नए मकान बनाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर, वाटर हार्वेस्टिंग के नियमों में संशोधन की तैयारी में सरकार

राजस्थान में नए मकान बनाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है. सरकार अब वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर के नियमों में शतों को संशोधित करने जा रही है, जिसमें भूखण्डों पर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर (Water Harvesting Structure) की सीमा को घटाया जाएगा. 

नए मकान बनाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर, वाटर हार्वेस्टिंग के नियमों में संशोधन की तैयारी में सरकार
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Jaipur : राजस्थान में नए मकान बनाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है. सरकार अब वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर के नियमों में शतों को संशोधित करने जा रही है, जिसमें भूखण्डों पर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर (Water Harvesting Structure) की सीमा को घटाया जाएगा. अभी प्रदेश में 300 मीटर या अधिक के भूखंडों पर बनने वाले मकानों में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाना जरूरी होता है, लेकिन अब सीमा को सरकार कम करेगी.

यह भी पढ़ें : Vaccination में अग्रणी रहने वाली ग्राम पंचायतों के लिए CM Gehlot का बड़ा फैसला, मिलेगा फंड

शहरों, गांवों में 200 वर्गमीटर के मकानों में हो पानी का संरक्षण
राजस्थान (Rajasthan News) में बारिश के पानी को संचय करने के लिए कढ़ाई से वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए थे. राज्य में बिल्डिंग बायलॉज के तहत 300 मीटर या इससे अधिक के भूखडों पर बने मकानों में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाने जाने का प्रावधान है,लेकिन अब सरकार इन नियमों में संशोधन करने जा रही है. सरकार वाटर स्ट्रक्चर बनाने की सीमा का घटाने की तैयारी कर रही है. जलदाय मंत्री बीडी कल्ला (BD Kalla) ने भूजल विभाग को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं. इसके साथ साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भी वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाने के लिए भूखण्ड के साइज के प्रावधानों में संशोधन और पानी को रिसाइकिल करने के लिए अधिक ट्रीटमेंट प्लान स्थापित करने के निर्देश दिए है. डॉ. कल्ला का कहना है कि शहरों और गांवों में 200 वर्गमीटर पर बनने वाले मकानों की छतों का पानी घर में संरक्षित किया जाए.

इसलिए जरूरी है सतही पानी का संचय करना
प्रदेश का भौगोलिक क्षेत्रफल 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर है, जो पूरे देश का 11 प्रतिशत भाग है, पूरे देश की तुलना में यहां की जनसंख्या 5.5 प्रतिशत है, लेकिन स्रोतों से पानी की उपलब्धता मात्र 1.15 प्रतिशत ही है. प्रदेश में मानसून के सीजन में 28 से 36 दिनों तक वर्षा होती है, जो निम्न और अनियमित श्रेणी में आती है. औसत वर्षा का आंकड़ा 525 मिलीमीटर है और वाष्प-उत्सर्जन बहुत अधिक है. 

प्रदेश में 15 रिवर बेसिन के माध्यम से सतही जल 19.56 बिलियन क्यूबिक मीटर और भू-जल (31 मार्च 2020 की स्थिति के अनुसार) की उपलब्धता 11.073 बिलियन क्यूबिक मीटर है. कृषि क्षेत्र में पानी का उपभोग 85 प्रतिशत से अधिक है, जो ज्यादातर भू-जल के स्रोतों पर आधारित है. इसी प्रकार पेयजल और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यकता का 65 प्रतिशत से अधिक भी भू-जल पर निर्भर है. इसके अलावा प्रदेश में भू-जल के लिहाज से 185 ब्लॉक्स अति दोहित (ओवर एक्सप्लोयटेड), 33 क्रिटिकल, 29 सेमी क्रिटिकल तथा 45 सुरक्षित श्रेणी में है.इसलिए सतही पानी का संचय करना बहुत आवश्यक है.

यह भी पढ़ें : राजस्थान के सियासी हालातों पर पायलट 'मौन', दिल्ली से जयपुर लौटने पर भी नहीं तोड़ी चुप्पी