मनरेगा साइट्स पर क्रांतिकारी बदलाव, जयपुर में श्रमिक बन रहे साक्षर, गूंज रही ‘क, ख, ग’ की आवाज

Jaipur News:  नरेगा कार्यस्थल पर दिनभर पसीना बहाने वाले श्रमिक अब पंक्तिबद्ध बैठकर क, ख, ग लिखते नज़र आते हैं. कल तक जिन हाथों में केवल मजदूरी की कुदाल थी, आज वही हाथ मस्टररोल पर हस्ताक्षर करने का आत्मविश्वास दिखा रहे हैं. जयपुर जिला प्रशासन के नरेगा आखर अभियान ने इन ग्रामीण श्रमिकों को निरक्षरता के अंधेरे से बाहर लाकर नई पहचान दी है.

मनरेगा साइट्स पर क्रांतिकारी बदलाव, जयपुर में श्रमिक बन रहे साक्षर, गूंज रही ‘क, ख, ग’ की आवाज
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Jaipur News: जयपुर जिले में मनरेगा साइट्स अब केवल काम की जगह नहीं, बल्कि शिक्षा के केंद्र बन रही हैं. जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के इनोवेटिव मॉडल के तहत मनरेगा श्रमिकों के लिए शुरू की गई साक्षरता पहल ने अज्ञानता के अंधेरे को दूर करने का बीड़ा उठाया है. अब हथौड़े और फावड़े के बीच ‘क, ख, ग’ की आवाजें गूंज रही हैं, जहां श्रमिक मस्टर रोल पर अंगूठे की जगह हस्ताक्षर कर रहे हैं. इस पहल के तहत श्रमिकों को न केवल पढ़ना-लिखना सिखाया जा रहा है, बल्कि बैंकिंग, यूपीआई और मोबाइल सुरक्षा की ट्रेनिंग भी दी जा रही है, जिससे उनकी डिजिटल पहचान मजबूत हो रही है.

विशेष रूप से महिला मेट इस बदलाव की ध्वजवाहक बनकर उभरी हैं, जो न सिर्फ पढ़ रही हैं, बल्कि अन्य श्रमिकों को भी भविष्य लिखने की प्रेरणा दे रही हैं. इस कार्यक्रम के तहत सर्टिफिकेट टेस्ट पास करने वाले श्रमिकों को ‘साक्षर श्रमिक’ का दर्जा दिया जाएगा. पिछले दो महीनों में इस पहल ने जयपुर जिले के 41,000 से अधिक श्रमिकों की जिंदगी में शिक्षा का उजाला लाया है. यह मॉडल न केवल मनरेगा श्रमिकों की पहचान में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है. जिला प्रशासन का यह प्रयास ग्रामीण भारत में साक्षरता और डिजिटल जागरूकता को बढ़ावा देने का एक अनूठा उदाहरण है.

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जयपुर जिले के नरेगा कार्यस्थल अब सिर्फ मजदूरी का ठिकाना नहीं रहे. यहां ईंट-पत्थर ढोने वाले श्रमिक अब किताब-कॉपी थामे बैठे हैं, कोई अक्षर जोड़ रहा है तो कोई गिनती. नरेगा आखर अभियान ने इन मेहनतकश हाथों को कलम थमाकर जिंदगी की दिशा बदल दी है. गांवों में दिनभर पसीना बहाने वाले ये श्रमिक अब पंक्तिबद्ध बैठकर “क, ख, ग” से शुरुआत कर रहे हैं. दो महीने पहले तक जिन अंगूठों से केवल मजदूरी की हाजिरी लगती थी, वही अंगूठे अब मस्टररोल पर हस्ताक्षर कर रहे हैं. जयपुर जिला प्रशासन की इस पहल ने अंगूठा छाप कहे जाने वाले हजारों नरेगा श्रमिकों को अपनी पहचान नए अंदाज में लिखने का हौसला दिया है.

