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Naresh Meena: राजस्थान के विवादास्पद स्वतंत्र उम्मीदवार नरेश मीणा ने शुक्रवार को शहीद स्मारक, जयपुर से एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने पिपलोदी, झालावाड़ के स्कूल भवन ढहने की घटना में मारे गए सात बच्चों को न्याय दिलाने के लिए आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की. मीणा ने कहा, "मैं आज शहीद स्मारक जयपुर से आमरण अनशन की घोषणा करता हूं. जब तक पिपलोदी झालावाड़ के बच्चों को न्याय नहीं मिलेगा, मैं अन्न का एक दाना भी अपने पेट में नहीं जाने दूंगा."
आमरण अनशन पर बैठे नरेश मीणा
यह घोषणा उस घटना के बाद आ रही है, जब जुलाई 2025 में झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल की पुरानी इमारत बारिश के दौरान ढह गई थी, जिसमें सात मासूम बच्चे अपनी जान गंवा बैठे थे. इस हादसे ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया था. नरेश मीणा, जो पहले डीग विधानसभा उपचुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चर्चित रहे हैं, ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जहां उन्होंने सरकारी लापरवाही के खिलाफ नारेबाजी की. इस प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. जुलाई 25 को गिरफ्तार हुए मीणा को सितंबर 4 को राजस्थान हाईकोर्ट ने जमानत दे दी, लेकिन अब वे न्याय की मांग को लेकर फिर से सड़क पर उतर आए हैं.
मैं आज शहीद स्मारक जयपुर से आमरण अनशन की घोषणा करता हूँ.!
— Naresh Meena (@NareshMeena__) September 12, 2025
1.जब तक पिपलोदी झालावाड के बच्चों को न्याय नहीं मिलेगा मैं अन्न का एक दाना भी अपने पेट में नहीं जाने दूँगा!
2.जब तक यह धरना चलेगा मैं मौन धारण रखूंगा, पाँच मिनिट के लिए रोज दोपहर 3 बजे मेरे साथियों से रणनीति को लेकर चर्चा… pic.twitter.com/ibhfMJNslD
रणनीति पर करूंगा चर्चा-नरेश मीणा
मीणा ने अनशन की शर्तें भी स्पष्ट कीं. उन्होंने कहा, "जब तक यह धरना चलेगा, मैं मौन धारण रखूंगा. रोज दोपहर 3 बजे केवल पांच मिनट के लिए अपने साथियों से रणनीति पर चर्चा करूंगा." उनका यह फैसला स्थानीय किसानों, युवाओं और प्रभावित परिवारों के बीच समर्थन जुटा रहा है. मीणा ने सरकार पर आरोप लगाया कि स्कूल निर्माण में भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण यह त्रासदी हुई, और दोषियों को अभी तक सजा नहीं मिली. उन्होंने मांग की कि प्रभावित बच्चों के परिवारों को उचित मुआवजा, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और स्कूलों की सुरक्षा जांच सुनिश्चित की जाए.
शहीद स्मारक से अनशन का ऐलान
शहीद स्मारक पर पहुंचे मीणा के समर्थक बड़ी संख्या में जमा हो गए. कई युवा संगठनों ने उनका साथ दिया, जबकि कुछ ने नारेबाजी शुरू कर दी. यह अनशन राजस्थान की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, खासकर तब जब राज्य सरकार शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर सवालों के घेरे में है.
मीणा का यह कदम उनकी पिछली घटनाओं—जैसे डीग में एसडीएम को थप्पड़ मारने के आरोप—के बाद आया है, जहां उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला दिया था. अनशन की शुरुआत के साथ ही स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है, और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. प्रभावित परिवारों ने मीणा के फैसले का स्वागत किया है, उम्मीद जताई कि यह आंदोलन न्याय की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.
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