राजस्थान में बिक रहे महाराष्ट्र के पव्वे! आबकारी विभाग की मेहरबानी से मचा बवाल

Rajasthan News: राजस्थान निर्मित मदिरा के उत्पादन में राज्य सरकार के अधिकारी सरकारी कम्पनी गंगानगर शुगर मिल को तो नुकसान पहुंचा ही रहे हैं. वे निजी कंपनियों पर भी जमकर मेहरबानी दिखा रहे हैं.

राजस्थान में बिक रहे महाराष्ट्र के पव्वे! आबकारी विभाग की मेहरबानी से मचा बवाल

Rajasthan News: राजस्थान में देशी मदिरा के उपभोक्ता इन दिनों हैरान-परेशान हैं. वे जो देशी मदिरा खरीद रहे हैं, उनकी पैकिंग पर मेड इन राजस्थान लिखा हुआ नहीं दिख रहा है. देशी मदिरा के कांच के पव्वों पर उभरा हुआ लिखा है- 'सेल इन महाराष्ट्र स्टेट ओनली'. न केवल अंग्रेजी में, बल्कि मराठी भाषा में भी कुछ ऐसा ही वाक्य लिखा हुआ दिख रहा है. इसे पढ़कर एक बार तो उपभोक्ता नकली शराब या दूसरे राज्य की शराब मान लेते हैं. बाद में दुकानदार की समझाइश कई बार बहस में भी तब्दील हो जाती है, लेकिन बड़ी बात यह है कि निजी कंपनियों को इस तरह के कांच के पात्रों में सप्लाई की खुली छूट खुद आबकारी विभाग ने दे दी है. निजी कंपनियों पर मेहरबानी की आबकारी विभाग की ये इन्तहा है.

दरअसल, राजस्थान में गंगानगर शुगर मिल के डिपो प्रभारियों से लेकर महाप्रबंधक तक, आबकारी विभाग के अधिकारी और वित्त विभाग के अधिकारी लगातार निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रहे हैं. गंगानगर शुगर मिल के उत्पादों की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है. डिपो स्तर से शुगर मिल के उत्पादों के ऑर्डर कम किए जा रहे हैं, जबकि निजी कंपनियों के ऑर्डर बढ़ाए जा रहे हैं. यही वजह है कि देशी मदिरा के सेगमेंट आरएमएल में निजी कम्पनी ग्लोबस का एकाधिकार हो चुका है. ग्लोबस स्पिरिट्स करीब 71 फीसदी मार्केट पर कब्जा किए हुए है.

महाराष्ट्र की मदिरा, क्या है पूरा मामला?
25 अप्रैल 2025 को पाली के RSGSM के मदिरा डिपो पर शिकायत मिली कि ग्लोबस स्पिरिट्स लिमिटेड सबलेट एट श्रीमहामाया लिकर इंडस्ट्रीज उदयपुर, ग्लोबस स्पिरिट्स लिमिटेड बहरोड और एग्री बायोटेक अजीतगढ़, डिस्ट्रिक्स सीकर के मदिरा पात्रों में गड़बड़ी मिली. मदिरा पात्रों पर लिखा था 'सेल इन महाराष्ट्र स्टेट ऑनली'. मराठी और अंग्रेजी भाषाओं में कांच के पव्वों पर उभरा हुआ लिखा था. डिपो प्रभारी ने इसकी शिकायत RSGSM के जयपुर मुख्यालय को की. RSGSM के पत्र के आधार पर आबकारी मुख्यालय ने नोटिस जारी किए. दोनों कम्पनियों को 6 मई 2025 को कारण बताओ नोटिस दिए गए. नोटिस में कहा गया, मुख्यालय के 15 अक्टूबर 2016 के परिपत्र का उल्लंघन हुआ. मदिरा सप्लाई के दिशा-निर्देशों व प्रचलित प्रावधानों का उल्लंघन हुआ.

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मदिरा की सप्लाई और मदिरा भाई के पात्रों को लेकर नियम यह हैं राजस्थान राज्य में केवल उन्ही मदिरा पात्रों में शराब सप्लाई की जा सकती है, जिन पर 'फॉर सेल इन राजस्थान' लिखा हुआ हो. अन्य राज्य के लिखे हुए मदिरा पात्रों में इस तरह से मदिरा सप्लाई नहीं की जा सकती है. आबकारी विभाग के नोटिसों के जवाब में ग्लोबस स्पिरिट्स और एग्री बायोटेक कंपनियों ने कांच के पव्वों की कमी होने का तर्क दिया. कम्पनियों का तर्क था कि खाली ग्लास पव्वे उपलब्ध नहीं होने के चलते महाराष्ट्र लिखे मदिरा पात्रों में मदिरा की आपूर्ति की गई है.

कंपनियों की गलती, आबकारी ने अप्रूव कर दिया!
ग्लोबस स्पिरिट्स और एग्री बायोटेक ने बगैर अनुमति मदिरा सप्लाई की. महाराष्ट्र लिखे कांच के पात्रों में देशी मदिरा सप्लाई कर दी. रोचक यह कि इसके लिए आबकारी विभाग से अनुमति नहीं ली गई. बगैर अनुमति और विभाग को बगैर सूचना दिए ही सप्लाई कर दी गई. होना यह चाहिए था कि सप्लाई से पहले कंपनियां विभाग से अनुमति लेती. आबकारी विभाग ने भी कांच के पात्र नहीं होने के कम्पनियों के तर्क को मान लिया. कंपनियों द्वारा बगैर अनुमति सप्लाई करने पर कोई जुर्माना नहीं लगाया. इसके विपरीत राजस्व का नुकसान होने का तर्क देकर सप्लाई की अनुमति दे दी. 10 जून को अतिरिक्त आबकारी आयुक्त प्रदीप सिंह सांगावत ने आदेश निकाला. आदेश में लिखा कि सेल इन महाराष्ट्र स्टेट लिखे पात्रों में सप्लाई की जा सकेगी. साथ में CL-RAJASTHAN की जेट प्रिंटिंग कर लिखनी होगी. 31 अगस्त तक कंपनियों को इन्हीं पात्रों में मदिरा आपूर्ति की अनुमति दी.

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