जयपुर जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी की पहल पर संचालित नरेगा अखार अभियान के तहत जयपुर में कार्यरत कुल 2 लाख 14 हजार 907 मनरेगा श्रमिकों में सर्वे के बाद 46 हजार 791 से श्रमिक निरक्षर पाए गए. नरेगा आखर अभियान के तहत अब तक जयपुर जिले में प्रशिक्षण प्राप्त 3 हजार 866 मेटों और कार्मिकों ने 45 हजार 840 मनरेगा श्रमिकों को उल्लास पोर्टल पर पंजीकृत करने के बाद महज़ दो महीने में 41 हज़ार से ज़्यादा श्रमिक अब अंगूठा नहीं, अपने हस्ताक्षर से पहचान साबित कर रहे हैं.

35 हजार 713 श्रमिकों को सामान्य अक्षर ज्ञान, 27 हजार 611 श्रमिकों को बुनियादी संख्यात्मक ज्ञान हासिल करवाने में सफलता हासिल की है. आज आयोजित साक्षरता परीक्षा में 30 हज़ार श्रमिकों का उत्साह इस बदलाव की गवाही देता है. इस अभियान की खासियत है कि इसमें महिला मेट्स और स्थानीय कार्मिक ही आखर की अलख के वाहक बने. यानी शिक्षण-प्रशिक्षण भी श्रमिकों की ही टोली ने श्रमिकों को दिया.


वीओ-2-नरेगा आखर अभियान महज पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं. यहां श्रमिक बैंकिंग समझ रहे हैं, मोबाइल चलाना सीख रहे हैं, ओटीपी और पासवर्ड जैसी बारीकियां जान रहे हैं. यानि कल तक बैंक में खाता खोलने या एटीएम चलाने में डरने वाले ये लोग अब आत्मविश्वास से कह रहे हैं हम भी कर सकते हैं. इस अभियान में महिला मेट्स ध्वजवाहक बनकर उभरी हैं. उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण लेकर अन्य श्रमिकों को साक्षरता की रोशनी से जोड़ा है.

गांव-गांव में ज्ञान की यह अलख फैल रही है. अभियान के अगले चरण में डिजिटल और वित्तीय साक्षरता पर फोकस होगा. बैंकिंग, यूपीआई, ऑनलाइन सरकारी सेवाएं और मोबाइल एप्लिकेशन का सुरक्षित उपयोग इन श्रमिकों को सिखाया जाएगा. पास होने पर उन्हें प्रमाणपत्र भी मिलेगा. जिला परिषद की सीईओ श्रीमती प्रतिभा वर्मा कहती हैं. पहले श्रमिकों के चेहरे पर मजदूरी की थकान दिखती थी, अब उनमें शिक्षा से मिली उम्मीद की मुस्कान है.

नरेगा का कार्यस्थल अब मजदूरी का ही नहीं, बल्कि सीखने और सशक्त होने का भी केंद्र बन गया है. यह अभियान दिखा रहा है कि जब निरक्षर श्रमिक पढ़ना-लिखना सीखते हैं तो वे केवल हस्ताक्षर नहीं करते, बल्कि अपने भविष्य पर भी मुहर लगाते हैं. इस पहल का असली असर गाँवों की सामाजिक तस्वीर में दिख रहा है. महिलाएँ अब बैंक खाता चलाने और सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने लगी हैं. पुरुष श्रमिकों का आत्मविश्वास बढ़ा है, वे मोबाइल पर लेन-देन करना सीख रहे हैं.


बहरहाल, यह अभियान केवल अक्षरज्ञान नहीं सिखा रहा, बल्कि गांव की तस्वीर बदलने का सपना भी बो रहा है. मजदूरी से थककर घर लौटने वाले श्रमिक अब अपने बच्चों को होमवर्क में मदद कर पा रहे हैं. महिलाओं की आंखों में आत्मविश्वास की चमक है और पुरुषों के चेहरों पर उम्मीद की मुस्कान. गांव की पंचायत बैठकों में अब वही श्रमिक बोलने और अपनी बात रखने लगे हैं, जो पहले चुपचाप बैठे रहते थे. गुरुपूर्णिमा से शुरू हुआ यह अभियान केवल साक्षरता कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर कदम है.

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Ansh Raj

Ansh Raj

अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
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