PCC में आए प्रस्तावों पर गरमाई सियासत, BJP बोली-ACB के काम में दखलंदाजी करना PCC का काम नहीं

राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) की बैठक में निम्बाराम के खिलाफ़ प्रस्ताव पारित किया गया है. 

PCC में आए प्रस्तावों पर गरमाई सियासत, BJP बोली-ACB के काम में दखलंदाजी करना PCC का काम नहीं
विपक्ष में बैठी बीजेपी का कहना है कि क्या अब एसीबी और पुलिस सत्ताधारी पार्टी के कहने से काम करेगी?

Jaipur : राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) की बैठक में निम्बाराम के खिलाफ़ प्रस्ताव पारित किया गया है. डोर-टू-डोर कचरा इकट्ठा करने वाली कम्पनी बीवीजी से बातचीत के वीडियों के आधार पर निम्बाराम की गिरफ्तार की का प्रस्ताव पीसीसी में रखा गया और पीसीसी ने उसे सर्वसम्मति से पारित भी कर दिया. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी महासचिव की मौजूदगी में पारित इस प्रस्ताव के साथ ही माकन ने गोविन्द सिंह डोटासरा को क्लीन चिट भी दे दी, लेकिन पीसीसी में आए इस प्रस्ताव बीजेपी ने सवाल उठाये हैं. विपक्ष में बैठी बीजेपी का कहना है कि क्या अब एसीबी और पुलिस सत्ताधारी पार्टी के कहने से काम करेगी? 

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राजस्थान की राजनीति में मंत्रिमंडल फेरबदल की बातें चल रही थी. इस बीच कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी महासचिव अजय माकन विधायकों और पार्टी के पदाधिकारियों से फीडबैक लेने भी पहुंचे, लेकिन मंत्रिमंडल में बदलाव की बातें अचानक आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम की तरफ मुड गई. दरअसल आज हुई पीसीसी पदाधिकारियों की बैठक में कांग्रेस विधायक और प्रदेश उपाध्यक्ष रामलाल जाट ने निम्बाराम की गिरफ्तारी का प्रस्ताव रखा. प्रभारी महासचिव अजय माकन (Ajay Maken) ने कहा कि निम्बाराम की गिरफ्तारी के प्रस्ताव पर सभी ने सहमति दी है.

इसके साथ ही उन्होंने गोविन्द सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) के रिश्तेदारों को आरएएस इन्टरव्यू में मिले नम्बरों के मामले में पीसीसी चीफ को क्लीन चिट देते हुए कहा कि डोटासरा आमतौर पर आरएसएस के खिलाफ़ ज्यादा मुखर रहते हैं. इसलिए उन पर इस तरह के आरोप लगे हैं.

माकन का यह बयान और पीसीसी का प्रस्ताव दोनों ही बीजेपी के गले नहीं उतरा. माकन के बयान के तुरन्त बाद बीजेपी हमलावर हो गई. सबसे पहले प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र राठौड़, फिर प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और उसके बाद नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया (Gulab Chand Kataria) ने सवाल उठा दिये. राठौड़ ने पुलिस के कांग्रेसीकरण के आरोप लगाए तो पूनिया ने अपराध के मामलों में कार्रवाई को लेकर सरकार पर डबल स्टैण्डर्ड अपनाने के आरोप लगा दिए. पूनिया ने कहा कि पीसीसी की बैठक में किसी की गिरफ्तारी का प्रस्ताव लाना पराकाष्ठा है. उन्होंने कहा कि जो काम कानून का है वह भी पीसीसी में होगा तो कैसे काम चलेगा? पूनिया ने कहा कि हमारे यहां न्यायपालिका और दूसरी प्रशासनिक व्यवस्था भी है जिस पर यह काम छोड़ देना चाहिए. पूनिया ने इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया.

नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने तो और भी खरी-खरी कहते हुए पीसीसी के जरिये एसीबी के काम में दखलअंदाजी करने वाले प्रस्ताव पर सवाल उठाये. कटारिया ने कहा कि न तो एसीबी के काम में दखल देना पीसीसी का काम है और न ही गोविन्द सिंह डाटोसरा के मामले में उन्हें क्लीन चिट देना पीसीसी का काम है. एक कदम बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि डोटासरा के समधी ने अपने बच्चों के ओबीसी सर्टिफिकेट गलत आधार पर बनवाये इसकी जांच की बात भी होनी चाहिए.

पीसीसी में आए प्रस्ताव के बाद प्रदेश में राजनीति चर्चा का मुद्दा बदल गया है. सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पीसीसी में किस-किस मुद्दे पर प्रस्ताव आना चाहिए था. बीजेपी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर इसी तरह के प्रस्ताव के आधार पर काम होता है तो प्रस्ताव प्रदेश में कानून-व्यवस्था का भी आना चाहिए था और डोटासरा पर लगे आरोपों की जांच का भी आना चाहिए था. पार्टी के लोग तो यह भी कह रहे हैं कि एक प्रस्ताव कांग्रेस विधायक भरत सिंह के पत्रों में हो रही शिकायतों की जांच कराने का भी आना चाहिए था.

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