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Atal Bihari Vajpayee: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी स्वीकार्यता हर दल और हर वर्ग में देखी गई थी. वे एक कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ संवेदनशील कवि, ओजस्वी वक्ता और विचारशील राजनेता थे. अटल जी ने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं माना, बल्कि उन्होंने उसे हमेशा से सेवा, संवाद और सहमति का रास्ता बताया. जिसकी झलक उनके भाषणों में राष्ट्रभक्ति के रूप में और मानवीय संवेदनाओं की गहराई के साथ महसूस होती थी.
अटल जी का राजस्थान से रिश्ता केवल राजनीतिक ही नहीं था. पूर्व प्रधानमंत्री अपने इस रिश्ते को अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव से भी देखते थे. क्योंकि राजस्थान की धरती से उन्होंने अपने जीवन के कई ऐतिहासिक फैसलों और यादगार पलों को जिया है. जब भी अटल जी राजस्थान आए, उन्होंने इसे केवल एक राज्य नहीं, बल्कि अपने घर जैसा सम्मान दिया.
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राजस्थान का पोखरण जो कि जैसलमेर जिले में स्थित है. वह अटल जी के जीवन का सबसे ऐतिहासिक अध्याय के रूप में जाना जाता है. क्योंकि 11 और 13 मई 1998 को उनके नेतृत्व में भारत ने पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण किए थे, जिसने भारत को विश्व पटल पर एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया. इसके बाद उन्होंने “जय जवान, जय किसान” के नारे में “जय विज्ञान” जोड़कर देश को आत्मनिर्भर और आधुनिक सोच की दिशा दिखाई. यही कारण है कि पोखरण आज भी अटल जी के साहसिक फैसलों का एक प्रतीक माना जाता है.
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अटल बिहारी वाजपेयी का राजस्थान के नेताओं के साथ भी कभी न टूटने वाला रिश्ता रहा. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व उपराष्ट्रपति भैंरो सिंह शेखावत से उनकी दोस्ती केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि उससे भी आगे बढ़कर एक पारिवारिक रिश्ते जैसी थी. अटल जी बाबोसा को अपने बड़े भाई की तरह मानते थे. इस रिश्ते की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने शेखावत जी की बेटी की शादी में कन्यादान किया था. बाड़मेर से आने वाले जसवंत सिंह जी का भी अटल जी से बेहद ही मधुर रिश्ता रहा. कहा जाता है कि जयवंत जी अटल जी के हर बड़े निर्णय में उनके साथ खड़े रहे.
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राजस्थान से अटल जी का जुड़ाव सांस्कृतिक और धार्मिक स्तर पर भी देखा जाता है. बताया जाता है कि उन्हें पुष्कर से विशेष लगाव था और वे 1992 में पुष्कर सरोवर भी घूमने के लिए आए थे. इसी के साथ अजमेर शरीफ के प्रति भी उनकी गहरी श्रद्धा थी और तो और उन्होंने हर साल ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर उर्स के मौके पर अपनी ओर से चादर भिजवाई थी. इसके अलावा, अटल जी को राजस्थान का पारंपरिक खान-पान भी बेहद पसंद था. जयपुर की प्रसिद्ध फिन्नी मिठाई और यहां का चिवड़ा उन्हें खास तौर पर बहुत ही भाता था.
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राजनीतिक रूप से भी राजस्थान अटल जी के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा. उन्होंने अपने जीवन में जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर और भरतपुर जैसे शहरों में कई जनसभाएं और रैलियां कीं. बता दें कि 1971 के लोकसभा चुनाव के दौरान वे जयपुर की पूर्व महारानी गायत्री देवी के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे थे. उसी दौर का एक चर्चित किस्सा यह भी है कि पाली रेलवे स्टेशन पर उन्होंने एक साधारण कार्यकर्ता के टिफिन से भोजन किया था, जो आगे चलकर भाजपा के वरिष्ठ नेता मदन राठौड़ बने.
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राजस्थान में अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम बड़ा सार्वजनिक संबोधन वर्ष 2003 में जयपुर के अमरूदों के बाग में हुआ था. भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ के समापन समारोह में दिया गया यह भाषण आज भी लोगों को याद है. उस मंच से अटल जी ने जिस सहजता और आत्मीयता से बात की, उसने राजस्थान के लोगों के साथ उनके गहरे रिश्ते को एक बार फिर सामने ला दिया. अटल जी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन राजस्थान की धरती पर उनकी स्मृतियां और योगदान हमेशा जीवित रहेंगे.
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