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Jaipur News: आदर्श नगर श्रीराम मंदिर में जब रावण दहन की तैयारियां होती हैं, तो वहां केवल बांस, कपड़ा और पटाखों की गूंज नहीं होती बल्कि गूंजती है गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल. करीब डेढ़ महीने से मथुरा का एक श्रीराम मंदिर परिसर में मुस्लिम परिवार डेरा डाले है. इस दौरान परिवार न सिर्फ प्याज, लहसुन और नॉनवेज से परहेज करता है, बल्कि पूजा-पाठ में भी उसी श्रद्धा से शामिल होता है, जैसे कोई हिंदू परिवार. वजह है रावण, वह रावण, जिसे जलाने के लिए पूरा जयपुर उमड़ता है, उसे बनाने की परंपरा 65 साल से यही परिवार निभा रहा है.
जयपुर के आदर्श नगर में दशहरे की शाम जब 105 फीट ऊंचा रावण का पुतला अग्नि की लपटों में खाक होगा, तब लोगों की नजरें आतिशबाजी और दहन पर होगी लेकिन उस पुतले में सिर्फ बांस, कपड़ा और पटाखे नहीं जलेंगे, बल्कि एक परिवार की पांच पीढ़ियों की कला, दिन-रात की मेहनत और सामाजिक समरसता की विरासत भी साकार होगी.
मथुरा का मुस्लिम परिवार पिछले 65 सालों से जयपुर के दशहरे का कला निर्माता बना हुआ है, जिस पुतले को रामलीला में भगवान श्रीराम तीर से भस्म करेंगे, उसकी रचना में इन कारीगरों ने न सिर्फ दिन-रात की मेहनत डाली, बल्कि अपनी जीवन-शैली को भी बदल लिया. परिवार के मुखिया चांद बाबू कहते हैं कि हमारे लिए रावण का पुतला बनाने का रिश्ता सबसे पहले कला का है. पुतले की मूंछ, उसकी विकरालता, उसकी कद-काठी इन सबमें हमारी मेहनत झलकती है लेकिन दूसरा रिश्ता नफरत का है, क्योंकि यह पुतला बुराई का प्रतीक है और ढाई मिनट में राख होना ही इसकी नियति है.
रावण बनाने का यह हुनर अब पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच चुका है. वहीं, परिवार की अगली पीढ़ी भी इस काम को सीख रही है. चांद बाबू बताते हैं कि वे छह साल का थे, तभी से दादा के साथ यहां आने लगे थे. जब तक हमारा वंश चलेगा, रावण बनाना हमारा ही काम रहेगा. पहली बार जब उनके परदादा ने जयपुर में रावण बनाया था, तब उसकी ऊंचाई 20 फीट थी और मेहनताना 250 रुपये मिला था.आज वहीं, रावण 105 फीट ऊंचा खड़ा है. रावण बनाने के दौरान वे बिल्कुल सात्विक की तरह रहते हैं. प्याज-लहसुन और मांसाहार छोड़कर केवल सादा भोजन, मंदिर में पूजा और रोजाना रामलीला देखना यह सब उनके लिए अब रीति-नीति है.
आदर्श नगर श्रीराम मंदिर प्रन्यास के राजीव मनचंदा ने बताया कि करीब 65 साल पहले 20 फीट का रावण बनाया था, जिसके बाद से हर वर्ष रावण की ऊंचाई बढ़ाई गई. इस वजह से खर्च भी अधिक आने लगा. पिछले साल की तरह ही इस बार रावण की ऊंचाई 105 फीट रखी है. ऊंचाई अधिक होने के कारण रावण को 2 अक्टूबर को सुबह क्रेन की मदद से खड़ा किया जाएगा, अभी रावण लेटा हुआ है.
रावण बनाने में बांस, कपड़ा, किलो बाण, किलो मूलठ कागज, घास, रिम कागज सफेद, मैदा, नीला थोथा, सुतली, सहित अन्य सामग्री लगाई गई है. उधर मुस्लिम परिवार के चांद बाबू बताते हैं कि हम चाहते हैं कि पुतला खूबसूरत बने ताकि इसकी चर्चा हो. लोग बोलें वाह...क्या रावण है. वाकई क्या बनाया है. इसकी मूंछ, कद-काठी, लंबाई, चौड़ाई, विकरालता, अस्त्र-शस्त्र, किसी में कुछ कमी नहीं रह जाए इसलिए हमारा पूरा परिवार दिन-रात काम कर रहा है.
दिन हो या रात, हमें केवल रावण और उसकी खूबसूरती ही दिखती है. अभी हम सोते-उठते और जागते रावण के लिए ही सोच रहे हैं. रावण के बारे में मैंने कभी कुछ नहीं पढ़ा लेकिन इतना जानता हूं, जो लोग आतंक मचाते हैं, दूसरे लोगों को परेशान करते हैं, बुरी नजर रखते हैं, ऐसे बुरे लोगों का जलना या मरना ही ठीक है इसलिए अपनी मेहनत को हम खाक होते देख ना खुश होते हैं. ना ही दुखी होते हैं. बस इतना ही सोचते हैं कि हमें यह काम पुश्तों से मिला है. इसे पूरा करना हमारा फर्ज है.
बहरहाल, जब रावण का दहन होगा इसे देखने लोग आएंगे, हजारों रीलें भी बनेंगी, ऐसे में कोई कमी नहीं छोड़ रहे. लोग देखेंगे कि रावण सीना तानकर खड़ा है, हमारी नजर में वह पुतला नहीं, बल्कि हमारा कला और मेहनत खड़ी होगी. जब यह जलेगा, ये परिवार यही सोचेगा. चलो.. इस बार मेहनत सफल हुई. मौका मिला, तो अगले साल फिर रावण बनाने जयपुर आएंगे.
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