, बल्कि मराठी भाषा में भी कुछ ऐसा ही वाक्य लिखा हुआ दिख रहा है. इसे पढ़कर एकबारगी तो उपभोक्ता नकली शराब या दूसरे राज्य की शराब मान लेते हैं. बाद में दुकानदार की समझाइश कई बार बहस में भी तब्दील हो जाती है. लेकिन बड़ी बात यह है कि निजी कम्पनियों को इस तरह के कांच के पात्रों में सप्लाई की खुली छूट खुद आबकारी विभाग ने दे दी है.

निजी कम्पनियों पर मेहरबानी की आबकारी विभाग की ये इन्तहा है. दरअसल राजस्थान में गंगानगर शुगर मिल के डिपो प्रभारियों से लेकर महाप्रबंधक तक, आबकारी विभाग के अधिकारी और वित्त विभाग के अधिकारी लगातार निजी कम्पनियों को फायदा पहुंचा रहे हैं. गंगानगर शुगर मिल के उत्पादों की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है. डिपो स्तर से शुगर मिल के उत्पादों के ऑर्डर कम किए जा रहे हैं, जबकि निजी कम्पनियों के ऑर्डर बढ़ाए जा रहे हैं. यही वजह है कि देशी मदिरा के सेगमेंट आरएमएल में निजी कम्पनी ग्लोबस का एकाधिकार हो चुका है. ग्लोबस स्पिरिट्स करीब 71 फीसदी मार्केट पर कब्जा किए हुए है.

महाराष्ट्र की मदिरा, क्या है पूरा मामला?
25 अप्रैल 2025 को पाली के RSGSM मदिरा डिपो पर एक शिकायत मिली थी. इसमें पाया गया कि ग्लोबस स्पिरिट्स लिमिटेड और एग्री बायोटेक की मदिरा पात्रों पर "सेल इन महाराष्ट्र स्टेट ऑनली" लिखा था, जो नियमों का उल्लंघन है. ये कम्पनियां राजस्थान में मदिरा की सप्लाई कर रही थीं, जो महाराष्ट्र में बिक्री के लिए ही थी.

पाली के RSGSM मदिरा डिपो पर शिकायत मिली कि ग्लोबस स्पिरिट्स लिमिटेड और एग्री बायोटेक की मदिरा पात्रों पर मराठी और अंग्रेजी में "सेल इन महाराष्ट्र स्टेट ऑनली" लिखा था. डिपो प्रभारी ने इसकी शिकायत RSGSM के जयपुर मुख्यालय को की, जिसके बाद आबकारी मुख्यालय ने दोनों कम्पनियों को 6 मई 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किए. नोटिस में कहा गया कि उन्होंने मुख्यालय के 15 अक्टूबर 2016 के परिपत्र का उल्लंघन किया है, जिसमें मदिरा सप्लाई के दिशा-निर्देश और प्रावधान तय किए गए थे.


मदिरा की सप्लाई और मदिरा भाई के पात्रों को लेकर नियम यह हैं राजस्थान राज्य में केवल उन्ही मदिरा पात्रों में शराब सप्लाई की जा सकती है, जिन पर 'फाॅर सेल इन राजस्थान' लिखा हुआ हो. अन्य राज्य के लिखे हुए मदिरा पात्रों में इस तरह से मदिरा सप्लाई नहीं की जा सकती है. आबकारी विभाग के नोटिसों के जवाब में ग्लोबस स्पिरिट्स और एग्री बायोटेक कम्पनियों ने कांच के पव्वों की कमी होने का तर्क दिया. कम्पनियों का तर्क था कि खाली ग्लास पव्वे उपलब्ध नहीं होने के चलते महाराष्ट्र लिखे मदिरा पात्रों में मदिरा की आपूर्ति की गई है.

कम्पनियों की गलती, आबकारी ने अप्रूव कर दिया!
ग्लोबस स्पिरिट्स और एग्री बायोटेक ने बिना अनुमति के मदिरा सप्लाई की, जिसमें महाराष्ट्र के लिए निर्धारित कांच के पात्रों में देशी मदिरा भेज दी गई. हैरानी की बात है कि इसके लिए आबकारी विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी. विभाग को बिना सूचना दिए ही सप्लाई कर दी गई. आबकारी विभाग ने कम्पनियों के तर्क को मान लिया और बिना अनुमति सप्लाई करने पर कोई जुर्माना नहीं लगाया. इसके बजाय, राजस्व के नुकसान के तर्क के आधार पर सप्लाई की अनुमति दे दी गई.

10 जून को अतिरिक्त आबकारी आयुक्त प्रदीप सिंह सांगावत ने आदेश जारी किया, जिसमें "सेल इन महाराष्ट्र स्टेट" लिखे पात्रों पर "CL-RAJASTHAN" की जेट प्रिंटिंग करने की अनुमति दी गई और 31 अगस्त तक इन्हीं पात्रों में मदिरा आपूर्ति की अनुमति दे दी गई.

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Ansh Raj

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अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
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